जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) के मुखिया राजा भैया के करीबी एमएलसी अक्षय प्रताप सिंह की मुश्किलें बढ़ गई हैं. लखनऊ की हजरतगंज कोतवाली में धोखाधड़ी और जालसाजी के गंभीर आरोपों में मुकदमा दर्ज किया गया है. अक्षय प्रताप सिंह समेत चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. यह कार्रवाई एमपी-एमएलए कोर्ट के स्पेशल एसीजेएम के आदेश पर हुई है.
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इन लोगों पर दर्ज हुई एफआईआर
कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस ने जिन लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया है, उनमें शामिल हैं:
- अक्षय प्रताप सिंह (MLC)
- रोहित सिंह
- अनिल सिंह
- रामदेव यादव
मालूमहो कि बीती 7 मई को कोर्ट ने इन सभी के खिलाफ धोखाधड़ी के मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच करने के आदेश दिए थे.
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा विवाद एक कंपनी और उससे जुड़ी करोड़ों की संपत्तियों को हड़पने से जुड़ा है. राजा भैया की पत्नी भानवी सिंह ने इस मामले में लखनऊ कोर्ट में याचिका दायर की थी. याचिका के अनुसार, भानवी सिंह ने 10 फरवरी 2014 को एक साझेदारी फर्म बनाई थी. इस फर्म के नाम पर करीब 5 करोड़ रुपये की संपत्तियां दर्ज थीं. आरोप है कि अक्षय प्रताप सिंह और उनके सहयोगियों ने जालसाजी की. नवंबर 2020 में उन्होंने फर्म का पता बदलकर अक्षय प्रताप का निजी आवास दर्ज करा लिया. इसके बाद फर्म के नाम पर दर्ज करोड़ों की संपत्तियों को हड़पने के लिए दस्तावेजों में हेराफेरी की गई.
कोर्ट की लंबी प्रक्रिया के बाद हुई है ये कार्रवाई
फर्जी दस्तावेजों से फर्म हड़पने के इस मामले में भानवी सिंह ने लखनऊ एसीजेएम कोर्ट में अर्जी दाखिल की थी. एमपी-एमएलए कोर्ट ने पहले इस पर परिवाद चलाने के आदेश दिए थे. भानवी सिंह ने इस आदेश के खिलाफ निगरानी याचिका डाली थी कि मामले की सुनवाई कोर्ट की निगरानी में हो. दूसरी ओर, अक्षय प्रताप सिंह ने इस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन हाईकोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया और सेशन कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा. हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब हजरतगंज कोतवाली में एमएलसी अक्षय प्रताप सिंह समेत कुल 5 लोगों पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है.
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