छोटे बच्चे सड़क पर रोते नजर आए... बिजनौर में मोहर्रम से पहले पुलिस ने मॉक ड्रिल में छोड़े आंसू गैस के गोले, परेशान दिखे लोग!

ऋतिक राजपूत

24 Jun 2026 (अपडेटेड: 20 Jul 2026, 12:06 PM)

Bijnor Tear Gas Incident: आगामी मोहर्रम पर्व को शांतिपूर्ण और सुरक्षित माहौल में संपन्न कराने के उद्देश्य से बिजनौर की रिजर्व पुलिस लाइन में आयोजित दंगा नियंत्रण मॉक ड्रिल अब चर्चा का विषय बन गई है.

Bijnor Police Mock Drill News

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Bijnor Police Mock Drill News: आगामी मोहर्रम पर्व को शांतिपूर्ण और सुरक्षित माहौल में संपन्न कराने के उद्देश्य से बिजनौर की रिजर्व पुलिस लाइन में आयोजित दंगा नियंत्रण मॉक ड्रिल अब चर्चा का विषय बन गई है. पुलिस की ओर से इसे कानून-व्यवस्था बनाए रखने की तैयारी बताया जा रहा है, लेकिन अभ्यास के दौरान इस्तेमाल किए गए अश्रु गैस (टियर गैस) के गोलों का धुआं आसपास के बाजारों, दुकानों और सड़कों तक पहुंच गया. इससे वहां मौजूद राहगीरों, बच्चों, दुकानदारों और स्थानीय लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कई लोगों की आंखों में तेज जलन हुई, जबकि छोटे बच्चे सड़क पर रोते हुए नजर आए.

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स्थानीय लोगों ने उठाए सवाल

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक सोमवार को पुलिस लाइन परिसर में दंगा नियंत्रण का अभ्यास चल रहा था. इसी दौरान टियर गैस के गोलों से निकला धुआं हवा के साथ आसपास के इलाकों में फैल गया. सड़क पर चल रहे कई लोग अपनी आंखें मलते दिखाई दिए, जबकि कुछ लोगों को खांसी और सांस लेने में दिक्कत की शिकायत हुई. स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें पहले से इस तरह की किसी मॉक ड्रिल या टियर गैस के इस्तेमाल की कोई जानकारी नहीं दी गई थी. दुकानदारों का आरोप है कि अचानक धुआं फैलने से ग्राहकों और व्यापारियों को परेशानी झेलनी पड़ी. कुछ अभिभावकों ने सवाल उठाया कि यदि यह केवल अभ्यास था तो आम लोगों को इसकी कीमत क्यों चुकानी पड़ी. उनका कहना है कि यदि कोई बुजुर्ग, अस्थमा का मरीज या गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्ति इसकी चपेट में आ जाता, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होती.

क्या होती है टियर गैस?

अश्रु गैस एक रासायनिक दंगा-नियंत्रण एजेंट होती है, जिसका उपयोग भीड़ को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है. इसके प्रमुख रासायनिक घटकों में सीएस गैस (2-क्लोरोबेंज़ालमैलोनोनाइट्राइल), सीएन गैस (क्लोरोएसीटोफेनोन) और सीआर गैस (डाइबेंज़ॉक्साज़ेपीन) शामिल हैं. इनके साथ धुआं उत्पन्न करने वाले अन्य रासायनिक मिश्रणों का भी इस्तेमाल किया जाता है. विशेषज्ञों के अनुसार टियर गैस के संपर्क में आने से आंखों में तेज जलन, लगातार पानी आना, आंखों का लाल होना, खांसी, गले में जलन, सांस लेने में कठिनाई, त्वचा में जलन, घबराहट और बेचैनी जैसी समस्याएं हो सकती हैं. खासकर बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा के मरीजों पर इसका असर अपेक्षाकृत अधिक गंभीर हो सकता है.

सुरक्षा मानकों पर भी उठे सवाल

सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह की मॉक ड्रिल के दौरान आसपास के नागरिकों और व्यापारियों को पहले से सूचना देना, हवा की दिशा का ध्यान रखना, स्कूलों और बाजारों से पर्याप्त दूरी पर अभ्यास करना, मेडिकल सहायता और एम्बुलेंस की व्यवस्था रखना तथा सुरक्षा घेरा बनाना जरूरी माना जाता है. वहीं पुलिस के मुताबिक इस अभ्यास में भीड़ नियंत्रण, रणनीतिक घेराबंदी, त्वरित प्रतिक्रिया, लाठीचार्ज, वाटर कैनन, एंटी-रायट गन और अश्रु गैस के उपयोग का अभ्यास कराया गया. यह मॉक ड्रिल पुलिस अधीक्षक बिजनौर के निर्देशन तथा क्षेत्राधिकारी नगर/लाइन्स अभय कुमार पाण्डेय के नेतृत्व में आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न थानों के उपनिरीक्षक, मुख्य आरक्षी, आरक्षी और महिला आरक्षियों ने हिस्सा लिया. मोहर्रम जैसे संवेदनशील पर्व से पहले सुरक्षा तैयारियां जरूरी हैं, लेकिन इस घटना के बाद यह बहस तेज हो गई है कि भविष्य में ऐसे अभ्यासों के दौरान आम जनता की सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त सावधानियां कैसे बरती जाएं.