Bijnor Illegal Gender Testing Case: गुरुग्राम स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उत्तर प्रदेश के बिजनौर में संचालित एक अवैध भ्रूण लिंग जांच गिरोह का खुलासा किया है. मिली सूचना के आधार पर बनाई गई विशेष टीम ने एक गर्भवती महिला को डिकॉय ग्राहक बनाकर पूरे नेटवर्क की पड़ताल की. जांच के दौरान सामने आया कि रेनू नाम की महिला 25 हजार से 40 हजार रुपये तक लेकर गर्भवती महिलाओं को बिजनौर पहुंचाती थी. वहां एक निजी मकान में पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन की मदद से भ्रूण का लिंग बताने का गैर-कानूनी काम किया जा रहा था.
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गुरुग्राम स्वास्थ्य विभाग ने उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में कथित तौर पर संचालित एक अवैध भ्रूण लिंग जांच गिरोह का पर्दाफाश किया है. एक पुलिस अधिकारी ने समाचार एजेंसी को बताया कि इस कार्रवाई में महत्वपूर्ण सफलता मिली है. स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी के अनुसार, मिली गुप्त सूचना के आधार पर टीम ने छापेमारी की, जिसके दौरान एक महिला बिचौलिये और गैर-कानूनी तरीके से अल्ट्रासाउंड करने वाले एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया.
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि गुरुग्राम और उसके आसपास के क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओं को भ्रूण का लिंग जानने के लिए उत्तर प्रदेश के बिजनौर ले जाया जाता था. अधिकारियों के मुताबिक, रेनू नाम की एक महिला इस पूरे नेटवर्क में बिचौलिये की भूमिका निभाती थी और इसके बदले 25 हजार से 40 हजार रुपये तक वसूलती थी. मामले की जानकारी मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने एक विशेष टीम का गठन किया और कार्रवाई के लिए एक गर्भवती महिला को डिकॉय ग्राहक बनाकर पूरे रैकेट तक पहुंचने की योजना तैयार की.
पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन से हो रही थी जांच
जांच के दौरान सामने आया कि बिचौलिया रेनू ने भ्रूण का लिंग बताने के लिए 25 हजार रुपये की मांग की थी. ऑनलाइन माध्यम से अग्रिम रकम मिलने के बाद डिकॉय ग्राहक को नई दिल्ली से बिजनौर ले जाया गया. वहां जांच टीम को पता चला कि एक निजी मकान में पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन लगाकर अवैध रूप से अल्ट्रासाउंड किया जा रहा था. इसी मशीन की मदद से भ्रूण का लिंग बताने का गैर-कानूनी काम संचालित किया जा रहा था.
कार्रवाई में दो आरोपी गिरफ्तार
मामले की पुष्टि होने के बाद गुरुग्राम और बिजनौर स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने संबंधित स्थान पर छापेमारी की. कार्रवाई के दौरान बिचौलिया रेनू और अल्ट्रासाउंड ऑपरेटर मनोज कुमार को मौके से गिरफ्तार कर लिया गया. जांच में यह भी सामने आया कि मनोज कुमार के पास अल्ट्रासाउंड करने के लिए आवश्यक कानूनी योग्यता और अधिकृत अनुमति नहीं थी. इसके बाद स्थानीय पुलिस को सूचना देकर मौके पर बुलाया गया और दोनों आरोपियों को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए पुलिस के हवाले कर दिया गया है.
(आज तक के इनपुट से)
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