लखनऊ अग्निकांड में मारे गए दो दोस्तों की उठी अर्थी! मां रोकर चिल्लाई-नहीं जाएगा मेरा बेटा!

Lucknow Fire Incident: लखनऊ में हुए भीषण अग्निकांड ने कानपुर के दो युवकों संयम विज और सूरज सिंह की जान ले ली, जिससे दोनों परिवारों में कोहराम मच गया. हादसे में दम घुटने से मौत की पुष्टि हुई है और कुल 15 लोगों की जान गई.

यूपी तक

• 10:29 AM • 25 Jun 2026

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Lucknow Fire Incident: लखनऊ में हुए भीषण अग्निकांड ने सिर्फ 15 जिंदगियां ही नहीं छीनीं, बल्कि कई परिवारों की पूरी दुनिया उजाड़ दी. इस हादसे की सबसे दर्दनाक तस्वीर कानपुर के उन दो घरों में दिखाई दी, जहां मंगलवार को 28 वर्षीय संयम विज और 25 वर्षीय सूरज सिंह के पार्थिव शरीर पहुंचे तो मातम, चीखें और टूटे हुए सपनों के अलावा कुछ नहीं बचा था. जिन बेटों के सहारे मां-बाप अपने आने वाले कल की उम्मीदें बांधे बैठे थे, वही बेटे अब सिर्फ यादों में रह गए हैं. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी यह पुष्टि हुई कि हादसे के दौरान दोनों युवक बिल्डिंग के अंदर फंस गए थे और दम घुटने से उनकी मौत हुई. इस अग्निकांड ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर ऐसी लापरवाही की कीमत हमेशा आम परिवारों को ही क्यों चुकानी पड़ती है.

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पिता के बाद घर की पूरी जिम्मेदारी उठाने वाला बेटा भी चला गया

कानपुर के बर्रा निवासी 25 वर्षीय सूरज सिंह की मौत ने उनके परिवार की जिंदगी पूरी तरह बदल दी. मंगलवार सुबह जैसे ही उनका शव घर पहुंचा, पूरे मोहल्ले में मातम छा गया. मां मीरा सिंह बार-बार बेटे को आखिरी बार देखने की कोशिश करती रहीं और उनका दर्द देख हर किसी की आंखें नम हो गईं. परिवार के मुताबिक, तीन साल पहले आग से जुड़े एक हादसे में सूरज के पिता की मौत हो गई थी. इसके बाद सूरज ही घर का सबसे बड़ा सहारा बन गया था. उसने छोटे भाई की पढ़ाई, बहन के भविष्य और पूरे परिवार की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठा ली थी. लेकिन लखनऊ की इस आग ने परिवार से उसका आखिरी सहारा भी छीन लिया. छोटा भाई सम्राट, जो ऋषिकेश में था, जैसे ही बड़े भाई की मौत की खबर सुनकर लौटा और भैरव घाट पर नम आंखों से मुखाग्नि दी, वहां मौजूद हर शख्स भावुक हो उठा. परिवार का कहना है कि हादसे वाली रात सूरज घर आने वाला था, लेकिन ऑफिस में आग लगने के कारण वह वहीं फंस गया. परिवार ने साफ तौर पर इस हादसे में लापरवाही की बात कही और सवाल उठाया कि ऐसी घटना आखिर कैसे हो गई.

दादी की 13वीं से पहले घर लौटना था, लेकिन पहुंची मौत की खबर

गोविंद नगर निवासी 28 वर्षीय संयम विज के घर का माहौल भी दिल दहला देने वाला था. बेटे का शव सामने देखते ही मां सोनिया खुद को संभाल नहीं पाईं. वह बार-बार बेटे को पुकारती रहीं और यही कहती रहीं कि अब उनके बुढ़ापे का सहारा कौन बनेगा. परिवार वालों के अनुसार, संयम सिर्फ बेटा नहीं था, बल्कि घर की हर जिम्मेदारी उठाने वाला सबसे मजबूत सहारा था. मां की छोटी-छोटी जरूरतों का ध्यान रखने वाला संयम अब हमेशा के लिए चला गया. इस परिवार का दर्द इसलिए भी और गहरा है क्योंकि कुछ ही दिन पहले घर में दादी का निधन हुआ था और 13वीं की तैयारियां चल रही थीं. परिवार को उम्मीद थी कि संयम घर लौटेगा और इस दुख की घड़ी में सबका सहारा बनेगा, लेकिन उसकी जगह घर पहुंची उसकी मौत की खबर. यानी एक ही घर पर कुछ ही दिनों के भीतर दूसरा बड़ा दुख टूट पड़ा. परिवार के मुताबिक, संयम पर घर की पूरी जिम्मेदारी थी, वह अपने भाई-बहनों के भविष्य की चिंता करता था और घर का मजबूत स्तंभ था.

धुएं में घुट गई सांसें, पीछे छूट गए अधूरे सपने

बताया गया कि हादसे के दौरान दोनों युवक बिल्डिंग के अंदर फंस गए थे और घना धुआं उनकी मौत की वजह बना. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी दम घुटने की पुष्टि हुई है. इस अग्निकांड में कुल 15 लोगों की जान गई, लेकिन इन आंकड़ों के पीछे छिपे परिवारों के दर्द को माप पाना शायद कभी संभव नहीं होगा. एक घर में बेटे की शादी के सपने सज रहे थे, तो दूसरे घर में मां अपने बुढ़ापे का सहारा देखकर जी रही थी. लेकिन लखनऊ की इस आग ने पलक झपकते ही सब कुछ बदल दिया. अब इन घरों में पहले जैसी रौनक नहीं लौटेगी, न वह हंसी सुनाई देगी जिसका इंतजार परिवार करता था. पीछे रह जाएंगी सिर्फ यादें, कुछ अधूरे सपने और अपनों को पुकारती आंखें. यह हादसा सिर्फ दो युवकों की मौत की कहानी नहीं, बल्कि उन परिवारों की टूटन की दास्तान है जिनका सब कुछ एक ही पल में खत्म हो गया.