Ayodhya Donation Case: राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मामले ने अब बड़ा सियासी रूप ले लिया है. मामले में पुलिस द्वारा मंदिर के चढ़ावे की गिनती से जुड़े कर्मचारी लवकुश मिश्रा को पकड़े जाने की खबर सामने आई है. इसी बीच लवकुश मिश्रा के पिता ने बेटे का बचाव करते हुए कई अहम बातें कही हैं. उन्होंने यह स्वीकार किया कि जांच टीम को उनके घर से करीब ₹1 लाख नकद मिले थे. इस पूरे मामले की जांच अब सरकार द्वारा गठित तीन सदस्यीय एसआईटी करेगी.
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घर से मिले पैसे पर पिता ने क्या कहा?
जानकारी के मुताबिक पुलिस ने सादे कपड़ों में लवकुश मिश्रा के घर पहुंचकर तलाशी ली. इस दौरान घर से करीब ₹1 लाख बरामद होने का दावा किया गया. जब लवकुश के पिता बच्चू लाल से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उनका बेटा कुछ महीनों से मंदिर में नौकरी कर रहा था और अब जो होना था, वह हो गया. उन्होंने माना कि घर से पैसे मिले हैं, लेकिन फैजाबाद में बन रहे निर्माणाधीन मकान से बेटे का कोई लेना-देना नहीं है. उनका कहना है कि मकान के निर्माण के लिए उन्होंने अपनी खेती की जमीन गिरवी रखी थी.
जांच एजेंसियों के रडार पर आए कर्मचारी
बताया जा रहा है कि लवकुश मिश्रा और एक अन्य कर्मचारी को संदेह के आधार पर हिरासत में लेकर पूछताछ की गई है. दोनों कर्मचारियों की जिम्मेदारी मंदिर में आने वाले चढ़ावे की गिनती और उससे जुड़े कार्यों की थी. दावा किया जा रहा है कि दोनों को हर महीने करीब 18 से 20 हजार रुपये वेतन मिलता था. इसके बावजूद हाल के महीनों में उनकी संपत्तियों में अचानक बढ़ोतरी देखी गई. जांच में यह भी सामने आया कि एक कर्मचारी ने करीब ₹1.5 करोड़ की जमीन खरीदी, जबकि दूसरे ने लगभग ₹40 लाख का प्लॉट लिया. इसके बाद जांच एजेंसियों का शक और गहरा गया.
परिवार ने आरोपों को बताया गलत
लवकुश की दादी ने भी परिवार की ओर से सफाई देते हुए कहा कि घर पर सादे कपड़ों में लोग पहुंचे थे और बाद में मामले की जानकारी हुई. परिवार का दावा है कि जो जमीन खरीदी गई है, उसका संबंध मंदिर के पैसों से नहीं है और बिना पूरी जांच के किसी को दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए.
अब एसआईटी करेगी पूरे मामले की जांच
मामले को लेकर राजनीतिक विवाद भी तेज हो गया है. समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा मुद्दा उठाए जाने के बाद यह प्रकरण चर्चा में आया था. इसके बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सरकार से निष्पक्ष जांच की मांग की. इसी के बाद योगी सरकार ने तीन सदस्यीय एसआईटी के गठन का फैसला लिया. अधिकारियों के अनुसार, एसआईटी में लखनऊ मंडल के आयुक्त एवं डिवीजनल कमिश्नर आईएएस विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक किरण एस और वित्त विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल किए गए हैं.
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