UP Police SI भर्ती विवाद: पद बढ़ाने की मांग को लेकर 17 अप्रैल से बड़ा अभियान, जानें क्या हैं अभ्यर्थियों की 3 मुख्य मांगें

यूपी पुलिस दरोगा भर्ती 2025-26 में पदों की कम संख्या को लेकर विवाद बढ़ गया है। अभ्यर्थी राघव ठाकुर के नेतृत्व में 17 अप्रैल से आंदोलन की तैयारी है. जानें पद वृद्धि और पारदर्शिता से जुड़ी प्रमुख मांगें.

यूपी तक

• 04:29 PM • 16 Apr 2026

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उत्तर प्रदेश पुलिस दरोगा (SI) भर्ती 2025-26 इन दिनों विवादों और चर्चाओं के केंद्र में है. लगभग पांच साल के लंबे इंतजार के बाद जारी हुई इस भर्ती में पदों की बेहद कम संख्या को लेकर प्रदेश भर के युवाओं में भारी आक्रोश है. लाखों अभ्यर्थियों की उम्मीदों के विपरीत, पदों की संख्या पिछली भर्तियों के मुकाबले आधी से भी कम रखी गई है, जिसे लेकर अब एक बड़ा आंदोलन खड़ा हो रहा है.

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भर्ती के आंकड़े और असंतोष की वजह

इस भर्ती का नोटिफिकेशन अगस्त 2025 में जारी किया गया था, जिसके लिए लगभग 16 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था. मार्च 2026 में आयोजित हुई लिखित परीक्षा में करीब 10 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए. युवाओं का तर्क है कि पांच साल बाद आई भर्ती में पदों की इतनी कम संख्या उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है. इसी कारण अब भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और पद वृद्धि की मांग तेज हो गई है.

राघव ठाकुर का आंदोलन और 17 अप्रैल की योजना

सोशल मीडिया से लेकर जमीन तक युवा संगठन इस लड़ाई को लड़ रहे हैं. इस आंदोलन में राघव ठाकुर एक प्रमुख चेहरे के रूप में उभरे हैं. उन्होंने पद वृद्धि की मांग को लेकर पुलिस भर्ती बोर्ड को कई ज्ञापन सौंपे हैं. इस दौरान उन्हें पुलिस हिरासत में भी लिया गया था, हालांकि बाद में उन्हें जमानत मिल गई. राघव ठाकुर अब अपनी मांगों को और मजबूती देने के लिए 17 अप्रैल से एक बड़ा आउटरीच अभियान शुरू करने जा रहे हैं.

अभ्यर्थियों की तीन मुख्य मांगें

  • आंदोलनकारी युवाओं ने भर्ती बोर्ड और सरकार के सामने अपनी तीन प्रमुख शर्तें रखी हैं:
  • पदों में वृद्धि: भर्ती में कम से कम 2,000 अतिरिक्त पद जोड़े जाएं.
  • पारदर्शिता: प्रत्येक अभ्यर्थी का व्यक्तिगत स्कोरकार्ड और पूरी रैंक लिस्ट सार्वजनिक की जाए.
  • वेटिंग लिस्ट: अंतिम चयन के बाद जो पद खाली रह जाते हैं, उन्हें भरने के लिए एक 'वेटिंग लिस्ट' जारी करने का प्रावधान हो.

प्रशासन का रुख और भविष्य की राह

फिलहाल, उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड की ओर से इन मांगों पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. हालांकि, अभ्यर्थियों के ज्ञापन शासन और बड़े नेताओं तक पहुंच चुके हैं. कई राजनीतिक दलों ने भी युवाओं की इन मांगों का समर्थन करना शुरू कर दिया है.

लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ी इस भर्ती में अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार युवाओं के दबाव में पदों की संख्या बढ़ाने का फैसला लेती है या फिर यह आंदोलन और उग्र रूप धारण करेगा.