उत्तर प्रदेश का नोएडा इस वक्त सुलग रहा है. वेतन वृद्धि की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे हजारों श्रमिकों का गुस्सा अब बेकाबू हो चुका है. फेज-2 में शुरू हुई तोड़फोड़ और आगजनी की लपटें शहर के कई हिस्सों में महसूस की जा रही हैं. लेकिन इस धुएं के बीच अब सियासी चिंगारी भी लग गई है. समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने इस मुद्दे पर सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया है.
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इस दौर में कम वेतन में घर चलाना मुश्किल: अखिलेश
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस आंदोलन को भाजपा की एकतरफा नीतियों का नतीजा बताया है. उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा करते हुए भाजपा सरकार पर पूंजीपतियों के पोषण और मजदूरों के शोषण का गंभीर आरोप लगाया.
अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए लिखा, "नोएडा में वेतन बढ़ाने को लेकर उग्र हुए आंदोलन का कारण भाजपा सरकार की वो एकतरफ़ा नीति है जो पूंजीपतियों का पोषण करती है लेकिन सामान्य काम करनेवाले कर्मचारियों और वेतनभोगी श्रमिकों-मज़दूरों का शोषण. भाजपाई चंदादायी पूंजीपतियों के एटीएम में तो पैसे भरते जा रहे हैं, लेकिन श्रमिकों-मज़दूरों के वेतन के लिए इनके एटीएम खाली हैं. बेतहाशा महंगाई के इस दौर में कम वेतन में घर चलाना कितना मुश्किल है, ये एक परिवारवाला ही समझ सकता है. वेतनभोगी कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा!"
श्रमिकों का क्या कहना है?
नोएडा की गलियों में गूंजती चीखें और जलती गाड़ियां उस आक्रोश की गवाही दे रही हैं, जो पिछले कई दिनों से सुलग रहा था. मजदूरों का साफ कहना है कि लेबर लॉ के तहत जो हाल ही में वेतन वृद्धि हुई है, वह ऊंट के मुंह में जीरे के समान है. श्रमिकों का कहना है कि मौजूदा महंगाई में यह बढ़ोतरी नाकाफी है. आक्रोशित भीड़ अब फैक्ट्रियों में घुसकर प्रदर्शन कर रही है, जिससे करोड़ों की संपत्ति का नुकसान हुआ है.
मौके पर पुलिस प्रशासन और पीएसी (PAC) की टीमें तैनात हैं, लेकिन माहौल फिलहाल काबू से बाहर नजर आ रहा है. एक तरफ जहां फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ जारी है, वहीं दूसरी ओर अखिलेश यादव के इस बयान ने प्रशासन पर दबाव और बढ़ा दिया है. अब देखना यह होगा कि सरकार इस उग्र आंदोलन को शांत करने के लिए क्या कदम उठाती है?
यहां देखें वीडियो:
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