Noida Protest News: उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा न्यूनतम मजदूरी में बढ़ोतरी के फैसले के बाद नोएडा में श्रमिक आंदोलन थमता नजर नहीं आ रहा है.अब इस विरोध की आग फैक्ट्रियों से निकलकर पॉश हाउसिंग सोसाइटियों तक पहुंच गई है. सोमवार को नोएडा के सेक्टर 121 स्थित क्लियो काउंटी सोसाइटी के बाहर घरेलू कामगारों यानी मेड्स और सफाई कर्मियों ने वेतन वृद्धि की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया. देखते ही देखते यह आंदोलन हिंसक हो गया जिसमें उपद्रवियों द्वारा पथराव और तोड़फोड़ की गई. इस घटना में पुलिसकर्मियों को भी चोटें आई हैं.
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वेतन वृद्धि की मांग पर सड़क पर उतरीं महिलाएं
जानकारी के अनुसार, क्लियो काउंटी सोसाइटी में काम करने वाली मेड्स और सफाई कर्मी महिलाएं लंबे समय से अपनी सैलरी बढ़ाने की मांग कर रही थीं. उनका तर्क है कि बढ़ती महंगाई के बीच मौजूदा वेतन में गुजारा करना मुश्किल हो गया है. जब उनकी मांगों पर कोई सुनवाई नहीं हुई तो सोमवार सुबह बड़ी संख्या में महिलाएं सड़क पर उतर आईं और सोसाइटी के गेट पर धरना शुरू कर दिया.
पुलिस पर पथराव
शांतिपूर्ण शुरू हुआ यह प्रदर्शन उस समय उग्र हो गया जब कुछ उपद्रवी तत्वों ने पथराव शुरू कर दिया. मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों ने बताया कि भीड़ को समझाने की कोशिश की जा रही थी. तभी पीछे से पत्थर फेंके गए. इस हमले में पुलिस बल के जवान घायल हुए हैं और पुलिस की गाड़ियों के शीशे भी टूट गए हैं. पुलिस ने मौके से कुछ संदिग्धों को हिरासत में लिया है और जांच कर रही है कि वे सोसाइटी के कर्मी हैं या बाहर से आए उपद्रवी.
न्यूनतम मजदूरी में बढ़ोतरी का असर
हाल ही में फैक्ट्री श्रमिकों के भारी विरोध के बाद यूपी सरकार ने न्यूनतम मजदूरी की दरों में संशोधन किया है.
अकुशल मजदूर: ₹11,313 से बढ़ाकर ₹13,690 प्रति माह.
अर्धकुशल और कुशल: इनके वेतन में भी आनुपातिक वृद्धि की गई है.
फैक्ट्री मजदूरों की इस जीत ने अब घरेलू कामगारों को भी प्रेरित कर दिया है. नोएडा की विभिन्न सोसाइटियों में काम करने वाली महिलाओं का कहना है कि जब सरकार ने मजदूरी बढ़ा दी है तो सोसाइटियों में भी उन्हें इसका लाभ मिलना चाहिए.
प्रशासनिक कार्रवाई और तनाव
जिले में बिगड़ते हालात को देखते हुए प्रशासन अलर्ट मोड पर है. सरकार ने मजदूरों और नियोक्ताओं (Employers) के बीच मध्यस्थता के लिए एक विशेष समिति का गठन किया है. फिलहाल क्लियो काउंट समेत आसपास के सेक्टर्स में भारी पुलिस बल तैनात है. प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस आंदोलन को अन्य सोसाइटियों में फैलने से रोकने की है.
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