Maulana Jarjis Ansari Statement: सोशल मीडिया पर इन दिनों इस्लामिक वक्ता मौलाना जरजिस अंसारी का एक विवादित बयान तेजी से वायरल हो रहा है. इस बयान में मौलाना ने भगवान श्री कृष्ण को इस्लामिक बताया है. जिसके बाद देश भर में बड़ा बवाल खड़ा हो गया है. मौलाना ने दावा किया है कि भगवान श्री कृष्ण खुद मुस्लिम थे और वे पांचों वक्त नमाज पढ़ते थे. इस बयान के सामने आने के बाद हिंदू धर्म गुरुओं और आम सनातनियों के साथ-साथ मुस्लिम धर्म गुरुओं ने भी इसकी कड़ी निंदा की है. लोग मौलाना से इस बात का सबूत मांग रहे हैं और सबूत न होने पर पूरे देश से माफी मांगने की मांग कर रहे हैं.
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श्री कृष्ण को बताया नमाजी
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में मौलाना जरजिस अंसारी यह कहते हुए सुनाई दे रहे हैं कि श्री कृष्ण जी भी पांचों वक्त की नमाज पढ़ा करते थे. अपने इस दावे के लिए उन्होंने श्रीमद् भागवत के छठे अध्याय के 10वें श्लोक का हवाला दिया है. मौलाना का कहना है कि इस श्लोक में कृष्ण जी ने अर्जुन से पूरे शरीर का योग करके ईश्वर की पूजा करने को कहा है. मौलाना ने तंज कसते हुए कहा कि आज हिंदू धर्म के लोग सिर्फ हाथ उठाकर नमः शिवाय कह देते हैं और पूजा पूरी हो जाती है, जबकि इस्लाम में नमाज के जरिए पूरे शरीर से इबादत की जाती है.
बयान पर फूटा भारी गुस्सा
मौलाना के इस बयान के बाद चारों तरफ से तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं. एक मुस्लिम धर्म गुरु ने इस बयान को बेहद अफसोसनाक बताते हुए कहा कि किसी भी धर्म के भगवान के खिलाफ ऐसी बात कहना ठीक नहीं है और मौलाना को तुरंत माफी मांगनी चाहिए. वहीं, दूसरी तरफ हिंदू नेताओं और गुरुओं ने मौलाना को मानसिक रूप से विक्षिप्त बताते हुए अस्पताल में इलाज कराने की सलाह दी है. लोगों का कहना है कि भगवान कृष्ण आज से 5000 साल पहले हुए थे, जब इस्लाम का नामोनिशान भी नहीं था, इसलिए मौलाना को अपनी बात का सबूत देना चाहिए.
मौलाना का पुराना विवादित इतिहास
मौलाना जरजिस अंसारी मूल रूप से उत्तर प्रदेश के इटावा के रहने वाले हैं, लेकिन लंबे समय से वे यहाँ नहीं रहते हैं. वे एक इस्लामिक वक्ता के रूप में अलग-अलग राज्यों में जाकर तकरीरें देते हैं. इससे पहले भी वे महिलाओं और दलित समुदाय को लेकर दिए गए विवादित बयानों के कारण कई एफआईआर और कानूनी कार्रवाइयों का सामना कर चुके हैं. साल 2022 में वाराणसी की एक फास्ट ट्रैक कोर्ट ने उन्हें एक महिला से दुष्कर्म और ब्लैकमेल के मामले में 10 साल की सजा सुनाई थी, हालांकि बाद में उन्हें हाई कोर्ट से राहत मिल गई थी.
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