Jantar Mantar Protest: दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन को लेकर विवाद बढ़ गया है. प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और अभिजीत दीप को जबरदस्ती हिरासत में लिया. बताया जा रहा है कि कार्रवाई के दौरान भारी संख्या में पुलिस बल मौके पर तैनात था और प्रदर्शन स्थल के आसपास बैरिकेडिंग भी की गई थी.
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अभिजीत को डिटेन करने का आरोप
प्रदर्शन से जुड़े लोगों का दावा है कि सुबह के समय जब अभिजीत वॉशरूम जाने के लिए उठे, तभी पुलिस ने उन्हें रोक लिया और जमीन पर घसीटते हुए हिरासत में ले लिया. प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर बदसलूकी और बल प्रयोग के आरोप लगाए हैं.
वहीं, सोनम वांगचुक को भी प्रदर्शन स्थल से हटाकर अस्पताल ले जाने की बात सामने आई है. समर्थकों का कहना है कि वह शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे, बावजूद इसके पुलिस ने उन्हें वहां से हटा दिया.
प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर साधा निशाना
इस कार्रवाई के बाद छात्रों और विपक्षी नेताओं ने सरकार पर निशाना साधा. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर चल रहे शांतिपूर्ण आंदोलन को दबाने की कोशिश की जा रही है.
विपक्षी दलों ने भी पुलिस कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि लोकतंत्र में विरोध की आवाज को सुना जाना चाहिए और बातचीत के जरिए समाधान निकाला जाना चाहिए.
जंतर-मंतर पर बढ़ाई गई सुरक्षा
प्रदर्शन के बीच जंतर-मंतर पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है. मौके पर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं और बैरिकेड लगाए गए हैं, ताकि स्थिति नियंत्रण में रखी जा सके. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार को संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए, न कि बल प्रयोग का.
20 तारीख को संसद मार्च की तैयारी
प्रदर्शन से जुड़े लोगों ने 20 तारीख को संसद तक मार्च निकालने की योजना की बात कही है. उनका कहना है कि युवाओं से जुड़े मुद्दों और उनकी मांगों को संसद तक पहुंचाया जाएगा.
इस दौरान कुछ विपक्षी नेताओं ने भी प्रदर्शनकारियों के समर्थन में पहुंचकर अपनी बात रखी. समाजवादी पार्टी के सांसद पुष्पेंद्र सरोज समेत कई नेताओं ने आंदोलनकारियों के साथ खड़े होने की बात कही.
पुष्पेंद्र सरोज ने लगाए गंभीर आरोप
पुष्पेंद्र सरोज ने आरोप लगाया कि अभिजीत को हिरासत में लेना एक सोची-समझी रणनीति थी, ताकि प्रदर्शन का मंच कमजोर किया जा सके. उन्होंने कहा कि युवाओं की आवाज उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है और इसे दबाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए.
पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल
सोनम वांगचुक और अभिजीत की हिरासत को लेकर सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है. जहां प्रदर्शनकारी इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन बता रहे हैं, वहीं पुलिस की ओर से कार्रवाई को लेकर आधिकारिक पक्ष का इंतजार है.
प्रदर्शनकारियों की मांग है कि युवाओं से जुड़े मुद्दों पर सरकार बातचीत करे और उनकी समस्याओं का समाधान निकाले. वहीं, इस पूरे मामले ने एक बार फिर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर बहस छेड़ दी है.
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