Water Wastage Bareilly: बरेली जिले में लगातार नीचे जा रहे भू-जल स्तर के बीच वाहन धुलाई केंद्र (वाशिंग सेंटर) जल संरक्षण के लिए बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं. शहर और ग्रामीण इलाकों में संचालित सैकड़ों वाशिंग सेंटरों पर प्रतिदिन लाखों लीटर शुद्ध पेयजल वाहनों की सफाई में खर्च किया जा रहा है. चिंताजनक बात यह है कि जिलाधिकारी के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद अवैध रूप से संचालित केंद्रों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी है.
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जानकारी के अनुसार जिले में लगभग 500 से अधिक वाशिंग सेंटर संचालित हैं. इनमें से कई केंद्र बिना आवश्यक अनुमति और पंजीकरण के चल रहे हैं. इन स्थानों पर भूमिगत जल का अंधाधुंध दोहन किया जा रहा है, जबकि उपयोग के बाद पानी सीधे नालियों में बहा दिया जाता है. इससे जल संरक्षण की सरकारी योजनाओं और प्रयासों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है.
हाल ही में आयोजित एक समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने गिरते भू-जल स्तर पर गंभीर चिंता व्यक्त की थी. उन्होंने नगर निगम सहित संबंधित विभागों को सभी वाशिंग सेंटरों के पंजीकरण की जांच करने और नियमों का उल्लंघन करने वाले केंद्रों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे. हालांकि निर्देश जारी होने के बाद भी जमीनी स्तर पर स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा है.
जल विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भूमिगत जल का दोहन इसी गति से जारी रहा तो आने वाले वर्षों में जिले को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है. एक ओर सरकार रेन वाटर हार्वेस्टिंग और जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न अभियान चला रही है, वहीं दूसरी ओर अवैध बोरिंग और अनियंत्रित वाशिंग सेंटर इन प्रयासों को कमजोर कर रहे हैं. स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि अवैध वाशिंग सेंटरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए तथा जल संरक्षण संबंधी नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराया जाए, ताकि भविष्य में जल संकट की स्थिति से बचा जा सके.
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