मथुरा के प्रसिद्ध गौ रक्षक 'फरसा वाले बाबा' (चंद्रशेखर बाबा) की मौत के बाद हुए भारी हंगामे और पथराव के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है. इस हिंसा और चक्काजाम के आरोप में पुलिस ने कई लोगों को गिरफ्तार किया है. पुलिस ने हंगामा करने, आगरा-दिल्ली हाईवे जाम करने और पुलिस की गाड़ियों में तोड़फोड़ करने के आरोप में 15-16 युवकों को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार किए गए लोगों के पास से अवैध डंडे, ईंट-पत्थर और खोखा कारतूस बरामद किए गए हैं. भीड़ इतनी उग्र थी कि उसने एडीएम (ADM) प्रशासन की गाड़ी को भी निशाना बनाया और उसमें तोड़फोड़ की.
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क्या यह हादसा था या हत्या?
बाबा के समर्थकों का दावा का है कि शनिवार तड़के करीब 4 बजे बाबा को गौ तस्करी की सूचना मिली थी. समर्थकों का आरोप है कि एक तेज रफ्तार कंटेनर ने उन्हें जानबूझकर कुचल दिया. मथुरा पुलिस के अनुसार, यह एक सड़क हादसा था. बाबा ने एक संदिग्ध वाहन को रोका था, तभी घने कोहरे के कारण पीछे से आ रहे एक राजस्थानी नंबर के ट्रक ने उन्हें टक्कर मार दी. जांच में पाया गया कि जिस कंटेनर को बाबा ने रोका था, उसमें गायें नहीं बल्कि किराने का सामान था.
कौन थे फरसा वाले बाबा?
उनका असली नाम चंद्रशेखर था. वे ब्रज क्षेत्र के एक निडर और लोकप्रिय गौ रक्षक संत थे. वे हमेशा अपने हाथ में फरसा लेकर चलते थे, इसीलिए उन्हें 'फरसा वाले बाबा' के नाम से जाना जाता था. वे गौ रक्षा आंदोलन का एक बड़ा चेहरा थे.
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