UP News: पूर्वांचल की राजनीति में हलचल तेज हो रही है. यहां बहुत कुछ ऐसा हो रहा है, जिसकी तरफ हर राजनीतिक पार्टी का ध्यान खुद ही जा रहा है. दरअसल प्रतापगढ़ के रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया और जौनपुर के पूर्व सांसद और बाहुबली धनंजय सिंह पर इस समय हर राजनीतिक पंडित की नजर है. दरअसल आज यानी चौथे चरण के मतदान से एक दिन पहले राजा भैया ने अपनी पार्टी जनसत्ता दल की अहम बैठक बुलाई है.
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इस बैठक का आयोजन कुंडा के बेंती भवन में ही होना है. माना जा रहा है कि बैठक के बाद राजा भैया अपने प्रभाव वाली सीटों को लेकर फैसला लेंगे और अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं को भी संदेश देंगे. दरअसल पिछले दिनों राजा भैया की केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अमित शाह से मुलाकात हुई थी. इस मुलाकात में क्या बात हुई? ये जानकारी सामने नहीं आई. माना जा रहा है कि इसी बैठक में काफी कुछ तय हो गया था और पूर्वांचल को साधने की रणनीति बना ली गई थी.
आखिर क्या फैसला ले सकते हैं राजा भैया?
माना जा रहा है कि राजा भैया आज होने वाली बैठक में भारतीय जनता पार्टी को समर्थन देने की धोषणा कर सकते हैं. आपको ये भी बता दें कि पिछले दिनों हुए राज्य सभा चुनावों में भी राजा भैया ने भाजपा उम्मीदवारों को ही अपना समर्थन दिया था. उस दौरान राजा भैया ने साफ कहा था कि वह और उनकी पार्टी के विधायक राज्यसभा चुनावों में भाजपा प्रत्याशियों को ही वोट करेंगे. राजा भैया ने ये फैसला तब लिया था, जब समाजवादी पार्टी भी उनसे संपर्क में थी और चाह रही थी कि राजा भैया और उनके विधायकों का समर्थन सपा को मिल जाए. मगर उस दौरान राजा भैया ने भाजपा को चुना था.
धनंजय सिंह पर भी बनी हुई है नजर
दूसरी तरफ जौनपुर के पूर्व सांसद और बाहुबली धनंजय सिंह पर भी लगातार नजर बनी हुई है. माना जा रहा है कि धनंजय सिंह भी जल्द बड़ा फैसला ले सकते हैं. धनंजय सिंह के करीबियों का कहना है कि वह भी भाजपा को अपना समर्थन दे सकते हैं. सूत्रों से तो यहां तक पता चला है कि धनंजय सिंह की पत्नी श्रीकला रेड्डी भी भाजपा का दामन थाम सकती हैं.
राजनीतिक पंडितों की माने तो ये सब अचानक ही नहीं हो रहा है. दरअसल पिछले दिनों जिस तरह से अमित शाह और राजा भैया की मुलाकात हुई और उसके कुछ ही देर बाद जौनपुर लोकसभा सीट से धनंजय सिंह की पत्नी श्रीकला रेड्डी चुनावी मैदान से हट गई, इन दोनों मामलों में जुड़ाव था. धनंजय सिंह ने आरोप लगाया कि बसपा ने उनकी पत्नी श्रीकला रेड्डी का टिकट काट दिया तो दूसरी तरफ बसपा ने कहा कि श्रीकला रेड्डी ने ही चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया. सच जो भी हो, अब इसका सीधा असर जौनपुर में भाजपा को मिलता हुआ नजर आ रहा है. माना जा रहा है कि जौनपुर में भाजपा प्रत्याशी कृपाशंकर सिंह का विजयी रास्ता अब काफी हद तक आसान हो गया है.
पूर्वांचल की नैया पार लगाने की कोशिश में भाजपा
दरअसल भाजपा को लगातार ठाकुरों और राजपूतों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है. ठाकुर-राजपूत वोटबैंक भाजपा का कोर वोट समझा जाता है. मगर इस विरोध ने भाजपा को कई सीटों पर फंसा भी दिया है. अब चुनावी दंगल पूर्वांचल की लोकसभा सीटों पर खेला जाना है. राजनीति जानकारों की माने तो जिस तरह से धनंजय सिंह की गिरफ्तारी हुई, उसने भी राजपूतों और ठाकुरों को अच्छा संदेश नहीं दिया.
ऐसे में भाजपा की रणनीति ठाकुर-राजपूतों की नाराजगी दूर करके, अपने कोर वोट बैंक के पूरे समर्थन के साथ, दूसरे वोट को भी अपने पाले में करने की है. माना जा रहा है कि भाजपा के मिशन पूर्वांचल को सफल बनाने के लिए राजा भैया और धनंजय सिंह जल्द कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं.
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