राम मंदिर चढ़ावा विवाद में घिरे चंपत राय, SIT रिपोर्ट के बाद इस्तीफे की खबर वायरल

Ayodhya Ram Mandir Donation Controversy: अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी और SIT रिपोर्ट के बाद ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के इस्तीफे की खबर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है.

यूपी तक

• 02:56 PM • 25 Jun 2026

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Ayodhya Ram Mandir Donation Controversy: अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी और लूट के आरोपों को लेकर पिछले कई दिनों से सियासी और सामाजिक हलकों में हलचल तेज है. इस पूरे विवाद ने जहां एक ओर मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, वहीं दूसरी ओर अब राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के कथित इस्तीफे की खबर ने नया मोड़ दे दिया है. सोशल मीडिया पर यह दावा तेजी से वायरल हो रहा है कि चंपत राय ने अपना इस्तीफा विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री बजरंग लाल बांगड़ा को भेज दिया है. हालांकि, इस खबर की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है. इसी बीच SIT की रिपोर्ट, स्थानीय प्रशासन की सक्रियता, ट्रस्ट के भीतर की भूमिका और चंपत राय से जुड़ी वायरल तस्वीरों ने पूरे मामले को और ज्यादा संवेदनशील बना दिया है.

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चढ़ावा विवाद से शुरू हुई हलचल, SIT रिपोर्ट के बाद बढ़े सवाल

राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर विपक्ष लगातार आरोप लगा रहा है कि मंदिर में आए दान और चढ़ावे में बड़ी गड़बड़ी हुई है. विरोधी दलों और कुछ सामाजिक समूहों की ओर से यहां तक कहा गया कि चढ़ावे के नाम पर “लूट” और “डाका” डाला गया. इन आरोपों के बाद पूरे मामले की जांच के लिए SIT सक्रिय हुई और उसने अपनी प्राथमिक रिपोर्ट भी सौंप दी.

लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि रिपोर्ट सौंपे जाने के दो दिन बाद तक भी कोई एफआईआर दर्ज क्यों नहीं हुई. यही वजह है कि अब पुलिस कार्रवाई और प्रशासनिक चुप्पी को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं. लोगों का कहना है कि अगर SIT ने रिपोर्ट दे दी है, तो फिर अगला कदम अब तक क्यों नहीं उठाया गया.

सोशल मीडिया पर वायरल हुई चंपत राय के इस्तीफे की खबर

इन सबके बीच सोशल मीडिया पर एक और बड़ी चर्चा ने जोर पकड़ लिया. दावा किया जाने लगा कि राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. वायरल दावों में यह भी कहा गया कि उनका इस्तीफा विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री बजरंग लाल बांगड़ा को भेजा गया है.

इस खबर के साथ राम मंदिर ट्रस्ट के एक अन्य महत्वपूर्ण नाम अनिल मिश्रा का भी जिक्र किया जाने लगा. सोशल मीडिया पर लोग इस खबर को शेयर करने लगे, कमेंट करने लगे और तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं. हालांकि, सबसे बड़ा सवाल यही बना रहा कि क्या वाकई चंपत राय ने इस्तीफा दिया है या यह सिर्फ अफवाह है.

पड़ताल में क्या सामने आया? 

जब इस वायरल खबर की पड़ताल की गई तो ट्रस्ट से जुड़े एक अन्य महत्वपूर्ण चेहरे गोपाल राव से संपर्क किया गया. राम मंदिर ट्रस्ट में चंपत राय, गोपाल राव और अनिल मिश्रा तीन ऐसे नाम माने जाते हैं जिनकी भूमिका सबसे अहम रही है और जिनका नाम इस पूरे विवाद में बार-बार सामने आ रहा है.

हमारे सहयोगी द्वारा गोपाल राव से फोन पर बात की गई, लेकिन उन्होंने इस मुद्दे पर साफ-साफ कुछ भी कहने से इनकार कर दिया. उन्होंने न तो चंपत राय के इस्तीफे की खबर का खुलकर खंडन किया और न ही उसकी पुष्टि की. उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है.

गोपाल राव का यह जवाब कई नए सवाल खड़े करता है. क्योंकि अगर इस्तीफे की खबर पूरी तरह गलत होती, तो उसका साफ खंडन किया जा सकता था. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. यही वजह है कि अब चर्चाएं और तेज हो गई हैं.

SIT रिपोर्ट में संदिग्ध बताई गई भूमिका?

हालांकि इस्तीफे की खबर अभी आधिकारिक तौर पर पुष्ट नहीं हुई है, लेकिन अंदरूनी सूत्रों के हवाले से यह चर्चा जरूर तेज है कि SIT की रिपोर्ट में चंपत राय की भूमिका को संदिग्ध माना गया है. कहा जा रहा है कि रिपोर्ट के आधार पर आगे कोई बड़ा प्रशासनिक या संस्थागत एक्शन हो सकता है.

यही वजह है कि चंपत राय को लेकर अटकलें लगातार बढ़ रही हैं. हालांकि अभी तक ट्रस्ट या विश्व हिंदू परिषद की ओर से कोई औपचारिक बयान सामने नहीं आया है, जिससे स्थिति और ज्यादा उलझी हुई दिखाई दे रही है.

PMO तक पहुंचा मामला

चंपत राय को लेकर एक और अहम जानकारी सामने आई है. बताया जा रहा है कि भाजपा के स्थानीय नेता रजनीश सिंह ने इस पूरे मामले को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को पत्र लिखा था. यह चिट्ठी 12 जून के आसपास लिखी गई बताई जा रही है.

दरअसल, 7 जून को अखिलेश यादव की एक पोस्ट के बाद यह पूरा विवाद तेजी से सुर्खियों में आया था. उसके बाद अगले ही दिन से यह मामला लगातार बढ़ता चला गया. इसी क्रम में भाजपा नेता रजनीश सिंह ने PMO को पत्र भेजकर ट्रस्ट की जांच की मांग की और यह जानने की बात कही कि मंदिर ट्रस्ट में पैसा किस तरह आ रहा है और उसका प्रबंधन कैसे हो रहा है.

स्थानीय प्रसनशा ने मांगी जानकारी

सूत्रों के अनुसार, PMO की ओर से स्थानीय प्रशासन को इस मामले में जानकारी जुटाने के लिए कहा गया. इसके बाद जब स्थानीय प्रशासन ने ट्रस्ट से संपर्क साधा, तो चंपत राय ने कथित तौर पर किसी भी तरह की जानकारी देने से इनकार कर दिया.

बताया गया कि उन्होंने यह कहकर जानकारी साझा करने से मना किया कि अब इस पूरे मामले की जांच SIT के पास है, इसलिए वह कुछ भी नहीं बता सकते. इस घटनाक्रम के बाद चंपत राय की भूमिका और अधिक चर्चा में आ गई है.

वायरल तस्वीरें भी बनीं विवाद का हिस्सा

चंपत राय को लेकर सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें भी तेजी से वायरल हो रही हैं. एक तस्वीर में दावा किया जा रहा है कि एक महिला ने उन्हें चांदी का “कागभुसुंडी” दान में दिया. वहीं दूसरी तस्वीर के साथ यह दावा वायरल है कि सिंधी समाज की ओर से 200 किलो चांदी की ईंटें दान में दी गईं.

हालांकि इन तस्वीरों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है, लेकिन विवाद के माहौल में इन तस्वीरों ने चर्चाओं को और हवा दे दी है. लोग सवाल उठा रहे हैं कि चढ़ावे, दान और ट्रस्ट प्रबंधन से जुड़े मामलों में आखिर पारदर्शिता कितनी है.

पहले भी उठते रहे हैं सवाल

चंपत राय की ईमानदारी और भूमिका को लेकर संघ और भाजपा के कई नेताओं की ओर से समय-समय पर भरोसा जताया गया है. लेकिन दूसरी ओर उन पर सवाल भी लगातार उठते रहे हैं. विनय कटियार, कमल नयन दास और राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे कुछ अन्य चेहरों की ओर से भी समय-समय पर चंपत राय की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए गए.

संतोष दुबे जैसे कुछ कार्यकर्ताओं ने भी पहले से उन पर हमलावर रुख अपनाया हुआ है. ऐसे में अब जब SIT रिपोर्ट, वायरल इस्तीफे की चर्चा और प्रशासनिक जांच एक साथ सामने आ रही हैं, तो चंपत राय एक बार फिर पूरे विवाद के केंद्र में आ गए हैं.

अब सबसे बड़ा सवाल: क्या सचमुच इस्तीफा हुआ है?

फिलहाल पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या चंपत राय ने वास्तव में इस्तीफा दिया है? अभी तक न तो ट्रस्ट की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि हुई है और न ही विश्व हिंदू परिषद की ओर से कोई स्पष्ट बयान सामने आया है.

गोपाल राव का “मुझे जानकारी नहीं” वाला जवाब भी स्थिति को साफ करने के बजाय और अधिक उलझा रहा है. दूसरी ओर SIT रिपोर्ट और चंपत राय की कथित भूमिका को लेकर चल रही चर्चाएं इस संभावना को भी हवा दे रही हैं कि आने वाले दिनों में इस मामले में कोई बड़ा फैसला सामने आ सकता है.