UGC के नए नियम को लेकर भड़के नोएडा भाजपा युवा मोर्चा के उपाध्यक्ष राजू पंडित का इस्तीफा, चिट्ठी में ये सब लिखा

भूपेंद्र चौधरी

27 Jan 2026 (अपडेटेड: 27 Jan 2026, 04:35 PM)

BJYM Noida Vice President Resigns: नोएडा महानगर से भाजपा युवा मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष राजू पंडित ने यूजीसी के नए नियमों को सवर्ण विरोधी और विभाजनकारी बताते हुए अपने पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया है.

BJP Yuva Morcha Vice President Raju Pandit

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BJYM Noida Vice President Resigns: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी UGC  के नए रेगुलेशन 2026 को लेकर मचा बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है. प्रशासनिक अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री के बाद अब राजनीतिक गलियारों में भी इसके खिलाफ इस्तीफों का दौर शुरू हो गया है. नोएडा महानगर से भाजपा युवा मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष राजू पंडित ने यूजीसी के नए नियमों को सवर्ण विरोधी और विभाजनकारी बताते हुए अपने पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया है.राजू पंडित ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित पत्र में  लिखा कि वे अपनी विचारधारा तथा आत्मसम्मान के खातिर इस पद को छोड़ रहे हैं.

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'UGC जैसे काले कानून के कारण मैं त्यागपत्र देता हूं'

अपना त्यागपत्र देते हुए भाजपा युवा मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष राजू पंडित ने अपने पत्र में लिखा 'सवर्ण जाति के बच्चों के विरुद्ध लाए गए UGC जैसे काले कानून के कारण मैं भाजपा युवा मोर्चा नोएडा महानगर के जिला उपाध्यक्ष पद से त्यागपत्र देता हूं. यह कानून समाज के प्रति अत्यंत घातक और विभाजनकारी है. मैं इस बिल से पूरी तरह असंतुष्ट हूं. भारत सरकार के रस बिल का मैं समर्थन नही करता हूं. ऐसे अनैतिक बिल का समर्थन मेरे आत्मसम्मान और विचारधारा से एकदम अलग है.'अलंकार अग्निहोत्री के बाद अब राजू पंडित का इस्तीफा यह साफ कर दिया है कि सवर्ण समाज के लोगों में इस मुद्दे को लेकर नाराजगी है. 

क्या है UGC विवाद

उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव को रोकने के उद्देश्य से UGC ने 13 जनवरी 2026 से नए रेगुलेशन लागू कर दिए हैं. इस नियम का मुख्य फोकस कैंपस में ओबीसी (OBC) छात्रों को भी एससी/एसटी (SC/ST) की तरह सुरक्षा प्रदान करना और उनके लिए शिकायत निवारण प्रणाली को मजबूत करना है. इस नए नियम के तहत पहली बार OBC वर्ग को भी स्पष्ट रूप से जातिगत भेदभाव की श्रेणी में शामिल किया गया है. हर विश्वविद्यालय और कॉलेज में SC, ST और OBC छात्रों के लिए एक समर्पित सेल बनाना अनिवार्य होगा.इक्विटी कमेटी यूनिवर्सिटी स्तर पर एक कमेटी बनेगी जिसमें OBC, महिला, SC/ST और दिव्यांग प्रतिनिधि शामिल होंगे. यह कमेटी हर 6 महीने में अपनी रिपोर्ट UGC को सौंपेगी.

इस नियम का विरोध करने वाले छात्रों और शिक्षकों के पास तीन मुख्य तर्क हैं. विरोधियों का मानना है कि शिकायतकर्ता पर दंड का प्रावधान न होने से सामान्य वर्ग के मेधावी छात्रों के खिलाफ झूठी शिकायतें हो सकती हैं जिससे उनका करियर बर्बाद हो सकता है. इक्विटी कमेटी में सामान्य वर्ग के लिए कोई अनिवार्य प्रतिनिधित्व नहीं रखा गया है जिससे उन्हें पक्षपाती फैसलों का डर है. वहीं तीसरा तर्क दिया जा रहा है कि यह नियम लागू होते ही सामान्य वर्ग के छात्रों को पहले से ही शोषक या अपराधी की श्रेणी में खड़ा कर देता है.

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