रामनगरी अयोध्या इन दिनों एक नई राजनीतिक बहस के केंद्र में है. भारतीय जनता पार्टी की नवनियुक्त महानगर इकाई में शिवेंद्र सिंह को महामंत्री बनाए जाने के फैसले ने संगठन के भीतर और बाहर एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है. रविवार को घोषित 27 पदाधिकारियों की सूची में शिवेंद्र सिंह का नाम शामिल होते ही विरोधियों और सोशल मीडिया पर आरोपों की झड़ी लग गई है जिससे भाजपा नेतृत्व बैकफुट पर नजर आ रहा है.
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शिवेंद्र सिंह के खिलाफ गंभीर आरोपों की लंबी फेहरिस्त
थाना महाराजगंज के मड़ना गांव के रहने वाले शिवेंद्र सिंह की नियुक्ति के साथ ही उनके कथित आपराधिक इतिहास को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. सूत्रों और सोशल मीडिया पर वायरल दावों के मुताबिक, उनके खिलाफ हत्या के प्रयास, दंगा, जबरन वसूली, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश जैसे गंभीर मामले दर्ज होने की बात कही जा रही है. चर्चा यह भी है कि उनके खिलाफ पूर्व में गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई हो चुकी है. इंटरनेट पर उनके खिलाफ कथित तौर पर 18 मामलों की एक सूची भी वायरल हो रही है. इसके साथ ही छात्र राजनीति के दौरान जेल में जन्मदिन मनाने का एक पुराना वीडियो भी दोबारा चर्चा में है जिसे शिवेंद्र सिंह ने खुद का होना स्वीकार किया है.
शिवेंद्र सिंह ने कही ये बात
इन तमाम आरोपों पर पलटवार करते हुए शिवेंद्र सिंह ने इसे राजनीतिक द्वेष करार दिया है. उन्होंने सफाई दी कि उनके खिलाफ केवल 4-5 मामले दर्ज हुए थे जिनमें से अधिकांश छात्र राजनीति के दौरान के हैं. वर्तमान में केवल दो मामले ही लंबित हैं. गैंगस्टर एक्ट के मामले में उन्होंने दावा किया कि वह राजनीति से प्रेरित था और कोर्ट से उन्हें पहले ही बरी किया जा चुका है.
दिग्गजों से करीबी रिश्ते की चर्चा
शिवेंद्र सिंह को स्थानीय राजनीति में बेहद प्रभावशाली माना जाता है. उनके रसूख का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गोसाईगंज विधायक अभय सिंह और अयोध्या नगर विधायक वेद प्रकाश गुप्ता से उनके करीबी संबंध हैं. इतना ही नहीं उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और उद्योगपति अनिल अंबानी के साथ उनकी पुरानी तस्वीरों ने भी इस विवाद को और हवा दी है. भाजपा के अंदरखाने से मिल रही जानकारी के अनुसार, कई वरिष्ठ नेता इस नियुक्ति से खुश नहीं हैं. हाल ही में राम मंदिर दर्शन के दौरान शिवेंद्र सिंह का अन्य नवनियुक्त पदाधिकारियों के साथ नजर न आना भी कई सवाल खड़े कर रहा है.समर्थकों का मानना है कि उनकी पहुंच और जमीनी पकड़ पार्टी की ताकत है.जबकि विरोधी इसे पार्टी की छवि के खिलाफ बता रहे हैं. अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि यह सियासी तूफान आगे किस दिशा में जाएगा. आने वाले दिनों में क्या यह विवाद शांत होगा या अयोध्या की राजनीति में कोई बड़ा मोड़ लेकर आएगा.
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