Jantar Mantar Protest: दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 21 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस ने सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करवाया, जिससे राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा गया है. इस घटना के बाद विपक्षी नेताओं और विभिन्न संगठनों ने सरकार और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं. सोशल मीडिया पर भी प्रदर्शनकारियों के साथ हुई झड़प और फोन छीने जाने के आरोपों को लेकर भारी बवाल मचा हुआ है. इसी बीच, भीम आर्मी के प्रमुख और सांसद चंद्रशेखर आजाद आधी रात को प्रदर्शनकारियों के बीच पहुंचे और सरकार के खिलाफ कड़ा मोर्चा खोलते हुए 20 जुलाई को एक बड़े संसद मार्च का एलान कर दिया है.
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चंद्रशेखर आजाद की आधी रात एंट्री
जब जंतर-मंतर पर यह घटना हो रही थी, उस समय सांसद चंद्रशेखर आजाद मुंबई में थे. इस घटना के बाद वो तुरंत मुंबई से दिल्ली के लिये रवाना हुए और शनिवार रात करीब 2 बजे वे सीधे जंतर-मंतर धरना स्थल पर पहुंच गए. चंद्रशेखर ने वहां मौजूद छात्रों से बातचीत की और संभावित पुलिस कार्रवाई की स्थिति का जायजा लिया. उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अंग्रेजों के शासन में भी भगत सिंह और गांधी जी के आंदोलनों पर बातचीत होती थी, लेकिन यह सरकार संवेदनहीन हो चुकी है. आजाद ने आरोप लगाया कि एनडीए सरकार ने पिछले 10 साल में 94,000 स्कूल बंद किए हैं, जिससे वे शिक्षा को खत्म करना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि अगर उनकी टीम ने तय किया तो 20 जुलाई को एक बहुत मजबूत संसद मार्च निकाला जाएगा. इससे पहले समाजवादी पार्टी के सांसद पुष्पेंद्र सरोज भी प्रदर्शनकारियों से मिलने पहुंचे थे.
प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर उठाए सवाल
शनिवार की सुबह सादे कपड़ों में दिल्ली पुलिस सोनम वांगचुक को उठाने पहुंची थी. पुलिस उन्हें सफेद चादर से घेरकर अस्पताल ले गई. इस कार्रवाई के बाद कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने पुलिस पर गुंडई और मारपीट के गंभीर आरोप लगाए. दीपके का आरोप है कि सोनम वांगचुक और अन्य प्रदर्शनकारियों के साथ गाली-गलौज की गई और उन्हें सड़क पर घसीटा गया. इसके साथ ही प्रदर्शन कर रहे लड़के-लड़कियों के फोन भी छीन लिए गए. इस घटना के बाद अभिजीत दीपके खुद भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं. सोशल मीडिया पर भी जंतर-मंतर पर मौजूद छात्र-छात्राओं के रोने-बिलखने की तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं.
दिल्ली पुलिस ने दी यह सफाई
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर दिल्ली पुलिस ने अपना आधिकारिक बयान जारी किया है. पुलिस का कहना है कि सोनम वांगचुक 28 जून से भूख हड़ताल पर बैठे थे और 21 दिनों से भूखे रहने के कारण उनकी सेहत लगातार बिगड़ रही थी. पुलिस के मुताबिक, दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देश और डॉक्टरों की मेडिकल सलाह के आधार पर ही उन्हें बेहतर इलाज के लिए सफदरजंग अस्पताल में शिफ्ट किया गया है. कोर्ट ने पहले ही आदेश दिया था कि सरकारी डॉक्टर नियमित रूप से उनके स्वास्थ्य की जांच करें. पुलिस ने दावा किया कि यह पूरी कार्रवाई बहुत संयम और शांति के साथ की गई है, हालांकि कुछ प्रदर्शनकारियों द्वारा रोकने की कोशिश के दौरान हल्की झड़प जरूर हुई थी.
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