UP Politics: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने गठबंधन को लेकर नई रणनीति अपनाई है. उन्होंने सपा और कांग्रेस को गठबंधन का खुला प्रस्ताव देते हुए संकेत दिया है कि या तो दोनों दल उनके साथ राजनीतिक साझेदारी करें या फिर चुनाव में नुकसान झेलने के लिए तैयार रहें. बिहार में उनका प्रस्ताव ठुकराए जाने के बाद अब वह यूपी में अपनी मौजूदगी को और मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं. उनके हालिया भाषणों में सपा और कांग्रेस दोनों को लेकर एक साथ गठबंधन का ऑफर और राजनीतिक चुनौती दोनों दिखाई दे रही है, जिससे राज्य की सियासत में हलचल तेज हो गई है.
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ओवैसी की पार्टी पिछले चुनावों में बिहार के सीमांचल और महाराष्ट्र के कई इलाकों में प्रभावशाली प्रदर्शन करती नजर आई है. खासकर मुस्लिम मतदाताओं के बीच उनकी लोकप्रियता बढ़ने की चर्चा हो रही है, जिसे सपा और कांग्रेस दोनों के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है. कई मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में एआईएमआईएम ने अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश की है और इसी वजह से यह सवाल उठ रहा है कि आगामी चुनावों में मुस्लिम वोट किस दिशा में जाएगा और क्या उसका एक हिस्सा ओवैसी के पक्ष में जा सकता है.
इसी बीच सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन को लेकर बातचीत भी जारी है. राहुल गांधी और अखिलेश यादव की हालिया मुलाकात को दोनों दलों के रिश्तों में नरमी और सीट बंटवारे पर आगे बढ़ने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ओवैसी की बढ़ती सक्रियता इस गठबंधन की रणनीति और चुनावी गणित को प्रभावित कर सकती है. हालांकि दोनों दल अपनी-अपनी राजनीतिक रणनीतियों पर कायम हैं, लेकिन चुनाव से पहले गठबंधन का अंतिम स्वरूप अभी तय नहीं माना जा रहा. ऐसे में ओवैसी के तेवर, उनकी मांगें और मुस्लिम वोटों पर उनकी दावेदारी सपा-कांग्रेस गठबंधन के लिए बड़ा सिरदर्द बनती दिखाई दे रही है.
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