'इंजीनियर आग लगने के लिए जिम्मेदार नहीं...' लखनऊ अग्निकांड में सस्पेंड इंजीनियर के बचाव में उतरी कर्मचारी यूनियन, हाई-लेवल जांच की उठी मांग!

Lucknow Fire Tragedy Suspended Engineer Case: लखनऊ के अलीगंज स्थित भीषण अग्निकांड में 15 लोगों की मौत के बाद जिन चार अधिकारियों को निलंबित किया गया था, उस कार्रवाई पर अब सवाल उठने लगे हैं. उत्तर प्रदेश की विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने बिजली विभाग के एक्जीक्यूटिव इंजीनियर के सस्पेंशन को गलत बताते हुए इसे जल्दबाजी में लिया गया प्रशासनिक फैसला करार दिया है.

Lucknow Fire Tragedy Suspended Engineer Case

Lucknow Fire Tragedy Suspended Engineer Case (Photo: AI Generated)

यूपी तक

• 09:52 AM • 24 Jun 2026

follow google news

Lucknow Suspended Engineer Case: लखनऊ के अलीगंज स्थित भीषण अग्निकांड में 15 लोगों की मौत के बाद जिन चार अधिकारियों को निलंबित किया गया था, उस कार्रवाई पर अब सवाल उठने लगे हैं. उत्तर प्रदेश की विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने बिजली विभाग के एक्जीक्यूटिव इंजीनियर के सस्पेंशन को गलत बताते हुए इसे जल्दबाजी में लिया गया प्रशासनिक फैसला करार दिया है. समिति ने पूरे मामले की हाई-लेवल, निष्पक्ष और तकनीकी विशेषज्ञों से जांच कराने की मांग की है. समिति का कहना है कि जांच पूरी होने से पहले किसी अधिकारी या कर्मचारी को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा.

यह भी पढ़ें...

समिति बोली- इंजीनियर को सीधे जिम्मेदार ठहराना गलत

अग्निकांड के बाद बिजली विभाग के एक्जीक्यूटिव इंजीनियर (कलेक्शन) गौरव कुमार, फायर सब स्टेशन ऑफिसर (एफएसएसओ) कमलेंद्र कुमार सिंह, एलडीए के एई अनिल कुमार और जेई प्रमोद कुमार को निलंबित किया गया था. विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने अपने बयान में कहा, 'घटना के संबंध में जानकीपुरम जोन के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर का सस्पेंशन गलत और जल्दबाजी में किया गया एडमिनिस्ट्रेटिव एक्शन है. मौजूद तथ्यों के आधार पर इंजीनियर आग लगने के हादसे के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं है.' समिति के अनुसार संबंधित परिसर में साल 2016 से वैध कमर्शियल बिजली कनेक्शन था और 20 किलोवाट तक स्वीकृत लोड बढ़ाने की अनुमति भी मौजूद थी.

आग की वजह और सिस्टम पर उठाए सवाल

संघर्ष समिति का कहना है कि बिजली विभाग के मौजूदा वर्टिकल स्ट्रक्चर के तहत एक्जीक्यूटिव इंजीनियर को वास्तविक बिजली खपत की जानकारी रियल टाइम में नहीं मिलती. समिति के मुताबिक, प्रारंभिक जानकारी में आग शॉर्ट सर्किट या भवन के अंदरूनी इलेक्ट्रिकल सिस्टम में खराबी से लगने की बात सामने आई है. ऐसे में अंदरूनी वायरिंग, इलेक्ट्रिकल उपकरणों, फायर सेफ्टी सिस्टम और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना भवन मालिक की जिम्मेदारी होती है. समिति ने यह भी कहा कि इलेक्ट्रिकल सेफ्टी डायरेक्टरेट सुरक्षा स्वीकृति और जरूरी निरीक्षण के लिए जिम्मेदार संस्था है. यदि किसी उपभोक्ता द्वारा स्वीकृत लोड से अधिक बिजली इस्तेमाल की गई और इसकी जानकारी समय पर संबंधित अधिकारी तक नहीं पहुंची, तो पहले सिस्टम की कमियों और सूचना साझा करने की प्रक्रिया की जांच होनी चाहिए.

अब यूनियन भी खुलकर आई सामने

इस मामले में इससे पहले निलंबित फायर सब स्टेशन ऑफिसर कमलेंद्र कुमार सिंह ने भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर अपने खिलाफ हुई कार्रवाई को अनुचित बताया था. उन्होंने पत्र में लिखा था, 'मेरे खिलाफ कार्रवाई नाइंसाफी है. मेरा कार्यक्षेत्र सीमित है. भवनों को फायर क्लीयरेंस देने का अधिकार मुझ पर नहीं है. यह जिम्मेदारी सीएफओ की है. अग्निकांड में सारी कमी सीएफओ की है, इसलिए कार्रवाई भी उन्हीं पर होनी चाहिए.' हालांकि बाद में कमलेंद्र कुमार सिंह अपने इस बयान से पीछे हट गए और कहा कि उनसे यह बातें जबरन कहलवाई गई थीं. अब कर्मचारी संगठन के खुलकर सामने आने के बाद अग्निकांड में की गई प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर बहस और तेज हो गई है, जबकि मामले की जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी है.

(आज तक के इनपुट से)