जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक के खिलाफ पुलिस एक्शन के बाद भड़के लोग, अभिजीत दिपके आरोपों के बाद मचा सियासी बवाल

यूपी तक

• 12:19 PM • 18 Jul 2026

 Jantar Mantar Protest: दिल्ली के जंतर-मंतर पर 21 दिनों से भूख हड़ताल कर रहे सोनम वांगचुक को पुलिस द्वारा अस्पताल ले जाने के बाद विवाद बढ़ गया है. प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर जबरदस्ती कार्रवाई और मारपीट के आरोप लगाए, जबकि दिल्ली पुलिस ने इसे हाईकोर्ट के निर्देश और मेडिकल सलाह के आधार पर की गई कार्रवाई बताया.

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 Jantar Mantar Protest: दिल्ली के जंतर-मंतर पर 21 दिनों से भूख हड़ताल कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को पुलिस द्वारा अस्पताल ले जाने के बाद विवाद बढ़ गया है. प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उन्हें जबरदस्ती हटाया और इस दौरान अभिजीत दीप समेत कई प्रदर्शनकारियों के साथ कथित तौर पर मारपीट और बदसलूकी की गई. वहीं, दिल्ली पुलिस ने कहा है कि वांगचुक को उनकी बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति और डॉक्टरों की सलाह के बाद इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया.

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जंतर-मंतर पर पुलिस कार्रवाई के बाद हंगामा

घटना दिल्ली के जंतर-मंतर की है, जहां सोनम वांगचुक पिछले 21 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे थे. प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, अचानक बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे और वांगचुक को वहां से हटाकर ले गए. इसके बाद धरना स्थल पर मौजूद छात्रों और प्रदर्शनकारियों को हटाने की प्रक्रिया शुरू हुई.

इस दौरान सोशल मीडिया पर कई वीडियो सामने आए, जिनमें पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच बहस और टकराव की स्थिति दिखाई दी. प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने बल प्रयोग किया और कई लोगों को हिरासत में लिया.

अभिजीत दीप ने पुलिस पर लगाए आरोप

प्रदर्शन से जुड़े अभिजीत दीप ने दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने दावा किया कि पुलिस ने सोनम वांगचुक को गाली देते हुए घसीटकर वहां से ले गई. अभिजीत ने आरोप लगाया कि उनके साथ भी कथित तौर पर मारपीट की गई और उन्हें सड़क पर घसीटा गया.

उन्होंने यह भी दावा किया कि प्रदर्शन कर रहे कई छात्रों के फोन छीने गए और उनके साथ बदसलूकी की गई. अभिजीत ने इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों के खिलाफ बताते हुए देशभर में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन की अपील की.

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाए जाने के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई. कई लोगों ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए और इसे शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार से जोड़कर देखा.

कुछ विपक्षी नेताओं और समर्थकों ने आरोप लगाया कि सरकार विरोध की आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है. समाजवादी पार्टी समेत कई राजनीतिक दलों ने भी इस मामले को लेकर सरकार पर निशाना साधा.

विपक्ष ने सरकार को घेरा

विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि लोकतंत्र में असहमति की आवाज को बातचीत के जरिए सुना जाना चाहिए, न कि कार्रवाई के जरिए दबाया जाना चाहिए. उन्होंने सोनम वांगचुक और प्रदर्शनकारियों के साथ हुई कार्रवाई पर सवाल उठाए.

वहीं, प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनका आंदोलन छात्रों के भविष्य, परीक्षा व्यवस्था में सुधार और कथित पेपर लीक जैसे मुद्दों को लेकर है.

दिल्ली पुलिस ने बताई कार्रवाई की वजह

दिल्ली पुलिस ने पूरे मामले पर बयान जारी करते हुए कहा कि सोनम वांगचुक पिछले 21 दिनों से भूख हड़ताल पर थे और उनकी तबीयत लगातार खराब हो रही थी. पुलिस के मुताबिक, दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देश और डॉक्टरों की मेडिकल सलाह के आधार पर उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया.

पुलिस ने बताया कि हाईकोर्ट के निर्देश के अनुसार सरकारी डॉक्टर नियमित रूप से उनकी स्वास्थ्य जांच कर रहे थे. मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर डॉक्टरों ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने की सलाह दी थी.

पुलिस बोली- संयम के साथ की गई कार्रवाई

दिल्ली पुलिस का कहना है कि कार्रवाई के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने विरोध किया, जिसके चलते हल्की झड़प जैसी स्थिति बनी. हालांकि पुलिस ने दावा किया कि पूरी कार्रवाई संयम और शांति के साथ की गई.

क्या हैं सोनम वांगचुक की मांगें?

सोनम वांगचुक 28 जून से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे थे. उनकी प्रमुख मांगों में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच, एनटीए में सुधार और परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने की मांग शामिल है.

अस्पताल ले जाए जाने से पहले सोनम वांगचुक ने लोगों से संसद मार्च में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील भी की थी. उन्होंने कहा था कि छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर सरकार को जवाबदेह होना चाहिए. अब इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है.