'पापा मुझे बचा लो...' पिता ने रोते हुए बताया शहजान से आखिरी कॉल पर क्या बात हुई थी, बाराबंकी के दो घरों में पसरा मातम

लखनऊ के अलीगंज अग्निकांड में जान गंवाने वाले छात्र मोहम्मद शाहजान की आखिरी फोन कॉल ने सभी को भावुक कर दिया. आग में फंसने के बाद उन्होंने अपने पिता को फोन कर मदद की गुहार लगाई, लेकिन भीषण धुएं और लपटों के कारण उन्हें बचाया नहीं जा सका.

UP Tak

सैयद रेहान मुस्तफा

23 Jun 2026 (अपडेटेड: 23 Jun 2026, 01:02 PM)

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Lucknow Fire: "पापा, मुझे बचा लो..." ये वो आखिरी और बेबस शब्द थे, जो लखनऊ अग्निकांड में जान गंवाने वाले शाहजान ने फोन पर अपने पिता से कहे थे. बेटा जिंदगी की भीख मांग रहा था, पिता महज 10 मिनट में मौके पर पहुंच भी गए, लेकिन आग की भीषण लपटों के सामने बेबस रह गए.

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उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में सोमवार दोपहर करीब 2:15 बजे एक बहुमंजिला इमारत में भीषण आग लग गई. इस दर्दनाक हादसे ने कुल 15 मासूम जिंदगियों को लील लिया. इनमें बाराबंकी के रहने वाले दो युवक मोहम्मद शाहजान और मोहम्मद अम्मार भी शामिल हैं. देर रात जब दोनों के शव उनके घर पहुंचे, तो पूरे इलाके में मातम पसर गया.

पिता बोले- 'लोग वीडियो बनाते रहे'

बाराबंकी के फतेहपुर कस्बे के रहने वाले मोहम्मद शाहजान लखनऊ में रहकर पढ़ाई कर रहे थे. हादसे के वक्त वह कोचिंग के क्लासरूम में ही फंस गए.

मृतक शाहजान के पिता मोहम्मद इमरान ने रोते हुए बताया, "बेटे का फोन आते ही हम भागकर पहुंचे. कोचिंग के अंदर जाने की बहुत कोशिश की, लेकिन आग इतनी भयानक थी कि अंदर पैर रखने की जगह नहीं थी. बेटा अंदर से चिल्लाता रहा... पापा बचा लो. वहां मौजूद लोग मदद करने के बजाय मोबाइल से वीडियो बना रहे थे. हमने उनसे मिन्नतें कीं, लेकिन कोई आगे नहीं आया. फायर ब्रिगेड भी देर से पहुंची. कोचिंग में सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं थे. जिस कमरे में मेरा बेटा था, उसका दरवाजा ऑटोमैटिक लॉक हो गया था और धुआं भरने से दम घुटने के कारण उसकी मौत हो गई. वह हमारा इकलौता बेटा था."

ग्राफिक डिजाइनर अम्मार की भी गई जान

इस हादसे में बाराबंकी के गदिया निवासी 24 वर्षीय मोहम्मद अम्मार की भी मौत हो गई. अम्मार इसी इमारत में एक ग्राफिक डिजाइनर के रूप में काम करते थे. अम्मार अपने भाइयों में सबसे बड़े थे. उनके पिता मंसूर आलम वेल्डिंग का काम करते हैं.

अम्मार की मौत से परिवार का सबसे बड़ा आर्थिक सहारा छिन गया है और उनके घर में सिर्फ सन्नाटा और चीख-पुकार बची है.

कैसे हुआ यह भयानक हादसा?

सोमवार की दोपहर अलीगंज की इस बहुमंजिला इमारत के लिए काल बनकर आई. माना जा रहा है कि बेसमेंट में लगे एसी में शॉर्ट सर्किट होने की वजह से आग लगी.

आग इतनी तेजी से फैली कि दूसरी मंजिल पर स्थित गेमिंग जोन में मौजूद छात्रों को बाहर निकलने का रास्ता ही नहीं मिला. जान बचाने के लिए कई छात्र बाथरूम में छिप गए, लेकिन वहां धुआं भरने से उनकी सांसें थम गईं. वहीं, एक छात्र ने पहली मंजिल से कूदकर जान बचाने की कोशिश की, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया.

इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर कमर्शियल इमारतों और कोचिंग सेंटरों में सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है. बाराबंकी के दो घरों में अब सिर्फ मातम है और एक पिता के कानों में आज भी बेटे की आखिरी आवाज गूंज रही है. सवाल यही है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वाले इन सेंटरों पर कड़ी कार्रवाई कब होगी? और इन 16 मासूमों की मौत का जिम्मेदार कौन है?