सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद भी नगर में सड़कों पर कुत्तों और छतों पर बंदरों का आतंक बरकरार

Bareilly Stray Dogs Issue: बरेली में आवारा कुत्तों और बंदरों का आतंक बढ़ता जा रहा है, करोड़ों खर्च के बावजूद हालात जस के तस; लोगों में दहशत, प्रशासनिक दावों पर उठ रहे सवाल.

यूपी तक

20 Mar 2026 (अपडेटेड: 20 Mar 2026, 04:13 PM)

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Bareilly Stray Dogs Issue: बरेली शहर में आवारा कुत्तों और बंदरों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। नगर निगम द्वारा बीते वर्ष इनकी रोकथाम और पकड़ने के नाम पर करीब 1.90 करोड़ रुपये खर्च किए जाने के बावजूद जमीनी हालात में कोई खास सुधार नजर नहीं आ रहा है। हालात यह हैं कि अदालत के निर्देशों के बाद भी सड़कों, अस्पतालों और सरकारी दफ्तरों के आसपास आवारा पशु खुलेआम घूम रहे हैं।

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जनता में दहशत, बदलने पड़े रास्ते

शहर के कई इलाकों में कुत्तों के झुंड लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन चुके हैं। मॉर्निंग वॉक पर निकलने वाले बुजुर्ग अब अपने रास्ते बदलने को मजबूर हैं। सिविल लाइंस निवासी एसपी शर्मा के अनुसार कुत्तों के डर से उन्हें गांधी उद्यान जाने का रास्ता बदलना पड़ा।

वहीं स्कूल जाने वाले बच्चों और उनके अभिभावकों में भी लगातार भय बना हुआ है। बिहारीपुर, कुंवरपुर और मलूकपुर जैसे इलाकों में स्थिति अधिक गंभीर बताई जा रही है, जहां आए दिन कुत्तों के झुंड देखे जाते हैं।

जहां सड़कों पर कुत्तों का आतंक है, वहीं शहर की छतों पर बंदरों ने डेरा जमा लिया है। जीजीआईसी की छात्राओं ने बताया कि बंदरों के झुंड उन्हें देखकर डराते हैं, जिससे उन्हें रास्ता बदलकर निकलना पड़ता है। कई मोहल्लों में लोग छत पर जाने से भी कतराने लगे हैं।

रात में और बढ़ जाता है खतरा

रात के समय हालात और ज्यादा खतरनाक हो जाते हैं। जसौली, मलूकपुर और बिहारीपुर ढाल जैसे इलाकों में रात 10 बजे के बाद बाइक सवारों का कुत्तों के झुंड पीछा करने लगते हैं। पैदल चलने वालों के लिए इन रास्तों पर निकलना जोखिम भरा साबित हो रहा है।

आवारा कुत्तों के हमलों के चलते अस्पतालों में एंटी-रेबीज वैक्सीन  लगवाने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीजों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं।

प्रशासनिक दावों पर उठ रहे सवाल

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद शहर में आवारा पशुओं की समस्या जस की तस बनी हुई है। नगर निगम द्वारा खर्च किए गए करोड़ों रुपये के बावजूद सुभाषनगर, सिकलापुर और राजेंद्र नगर जैसे क्षेत्रों के लोग आज भी खौफ के साये में जीने को मजबूर हैं।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर निगम के दावे केवल कागजों तक सीमित हैं, जबकि जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही।

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