बलिया उभांव कांड: आरोपी इंस्पेक्टर को जमानत, पीड़िता बोली- अब जान का खतरा, योगी और हाईकोर्ट से न्याय की उम्मीद

Ballia Crime News: बलिया के चर्चित उभांव कांड में आरोपी इंस्पेक्टर को जमानत मिलने पर पीड़िता ने निराशा जताई है. कॉल रिकॉर्डिंग और गंभीर आरोपों के बीच अब पीड़िता ने सीएम योगी और हाईकोर्ट से न्याय की गुहार लगाई है.

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Newzo

• 01:52 PM • 06 May 2026

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Ballia Crime News: उत्तर प्रदेश के बलिया में पुलिस महकमे को शर्मसार करने वाले उभांव कांड में नया मोड़ आ गया है. मामले के मुख्य आरोपी तत्कालीन निलंबित क्राइम इंस्पेक्टर नरेश मलिक को कोर्ट से जमानत मिल गई है. इस फैसले से आहत पीड़िता ने न्याय प्रणाली पर निराशा जताते हुए अपनी जान को खतरा बताया है. पीड़िता का कहना है कि अब उन्हें केवल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उच्च न्यायालय से ही न्याय की उम्मीद बची है.

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क्या है पूरा मामला?

बता दें कि उभांव थाने में तैनात तत्कालीन क्राइम इंस्पेक्टर नरेश मलिक पर आरोप है कि उन्होंने एक मामले में चार्जशीट दाखिल करने के बदले पीड़िता पर हमबिस्तर होने का अनैतिक दबाव बनाया था. इस बातचीत की कॉल रिकॉर्डिंग वायरल होने के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया था, जिसके बाद आरोपी इंस्पेक्टर को निलंबित कर गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था.

पीड़िता ने लगाए गंभीर आरोप

जमानत मिलने के बाद पीड़िता ने मीडिया के सामने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि पुख्ता सबूत होने के बावजूद आरोपी को राहत मिल गई है जिससे वह असुरक्षित महसूस कर रही हैं. पीड़िता ने जांच अधिकारी सीओ रसड़ा, एसओ उभांव और कोतवाली बलिया के पूर्व कोतवाल पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका दावा है कि मुकदमा दर्ज कराने के बाद से ही उन पर दबाव बनाया जा रहा था और धमकाने वाले सभी लोगों की कॉल रिकॉर्डिंग उनके पास सुरक्षित है.

अधिवक्ता का पक्ष और निष्पक्ष जांच पर सवाल

पीड़िता के अधिवक्ता गोरख नाथ वर्मा ने बताया कि ऐसी धाराओं में सेशन कोर्ट से जमानत मिलने का प्रावधान है. हालांकि, उन्होंने जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस मामले में आरोपी और जांचकर्ता दोनों ही पुलिस पक्ष से हैं, ऐसे में निष्पक्ष जांच की उम्मीद कम ही नजर आ रही है.

आगे की तैयारी

पीड़िता अब आरोपी की जमानत को खारिज कराने के लिए उच्च न्यायालय जाने और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात करने की तैयारी कर रही हैं. उनका आरोप है कि थानाध्यक्ष का नाम निकालने के लिए उन्हें लगातार धमकाया गया, जिसकी शिकायत वह उच्च स्तर पर करेंगी.