मथुरा के फरसा वाले बाबा जो पिछले 40 वर्षों से गौवंश की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित कर चुके थे अब इस दुनिया में नहीं रहे. उनके निधन के बाद मथुरा पुलिस और प्रशासन जहां इसे घने कोहरे के कारण हुआ एक्सीडेंट मान रही है. वहीं उनके बड़े भाई केशव सिंह ने यूपी तक से बातचीत में चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. केशव सिंह का दावा है कि बाबा की सुपारी दी गई थी और उन्हें पहले भी जान से मारने की धमकियां मिल रही थीं.उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से गुहार लगाई है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो और बाबा के पीछे छूटीं 400 गायों के संरक्षण की व्यवस्था की जाए.
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एक्सीडेंट नहीं सोची-समझी हत्या का दावा
बाबा के बड़े भाई केशव सिंह ने पुलिस की थ्योरी को सिरे से खारिज कर दिया है. उन्होंने बताया कि हाईवे पर तीन लेन होने के बावजूद ट्रक ने जानबूझकर उस तरफ गाड़ी मोड़ी जहां बाबा चेकिंग कर रहे थे. केशव सिंह के अनुसार यह कोई हादसा नहीं है. हमारे भाई को रास्ते से हटाने के लिए ट्रक से पीछे से टक्कर मारी गई. उन्हें पहले भी धमकियां मिली थीं कि तुम्हारी ईद नहीं होने देंगे.'
सुपारी और पहले हुए हमलों का जिक्र
केशव सिंह ने भावुक होते हुए बताया कि चंद्रशेखर दास (बाबा) बचपन में ही घर छोड़ आए थे और अयोध्या के बाबरी विध्वंस के समय से ही धर्म और गौरक्षा में लग गए थे. उन्होंने दावा किया कि गौ-तस्करों ने बाबा की सुपारी दे रखी थी और इससे पहले भी उन पर गोलियां चली थीं जिसमें वे बाल-बाल बचे थे. उन्होंने पुलिस पर आरोप लगाया कि असली दोषियों को बचाने के लिए इसे केवल एक दुर्घटना का रूप दिया जा रहा है.
हंगामे के पीछे जिहादी तत्वों का हाथ?
कल हुई हिंसा और लाठीचार्ज पर केशव सिंह ने कहा कि बाबा के समर्थक और चेला शांति से अपनी मांगें रख रहे थे. लेकिन भीड़ में कुछ बाहरी तत्व घुस आए जिन्होंने पत्थरबाजी की. उन्होंने कहा, 'जिहादी तत्वों ने आकर माहौल खराब किया और पुलिस ने हमारे निर्दोष बच्चों और चेलों को पकड़कर जेल में डाल दिया है.' उन्होंने मांग की है कि पकड़े गए निर्दोषों को तुरंत रिहा किया जाए.
400 गायों के भविष्य पर संकट
फरसा वाले बाबा अपने पीछे करीब 400 गौवंश छोड़ गए हैं. केशव सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से प्रार्थना की है कि 'बाबा तो चले गए. लेकिन उनकी गौशाला की ये गौमाताएं भूखी न मरें. प्रशासन इनकी देखरेख की जिम्मेदारी संभाले क्योंकि बाबा निस्वार्थ भाव से इनकी सेवा करते थे और उनके पास निजी संपत्ति के नाम पर कुछ नहीं था.'
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