CJP Protest: संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के साथ ही आज दिल्ली के जंतर-मंतर से CJP का संसद मार्च निकाला जा रहा है. यह प्रदर्शन देश में हो रहे पेपर लीक के मुद्दे को लेकर किया जा रहा है. प्रदर्शनकारी सरकार को घेरने के लिए विभिन्न राज्यों से दिल्ली पहुंचे हैं. प्रदर्शनकारियों को संसद की तरफ बढ़ने से रोकने के लिए पुलिस ने चारों तरफ से कड़ी नाकेबंदी कर दी है. इस बीच दिल्ली में तेज बारिश भी हो रही है, लेकिन प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं.
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संसद मार्ग पर भारी नाकेबंदी
कॉकरोच जनता पार्टी के संसद मार्च के एलान को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं. पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों के पास संसद तक मार्च निकालने की कोई आधिकारिक अनुमति नहीं है. इस वजह से जंतर-मंतर के बाहर जनपद रोड और टॉलेस्टॉय मार्ग पर बैरिकेड लगाकर रास्ते बंद कर दिए गए हैं. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए छह लेयर की आठ फुट ऊंची नुकीली बैरिकेडिंग की है और साथ ही वाटर कैनन व आंसू गैस के गोलों की गाड़ियां भी तैनात कर रखी हैं. पुलिस के घेरे के कारण अब कोई भी प्रदर्शनकारी न तो बाहर जा सकता है और न ही बाहर का कोई व्यक्ति अंदर आ सकता है.
विभिन्न राज्यों से पहुंचे युवा
इस आंदोलन में हिस्सा लेने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से हजारों किलोमीटर दूर से युवा और बुजुर्ग किसान पहुंचे हैं. मध्य प्रदेश से आए एक युवा प्रदर्शनकारी ने कहा कि वे 'नामर्दों के प्रदेश मध्य प्रदेश' से आए हैं क्योंकि वहां चंबल सहित पूरे राज्य में सबसे ज्यादा पेपर लीक होते हैं, लेकिन कोई इस मुद्दे पर बात नहीं करता. वहीं, ग्वालियर के मस्तपुरा गांव से आए एक बुजुर्ग किसान ने कहा कि मोदी सरकार में किसान खाद के लिए बेहद परेशान हैं और यदि खेती ही मारी जाएगी तो क्या होगा. हरियाणा के भिवानी से आए एक अन्य प्रदर्शनकारी ने भी देश में शिक्षा की बदहाली और पानी की किल्लत का मुद्दा उठाया. तेज बारिश के बीच भी युवाओं का कहना है कि वे अपने बच्चों के भविष्य के लिए यहां डटे रहेंगे.
सरकार और पुलिस पर सवाल
सड़क पर बैठे प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार, प्रधानमंत्री और गृहमंत्री पर निशाना साधते हुए पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं. युवाओं का कहना है कि वे पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनसे बातचीत करने को भी तैयार नहीं है. एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि साल 1984 में इंदिरा गांधी ने खुद आकर सोनम वांगचुक के पिता का अनशन तुड़वाया था, लेकिन यह सरकार वार्ता करने से भी पीछे भाग रही है. पुलिस द्वारा सोनम वांगचुक को जबरन ले जाए जाने के बाद उनकी पत्नी ने अपील की है कि सोनम वांगचुक आज अपना अनशन खत्म कर देंगे, लेकिन सरकार के मंत्रियों और बीजेपी के नेताओं को अस्पताल जाकर उनका अनशन तुड़वाना चाहिए.
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