UP Lekhpal Exam: लेखपाल मुख्य परीक्षा के बाद देवरिया सेंटर पर क्यों मची थी खलबली? सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो का सामने आया पूरा सच

यूपी लेखपाल मुख्य परीक्षा 21 मई को संपन्न हुई. देवरिया के जनता इंटर कॉलेज में छात्रों को देरी से छोड़ने के वायरल वीडियो का सच आया सामने. बायोमेट्रिक इशू के कारण रुकी थी भीड़, आयोग ने कहा- अफवाहों पर होगी कार्रवाई.

यूपी लेखपाल भर्ती परीक्षा 2026

उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) द्वारा 21 मई 2026 को आयोजित की गई लेखपाल भर्ती की मुख्य परीक्षा (Mains Exam) के बाद से ही सोशल मीडिया पर धांधली और गड़बड़ी के आरोपों को लेकर भारी हंगामा मचा हुआ है. इंटरनेट पर कई वीडियो शेयर कर यह सवाल उठाए जा रहे थे कि आखिर परीक्षा का समय (सुबह 10:00 बजे से 12:00 बजे तक) खत्म होने के बाद भी अभ्यर्थियों को दोपहर 1:30 से 2:00 बजे तक परीक्षा केंद्र के अंदर क्यों रोका गया? इस विवाद के बीच यूपी Tak की टीम ने देवरिया के उसी परीक्षा केंद्र पर मौजूद कैंडिडेट और उनके भाई से बात कर वायरल वीडियो की पूरी सच्चाई का पता लगाया है.

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आजमगढ़ के अभ्यर्थी विनय और उनके भाई ने बताई ग्राउंड जीरो की हकीकत

सोशल मीडिया पर जो वीडियो सबसे ज्यादा वायरल हो रहा है, उसे गेट के बाहर खड़े विपिन मौर्य ने बनाया था. विपिन अपने छोटे भाई विनय मौर्या (निवासी- आजमगढ़) को परीक्षा दिलवाने देवरिया के 'जनता इंटर कॉलेज, ग्राम सोनू घाट, देवरिया सलीमुपर रोड' सेंटर पर ले गए थे.

भाई विपिन मौर्या ने बताया: 10:00 से 12:00 बजे तक पेपर होने के बाद जब छात्र बाहर नहीं आए और काफी डिले (देरी) होने लगा, तो उन्हें संदेह हुआ. उन्होंने गेट पर तैनात प्रशासन के लोगों से पूछा, लेकिन उन्होंने कोई साफ जवाब नहीं दिया. इसी दौरान कॉलेज के अंदर से लड़कियों की आवाजें आ रही थीं, जिससे बाहर खड़े लोग परेशान होने लगे. तब विपिन ने अपने मोबाइल के टाइम टेबल कैमरे से वीडियो बनाकर फेसबुक पर अपडेट कर दिया, जिसमें उन्होंने कहा कि 'लड़के जनता इंटर कॉलेज से 1:00 बजे छोड़े गए हैं.'

कैंडिडेट विनय मौर्या ने बताया (अंदर क्या हुआ): परीक्षा देने वाले छात्र विनय ने बताया कि परीक्षा शांतिपूर्वक चल रही थी, लेकिन पौने 11:00 (10:45) बजे के करीब बगल के एक कमरे से लड़कियों की बहुत तेज आवाजें आने लगीं. जब छात्र बाहर निकलना चाहते थे, तो पुलिसवालों ने उन्हें बाहर नहीं आने दिया. 2 घंटे का पेपर खत्म होने के बाद भी जब वे बाहर निकलने लगे, तो गेट बंद मिला. इसके बाद वहां मौजूद एक प्रशासनिक अधिकारी ने बताया कि बायोमेट्रिक का कुछ इशू (समस्या) है, जिसकी वजह से अटेंडेंस शीट में छात्रों को 'एब्सेंट' (अनुपस्थित) दिखाया जा रहा था. इसी एब्सेंट की समस्या को ठीक करने और दोबारा बायोमेट्रिक अटेंडेंस लगाने की प्रक्रिया के कारण 1 घंटे का अतिरिक्त समय लगा और दोपहर 1:00 बजे के करीब छात्रों को बाहर छोड़ा गया.

भ्रामक खबरों पर UPSSSC का सख्त रुख

वायरल हो रहे इन दावों और वीडियो पर उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) और सरकार ने अपना रुख पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है. आयोग ने सोशल मीडिया पर चल रही बातों को पूरी तरह भ्रामक करार दिया है.

UPSSSC का आधिकारिक बयान:

"21 मई 2026 को लिखित परीक्षा का आयोजन उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग लखनऊ द्वारा प्रदेश के 44 जनपदों के विभिन्न 861 परीक्षा केंद्रों पर निष्पक्ष, निर्विघ्न एवं सुचितापूर्ण रीति से संपन्न कराया गया है. उक्त परीक्षा शांतिपूर्वक एवं निष्पक्ष ढंग से संपन्न हो चुकी है. फिर भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कतिपय व्यक्तियों द्वारा गलत मंशा से प्रेरित होकर परीक्षा की सूचिता को लेकर भ्रामक विश्लेषण एवं प्रचार किया जा रहा है जो आपत्तिजनक है. पुनः स्पष्ट किया जाता है कि इस प्रकार की अफवाहों पर अभ्यर्थी ध्यान ना दें. इस तरह की गुमराह करने एवं अभ्यर्थियों को भड़काने वाली खबर फैलाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध आयोग और पुलिस प्रशासन की ओर से कड़ी कारवाई की जाएगी."

प्रशासनिक संवादहीनता से उपजा विवाद

भले ही आयोग ने परीक्षा को पूरी तरह पारदर्शी और शांतिपूर्ण बताया है, लेकिन यहाँ ग्राउंड स्तर पर कुछ बड़े सवाल खड़े होते हैं. अगर बायोमेट्रिक अटेंडेंस में तकनीकी खामी के कारण अभ्यर्थियों को 1 से डेढ़ घंटे तक रोका गया था, तो परीक्षा केंद्र पर तैनात अधिकारियों ने गेट के बाहर धूप में इंतजार कर रहे परिजनों को इसकी सही जानकारी क्यों नहीं दी? अधिकारियों की इस चुप्पी और संवादहीनता के कारण ही सोशल मीडिया पर अफवाहों को हवा मिली. इसके अलावा यह भी एक बड़ा तकनीकी सवाल है कि जो बायोमेट्रिक अटेंडेंस परीक्षा शुरू होने से पहले होनी चाहिए थी, वह परीक्षा खत्म होने के बाद क्यों ली जा रही थी?

यहां देखें वीडियो रिपोर्ट