प्रोफेसर और बड़े अधिकारी की लड़कियों से दोस्ती फिर धर्मांतरण...आगरा में एक्टिव कन्वर्जन नेटवर्क ऐसे कर रहा ब्रेनवॉश?

Agra Conversion Network Case: आगरा में सामने आए कथित कन्वर्जन नेटवर्क की जांच अब लगातार गहराती जा रही है. जांच एजेंसियों का दावा है कि यह मामला सिर्फ कुछ लोगों तक सीमित नहीं था, बल्कि ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों स्तर पर सक्रिय एक बड़े नेटवर्क की तरह काम कर रहा था.

Agra Conversion Network Case (AI Representational Photo)

आशीष श्रीवास्तव

• 02:06 PM • 15 May 2026

follow google news

Ground Report: आगरा में सामने आए कथित कन्वर्जन नेटवर्क की जांच अब लगातार गहराती जा रही है. जांच एजेंसियों का दावा है कि यह मामला सिर्फ कुछ लोगों तक सीमित नहीं था, बल्कि ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों स्तर पर सक्रिय एक बड़े नेटवर्क की तरह काम कर रहा था. इस पूरे मामले में युवाओं को सोशल मीडिया, ऑनलाइन ग्रुप्स और निजी संपर्कों के जरिए जोड़ने के आरोप लगे हैं. ग्राउंड पर पहुंचकर जब मैंनें हालात को समझने की कोशिश की गई तो कई चौंकाने वाले दावे और जानकारियां सामने आईं.

यह भी पढ़ें...

आगरा की कई गलियों और इलाकों में बातचीत के दौरान लोगों के बीच डर, गुस्सा और चिंता साफ दिखाई दी. जांच एजेंसियों के मुताबिक यह नेटवर्क बेहद सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था. दावा किया गया है कि प्रोफेसरों, आर्मी अधिकारियों और बड़े कारोबारी परिवारों की बेटियों को खास तौर पर निशाना बनाया जाता था. जिन परिवारों से बातचीत हुई, वहां सबसे बड़ा सवाल यही था कि आखिर उनके बच्चों तक यह नेटवर्क पहुंचा कैसे.

जांच के दौरान कुछ युवाओं और बच्चों के पास से ऐसी किताबें मिलने का दावा किया गया, जिनमें अपने ही परिवार और दोस्तों को रिवर्ट करने जैसी बातें लिखी थीं. एजेंसियों का कहना है कि इन किताबों के जरिए सोच और मानसिकता बदलने की कोशिश की जाती थी. जांच में यह बात भी सामने आई कि कुछ लोग पढ़ाने के बहाने घरों और युवाओं तक पहुंच बनाते थे. आरोप है कि धीरे-धीरे भरोसा जीतकर युवाओं को इस नेटवर्क से जोड़ा जाता था. आगरा के कई इलाकों में लोगों ने बताया कि पहले दोस्ती की जाती थी और फिर लगातार बातचीत के जरिए प्रभाव बनाने की कोशिश होती थी.

जब इस मामले पर डीसीपी आदित्य से बात की गई तो उन्होंने पूछताछ में सामने आए कई नामों और संगठनों का जिक्र किया. उन्होंने बताया कि जांच में तब्लीगी जमात, निजामुद्दीन मरकज और जमात-ए-इस्लामी जैसे संगठनों के नाम सामने आने का दावा किया गया है. जांच एजेंसियों के मुताबिक लॉकडाउन के दौरान कुछ सेंटर बंद जरूर हुए, लेकिन ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और दूसरे ठिकानों से गतिविधियां जारी रहीं. शाहीन बाग, ओखला और कई अन्य इलाकों के नाम भी जांच में सामने आए हैं.

रात के समय कमिश्नर दीपक कुमार से हुई बातचीत में भी कई अहम जानकारियां सामने आईं. उन्होंने बताया कि अब्दुल रहमान, डावर आदिल, तिलमिज उर रहमान, नासिर और सिलीगुड़ी से जुड़े कुछ लोगों के नाम जांच में आए हैं. आरोप है कि कई युवतियों को सिलीगुड़ी, असम, जम्मू-कश्मीर, बंगाल, जालंधर और उत्तर-पूर्व के अन्य इलाकों में ले जाया गया. कुछ मामलों में मस्जिदों में ठहराने, पहचान छिपाने और अलग-अलग आईडी इस्तेमाल करने के आरोप भी लगे हैं. अब एजेंसियां भूटान और बांग्लादेश कनेक्शन की भी जांच कर रही हैं.

ऑनलाइन ग्रुप्स से युवाओं तक पहुंच

जांच में सबसे अहम बात यह सामने आई कि यह नेटवर्क सिर्फ जमीन पर नहीं, बल्कि मोबाइल और इंटरनेट के जरिए भी तेजी से फैल रहा था. एजेंसियों के मुताबिक 'रिवर्ट्स ऑफ इंडिया' और 'कनेक्टिंग' जैसे ऑनलाइन ग्रुप्स के जरिए युवाओं से संपर्क किया जाता था.पहले सोशल मीडिया पर दोस्ती, फिर लगातार चैट और बातचीत, उसके बाद ऑनलाइन क्लास, वीडियो और धार्मिक कंटेंट के जरिए कथित तौर पर मानसिक रूप से प्रभावित करने की कोशिश होती थी. जांच में डॉक्टर इसरार और जाकिर नाइक के वीडियो और भाषण शेयर किए जाने की बात भी सामने आई है.

सूत्रों के मुताबिक लड़कियों और लड़कों के लिए अलग-अलग हैंडलर काम करते थे. ऑनलाइन निकाह, नौकरी, शादी और पैसों का लालच देकर संपर्क मजबूत किया जाता था. आर्थिक परेशानी झेल रहे युवाओं को कथित तौर पर आर्थिक मदद देकर नेटवर्क से जोड़ने के आरोप भी लगे हैं.

24 मार्च 2025 को एक युवती के लापता होने का मामला इस पूरी जांच का बड़ा मोड़ बना. परिवार की शिकायत के बाद कई राज्यों में सर्च ऑपरेशन चलाया गया. जांच एजेंसियों का दावा है कि जम्मू, हावड़ा और जालंधर समेत कई जगहों से अब तक 12 लड़कियों को रेस्क्यू किया गया है. पूछताछ में यह भी सामने आया कि बंगाल में कथित तौर पर कन्वर्जन सर्टिफिकेट तैयार किए जाते थे और दिल्ली में ठहरने की व्यवस्था की जाती थी. कई मामलों में युवतियों को अलग-अलग राज्यों में भेजने और ऑनलाइन निकाह कराने के आरोप भी लगे हैं.

फंडिंग और विदेशी कनेक्शन की जांच

इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल फंडिंग को लेकर उठ रहे हैं. जांच एजेंसियों के मुताबिक विदेशों, खासकर दुबई से आर्थिक मदद मिलने के इनपुट सामने आए हैं. सईद दाऊद और परवेज अख्तर जैसे नाम एजेंसियों के रडार पर बताए जा रहे हैं. जांच के दौरान QR कोड वाले पर्चे, धार्मिक किताबें और डिजिटल प्रचार सामग्री मिलने का दावा भी किया गया है. सूत्रों का कहना है कि 2020-21 में सरफराज जाफरी सिद्दीकी और कलीम सिद्दीकी से जुड़े नेटवर्क की जांच के दौरान कई संपर्क और मुलाकातें सामने आई थीं. यह दावा भी किया जा रहा है कि कलीम सिद्दीकी के जेल जाने के बाद नेटवर्क की जिम्मेदारी दूसरे लोगों को सौंप दी गई.

आगरा से लौटते समय सबसे बड़ा सवाल यही था कि क्या यह मामला सिर्फ कुछ लोगों तक सीमित है या इसके पीछे और भी बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है. फिलहाल NIA, महाराष्ट्र ATS और दूसरी एजेंसियों के इनपुट के आधार पर ऑनलाइन मॉड्यूल, सोशल मीडिया ग्रुप्स, फंडिंग चैनल और अलग-अलग राज्यों से जुड़े नेटवर्क की जांच जारी है.