Gorakhpur Mahotsav: गोरखपुर महोत्सव में भोजपुरी स्टार पवन सिंह की परफॉर्मेंस के दौरान हुई अव्यवस्थाओं और भीड़ प्रबंधन के मुद्दों ने महोत्सव को विवादों में भी ला दिया है. बता दें कि पवन सिंह के लाइव शो के दौरान भारी भीड़ जमा हो गई थी. इस दौरान पवन सिंह की एक झलक पाने के लिए लोगों की भीड़ बेकाबू हो गई जिसके बाद हालात बिगड़ गए. ऐसे नें पुलिस को लाठीचार्ज भी करना पड़ गया. इस घटना के बाद महोत्सव को लेकर शहर के लोगों की राय दो हिस्सों में बंट गई है. जहां एक तरफ लोग इस मोहत्सव को गोरखपुर के लिए गर्व का विषय मान रहे हैं. वहीं दूसरी तरफ प्रशासन की तैयारी और VIP-VVIP कल्चर पर सवाल उठाए जा रहे हैं. इसी बीच यूपी Tak की टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थानीय लोगों से बात की और जाना कि गोरखपुर महोत्सव को लेकर जनता क्या सोचती है.
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पवन सिंह की परफॉर्मेंस और जन्मदिन बना बवाल की वजह
UP Tak की टीम जब चंपा देवी पार्क पहुंची तो वहां मौजूद लोगों ने इस मुद्दे पर खुलकर अपनी राय रखी. स्थानीय लोगों के मुताबिक, पवन सिंह की फैन फॉलोइंग उम्मीद से कहीं ज्यादा निकली. कार्यक्रम के दौरान मंच पर उनके जन्मदिन को लेकर एक अलग से आयोजन किया गया. हालांकि पवन सिंह का जन्मदिन 5 जनवरी को था लेकिन करीब एक हफ्ते बाद मंच पर जन्मदिन मानाने का कोई मतलब नहीं था. एक स्थानीय युवक नीतिश ने UP Tak से बातचीत में कहा कि “पवन सिंह की अपनी अलग फैन फॉलोइंग है. जितनी भीड़ कल आई, उसकी उम्मीद नहीं थी. कहीं न कहीं प्रशासन की नाकामी भी दिखी. इतनी भीड़ थी तो उसे पोलाइटली समझाना चाहिए था, लाठी नहीं भांजनी चाहिए थी.” नीतिश का कहना था कि कड़ाके की ठंड में भीड़ को और भड़काने की बजाय कार्यक्रम को संतुलित ढंग से चलाया जाना चाहिए था. “बीच में जब जन्मदिन मनाया गया, उसी वजह से भीड़ बेकाबू हुई और फिर लाठीचार्ज हुआ. कई लोगों को चोट भी लगी.”
कुर्सियां टूटीं और पुलिस ने किया बल का प्रयोग
पवन सिंह के मंच पर आते ही भीड़ आगे बढ़ने लगी. लोग कुर्सियों पर चढ़ते नजर आए, कई कुर्सियां टूट गईं. हालात बेकाबू होते देख पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा. इसके बाद महोत्सव की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े हो गए. सोशल मीडिया से लेकर चाय की दुकानों तक इसी मुद्दे पर चर्चा होती रही कि क्या इतनी बड़ी भीड़ के लिए प्रशासन पूरी तरह तैयार था.
वीआईपी-वीवीआईपी कल्चर पर उठे सवाल
महोत्सव को लेकर एक बड़ा मुद्दा वीआईपी और वीवीआईपी पास का भी है. नीतिश ने इस पर भी खुलकर बात की और कहा कि “हर साल पास को लेकर विवाद होता है. आम लोग इधर-उधर घूमते रह जाते हैं और आगे की सीटों पर वीआईपी और वीवीआईपी लोग ही बैठते हैं. महोत्सव आम जनता के लिए होता है, लेकिन असल मजा वही लोग लेते हैं.” उन्होंने आगे कहा कि “वीआईपी कल्चर के खिलाफ बातें जरूर होती हैं लेकिन ये कभी खत्म नहीं होगा. अधिकारी और नेता हमेशा आगे बैठेंगे औरआम जनता पीछे ही रहेगी . कल जैसे लाठीचार्ज हुआ, आगे भी ऐसा होता रहेगा.”
रविकिशन पूरे कार्यक्रम पर हावी रहते हैं
UP Tak की टीम से बातचीत में नीतिश ने मंच संचालन को लेकर भी नाराजगी जाहिर की. उन्होंने कहा कि “शहर के ज्यादातर लोग मानते हैं कि रविकिशन पूरे महोत्सव को एक तरह से ‘एक्वायर’ कर लेते हैं. मंच पर किसी भी गेस्ट को बुलाने में मध्यस्थता होती है. हर गाने में अगर वही कूदेंगे तो जो लोग गाने सुनने आए हैं, उनका मजा खराब हो जाता है.” उनका कहना था कि मंच पर आए कलाकारों को पूरा मौका मिलना चाहिए, ताकि दर्शक असली परफॉर्मेंस का आनंद ले सकें.
महोत्सव के समर्थन में भी बोले लोग
हालांकि, महोत्सव को लेकर केवल आलोचना ही नहीं है. UP Tak की टीम ने जब एक स्थानीय किसान से बात की तो उन्होंने इसे गोरखपुर के लिए गर्व की बात बताया. उन्होंने कहा कि “यह महोत्सव हर साल होता है. महाराज जी की देन है और यहां दूर-दूर से लोग आते हैं. तमाम विभागों की प्रदर्शनियां लगती हैं.” जब उनसे पूछा गया कि उन्हें सबसे ज्यादा क्या अच्छा लगा तो उन्होंने कहा कि “कृषि विभाग की प्रदर्शनी बहुत अच्छी लगी. हम खेती से जुड़े हैं. किसान ही देश की मूल चीज है, बिना किसान के कुछ नहीं हो सकता.”
महोत्सव को लेकर बंटी राय
गोरखपुर महोत्सव इस समय एक तरफ भव्य आयोजन और बड़े कलाकारों की वजह से चर्चा में है तो दूसरी तरफ अव्यवस्था, भीड़ नियंत्रण की कमी और वीआईपी कल्चर को लेकर सवालों के घेरे में है. पवन सिंह की परफॉर्मेंस के बाद जो तस्वीरें सामने आईं, उसने यह बहस तेज कर दी है कि क्या महत्सव वास्तव में आम जनता का है या फिर कुछ खास लोगों तक ही सीमित रह गया है. अब लोगों की नजरें आज के कार्यक्रम पर हैं, जहां बादशाह की परफॉर्मेंस होनी है. ऐसे में सवाल यही है कि क्या प्रशासन इस बार सबक लेकर बेहतर इंतजाम करेगा .
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