Ram Mandir Donation Case: अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच के बीच एक नया घटनाक्रम सामने आया है, जिसने पूरे विवाद को फिर से सुर्खियों में ला दिया है. स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय द्वारा दिए गए कथित गोपनीय लिखित बयान का एक हिस्सा लीक होने का दावा किया जा रहा है. सामने आए कथित बयान में चंपत राय ने दानपात्रों से निकली नकदी की गिनती, बैंक में जमा कराने की व्यवस्था, सुरक्षा प्रक्रिया और बैंक के साथ हुए एमओयू (समझौता ज्ञापन) से खुद को अलग बताया है. इसके बाद ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्य अनिल मिश्रा की भूमिका को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं. अब सभी की नजर एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट और आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई है.
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दानपात्रों की गिनती से खुद को बताया अलग
लीक हुए कथित बयान के अनुसार चंपत राय ने एसआईटी को बताया कि दानपात्रों से निकली रकम की गिनती, उसकी सुरक्षा, बैंक तक पहुंचाने की व्यवस्था और बैंक के साथ हुए एमओयू से उनका कोई संबंध नहीं था. उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित एमओयू पर उनके हस्ताक्षर नहीं हैं. बयान में यह भी उल्लेख किया गया है कि नोटों की गिनती की प्रक्रिया में समय-समय पर क्या बदलाव हुए, सुरक्षा व्यवस्था में क्या परिवर्तन किए गए और बैंक अधिकारियों के साथ किस स्तर पर निर्णय लिए गए, इसकी जानकारी उन्हें नहीं थी और वे पूरी प्रक्रिया का हिस्सा भी नहीं थे. इसी वजह से इस कथित बयान को जांच में एक अहम मोड़ माना जा रहा है.
अनिल मिश्रा की भूमिका पर बढ़ी चर्चा
चंपत राय ने जिस एमओयू का उल्लेख किया है, उसके हस्ताक्षरकर्ता के रूप में अनिल मिश्रा का नाम सामने आने की बात कही जा रही है. इसके बाद यह माना जा रहा है कि चंपत राय ने जांच एजेंसी के सामने अपनी भूमिका सीमित बताते हुए प्रशासनिक जिम्मेदारियों से दूरी बनाई है. सूत्रों के अनुसार, एसआईटी की प्रारंभिक जांच में भी अनिल मिश्रा की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं. बताया जा रहा है कि उन्हें नोटिस भेजा जा चुका है और जल्द उनसे पूछताछ की जा सकती है. दूसरी ओर, अयोध्या पुलिस भी गिरफ्तार आरोपियों से लगातार पूछताछ कर रही है ताकि पूरे मामले की जिम्मेदारियों और नेटवर्क का पता लगाया जा सके.
खुला पत्र जारी कर चंपत राय ने रखा अपना पक्ष
कथित गोपनीय बयान सामने आने से कुछ घंटे पहले ही चंपत राय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर रामभक्तों के नाम एक खुला पत्र जारी किया था. उन्होंने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को निराधार बताते हुए लिखा कि वे पिछले 41 वर्षों से प्रचारक जीवन में हैं और वर्ष 1991 से राम मंदिर आंदोलन से जुड़े हुए हैं. उन्होंने कहा कि उचित समय आने पर सभी आरोपों का क्रमवार और तथ्यात्मक जवाब देंगे. उनके इस सार्वजनिक पत्र और उसके बाद सामने आए कथित बयान ने अयोध्या में शांत पड़ते विवाद को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है. माना जा रहा है कि इससे ट्रस्ट के भीतर भी मतभेद खुलकर सामने आ सकते हैं.
ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष ने भी दी प्रतिक्रिया
इस पूरे मामले पर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद गिरी ने चंपत राय का बचाव किया है. उन्होंने कहा कि चंपत राय का सार्वजनिक जीवन निष्कलंक रहा है और राम मंदिर निर्माण में उनका योगदान असाधारण रहा है. उनके मुताबिक प्रशासनिक स्तर पर कुछ लापरवाही हो सकती है, लेकिन बिना जांच पूरी हुए उन्हें दोषी नहीं कहा जा सकता. उन्होंने यह भी बताया कि ट्रस्ट की बैठक में अधिकांश सदस्यों ने चंपत राय के कार्यों की सराहना की थी और उनके इस्तीफे को लेकर कोई सर्वसम्मति नहीं बन सकी.
वहीं, ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास की नाराजगी भी चर्चा में रही. बैठक से पहले वरिष्ठ पदाधिकारियों को उनसे मिलने छोटी छावनी जाना पड़ा, जिसके बाद वे बैठक में शामिल हुए. उन्होंने पहले ही एक पत्र जारी कर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भरोसा जताते हुए कहा था कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई जरूर होगी.
अंतिम रिपोर्ट पर टिकी सबकी नजर
निर्मोही अखाड़े के महंत और ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास ने भी मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि किसी के पास वित्तीय जिम्मेदारी थी तो उसे पूरी निगरानी रखनी चाहिए थी. उन्होंने कहा कि चोरी रामलला की संपत्ति की हुई है, इसलिए दोषी चाहे कोई भी हो, उसे दंड मिलना चाहिए. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि चंपत राय एक अच्छे व्यक्ति हैं, लेकिन जांच पूरी होने देना जरूरी है.
इस बीच ट्रस्ट ने चढ़ावे में मिले सभी आभूषणों और कीमती उपहारों का रिकॉर्ड भी सार्वजनिक कर दिया है, जिससे उपहारों से जुड़ी चर्चाएं काफी हद तक थम गई हैं. हालांकि नकद चढ़ावे और दानपात्रों से जुड़ी जांच अभी जारी है. अब पूरे मामले में सबसे ज्यादा नजर एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट पर है. यदि जांच में लीक हुए कथित बयान की बातें सही पाई जाती हैं तो ट्रस्ट के भीतर जिम्मेदारियों का पूरा समीकरण बदल सकता है. वहीं यदि जांच में अलग तथ्य सामने आते हैं तो इस पूरे विवाद की दिशा भी बदल सकती है. फिलहाल गोपनीय बयान के कथित तौर पर लीक होने के बाद अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा मामले की जांच एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का बड़ा विषय बन गई है.
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