उत्तर प्रदेश के बरेली से एक अनोखा मामला सामने आया है. स्कूल छूटने के करीब 7 साल बाद जब बचपन के दो दोस्त मैजवीन और विशाल दोबारा मिले तो दोनों को पहली ही नजर में एक-दूसरे से प्यार हो गया. अलग-अलग धर्म से होने के बावजूद दोनों का प्यार परवान चढ़ता रहा. आखिरकार मैजवीन ने इस्लाम धर्म को छोड़कर हमेशा के लिए सनातन धर्म अपनाने का फैसला करते हुए एक मुस्लिम युवती ने अपने बचपन के हिंदू दोस्त के साथ मंदिर पहुंचकर वैदिक रीति-रिवाज से प्रेम विवाह कर लिया. धर्म परिवर्तन के बाद युवती ने अपना नाम मैजवीन से बदलकर लक्ष्मी रख लिया है.
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विशाल के लिए मैजवीन बन गई लक्ष्मी
यह दिलचस्प प्रेम कहानी बरेली के शीशगढ़ थाना क्षेत्र की है. जाफरपुर गांव की रहने वाली 22 वर्षीय मैजवीन और पड़ोसी गांव बल्ली के रहने वाले 24 साल के विशाल एक-दूसरे को बचपन से जानते थे. दोनों ने आठवीं कक्षा तक एक ही स्कूल में साथ पढ़ाई की थी. स्कूल बदलने के बाद दोनों का संपर्क कुछ सालों के लिए टूट गया था. लेकिन लगभग 7 साल बाद जब दोनों दोबारा मिले तो विशाल ने अपने प्यार का इजहार किया. देखते ही देखते बचपन की यह दोस्ती गहरी मोहब्बत में बदल गई और करीब 4 साल तक चले प्रेम संबंध के बाद दोनों ने हमेशा के लिए एक होने का फैसला कर लिया.
जब आड़े आई मजहब की दीवार
शादी के बाद लक्ष्मी ने बताया कि अलग-अलग धर्मों से होने के कारण उनके इस रिश्ते को लेकर परिवारों में सहमति नहीं बन पा रही थी. विशाल के परिजन तो समय के साथ इस शादी के लिए तैयार हो गए थे. लेकिन मैजवीन के परिवार वाले इस रिश्ते के सख्त खिलाफ थे. परिवार के भारी विरोध को देखते हुए दोनों ने अपनी मर्जी से कदम आगे बढ़ाने का फैसला किया. युवती ने साफ किया कि उसने अपनी स्वेच्छा और आस्था के आधार पर सनातन धर्म अपनाने का निर्णय लिया और इसके लिए बकायदा निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रिया का पूरी तरह पालन भी किया.
अगस्त्य मुनि आश्रम में हुए सात फेरे
विशाल और लक्ष्मी बरेली के प्रसिद्ध अगस्त्य मुनि आश्रम पहुंचे जहां वैदिक विधि-विधान के साथ दोनों का विवाह संपन्न कराया गया. विवाह के दौरान विशाल ने लक्ष्मी को वरमाला पहनाई, मांग में सिंदूर भरा, मंगलसूत्र पहनाया और अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे लिए.
आश्रम के संचालक पंडित केके शंखधार ने बताया कि धर्म परिवर्तन से संबंधित कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद आश्रम में पहले युवती का शुद्धिकरण संस्कार कराया गया, जिसके पश्चात पूर्ण वैदिक रीति से दोनों का विवाह संपन्न कराया गया है. शादी के बाद मीडिया के सामने आई लक्ष्मी ने अपने बयान में साफ तौर पर कहा कि उन पर किसी भी तरह का कोई दबाव नहीं है. उन्होंने कहा कि ' मेरे पिता का नाम जमीर अहमद और मां का नाम शाहजहां है. मैं अपनी पूरी मर्जी से यह शादी कर रही हूं और इसके लिए किसी पर कोई आरोप नहीं है. स्कूल में आठवीं तक हम साथ पढ़े थे. फिर जब मैं 20 साल की हुई तो हमारी दोबारा मुलाकात हुई. विशाल ने मुझसे प्यार का इजहार किया और मैंने भी हां कह दिया. अब मैंने अपनी मर्जी से सनातन धर्म में घर वापसी की है और अपना नया नाम लक्ष्मी रख लिया है.'
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