बाराबंकी के हैदरगढ़ विधानसभा सीट पर पिछले कई चुनावों से भाजपा का एकछत्र राज बना हुआ है. भाजपा की इस निरंतर जीत के पीछे केवल चेहरा ही नहीं, बल्कि सक्रियता और जातिगत संतुलन को भी बड़ी वजह माना जाता है. वर्तमान विधायक दिनेश सिंह रावत का दावा है कि उन्होंने जनता से किए सभी वादों को समय रहते पूरा किया है, जिससे क्षेत्र में सत्ता विरोधी लहर का प्रभाव नगण्य है.
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इस सीट की पहचान पूर्व मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह और पूर्व मंत्री अरविंद सिंह गोप जैसे नेताओं की लोकप्रियता से जुड़ी है. क्षेत्र में सड़क निर्माण और बुनियादी ढांचे के विकास कार्यों ने भाजपा के प्रति जनता के भरोसे को और पुख्ता किया है. वहीं, समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक राममन रावत स्थानीय स्तर पर अपनी सक्रियता बढ़ाते हुए यह संदेश दे रहे हैं कि पिछली बार की कमियों को इस बार नई रणनीति और युवा वर्ग के लिए शिक्षा-रोजगार के एजेंडे से दूर किया जाएगा.
पासी वोट बैंक- जीत की असली चाबी!
हैदरगढ़ का चुनावी गणित पूरी तरह से जातिगत आंकड़ों के इर्द-गिर्द घूमता है:
निर्णायक भूमिका: इस क्षेत्र में लगभग 90,000 पासी मतदाता हैं, जो हार-जीत का फैसला तय करते हैं. यही कारण है कि भाजपा हमेशा यहां से पासी उम्मीदवार पर ही दांव लगाती है.
अन्य समीकरण: पासी मतदाताओं के अलावा यहां कुर्मी, यादव, ब्राह्मण और क्षत्रिय वोटर्स की भी अच्छी तादाद है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि सपा पासी वोटों के बड़े हिस्से में सेंधमारी करने में सफल रहती है, तो भाजपा के लिए इस गढ़ को बचाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है.
सक्रियता ही भाजपा की सबसे बड़ी ताकत
स्थानीय पत्रकारों और राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, हैदरगढ़ में विपक्ष की सबसे बड़ी कमजोरी चुनाव के बाद उनकी निष्क्रियता रही है. इसके विपरीत, भाजपा संगठन के स्तर पर पूरे पांच साल सक्रिय रहती है. मुकाबला एक बार फिर भाजपा और सपा के बीच सीधा नजर आ रहा है, जहाँ बसपा और अन्य दल फिलहाल हाशिए पर दिख रहे हैं.
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