Akhilesh Yadav Birthday: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का 1 जुलाई को आधिकारिक जन्मदिन पूरे प्रदेश में उत्साह के साथ मनाया गया. सपा कार्यकर्ताओं ने जगह-जगह केक काटकर, पोस्टर-बैनर लगाकर और विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कर अपने नेता का जन्मदिन मनाया. सोशल मीडिया पर भी सुबह से ही शुभकामनाओं का सिलसिला जारी रहा. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, डिप्टी सीएम समेत विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी अखिलेश यादव को जन्मदिन की बधाई दी. हालांकि इस बीच सबसे ज्यादा चर्चा सुभासपा प्रमुख और योगी सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर के उस संदेश की रही, जिसे उन्होंने जन्मदिन के "तोहफे" के रूप में अखिलेश यादव को दिया.
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प्रदेशभर में जश्न का माहौल
अखिलेश यादव के जन्मदिन पर उत्तर प्रदेश के कई जिलों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए. कहीं 53 फीट लंबा साइकिल के आकार का केक काटा गया तो कहीं छात्रों को अखिलेश यादव की तस्वीर वाले स्कूल बैग और साइकिलें वितरित की गईं. सपा कार्यालयों पर कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ देखने को मिली और बड़े-बड़े पोस्टर एवं होर्डिंग लगाकर अपने नेता को जन्मदिन की शुभकामनाएं दी गईं.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी सुबह से #HappyBirthdayAkhileshYadav ट्रेंड करता रहा. समर्थकों के अलावा विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी उन्हें शुभकामनाएं दीं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनके उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना की, जबकि डिप्टी सीएम समेत भाजपा के कई नेताओं ने भी जन्मदिन की बधाई संदेश साझा किए.
राजभर ने शुभकामनाओं के साथ दी नसीहत
सबसे अधिक चर्चा ओम प्रकाश राजभर के संदेश की रही. उन्होंने पहले अखिलेश यादव को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं और फिर लिखा कि वह काफी सोच रहे थे कि उन्हें क्या उपहार दें. उन्होंने कहा कि अखिलेश बड़े राजनीतिक परिवार से आते हैं, उनके पिता मुलायम सिंह यादव पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व रक्षा मंत्री रहे हैं तथा स्वयं अखिलेश भी मुख्यमंत्री रह चुके हैं, इसलिए भौतिक रूप से उन्हें कुछ देना संभव नहीं है.
इसके बाद राजभर ने अपनी सलाह को ही जन्मदिन का उपहार बताया. उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव को "आलसी और आरामतलब जीवन" से बाहर निकलना चाहिए और एसी-पीसी की राजनीति छोड़कर गांव, गरीब, पिछड़ों, दलितों और गैर-यादव समाज के बीच जाकर उनकी समस्याओं को समझना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि केवल सोशल मीडिया पर खेत-खलिहान के वीडियो देखने से नहीं, बल्कि जमीन पर उतरकर किसानों और ग्रामीणों की वास्तविक स्थिति को समझने से राजनीति मजबूत होती है. राजभर ने अंत में लिखा कि यही उनकी ओर से सबसे बड़ा उपहार है और ईश्वर उन्हें सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा दें.
2022 में थे सहयोगी, अब लगातार कर रहे सियासी हमला
ओम प्रकाश राजभर वही नेता हैं जो वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में थे. राजभर का दावा रहा है कि पूर्वांचल में सपा को मजबूती दिलाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही थी. लेकिन वर्तमान में भाजपा के सहयोगी बनने के बाद वे लगातार अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी पर हमलावर नजर आते हैं.
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पूर्वांचल में समाजवादी पार्टी लगातार अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है. आजमगढ़, प्रयागराज और अन्य जिलों में हुए हालिया कार्यक्रमों के बाद सपा की सक्रियता बढ़ी है. वहीं भाजपा और उसके सहयोगी दल भी इस क्षेत्र में अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए लगातार अभियान चला रहे हैं.
अखिलेश यादव का राजनीतिक सफर
अखिलेश यादव का जन्म 1 जुलाई 1973 को उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के सैफई में हुआ. उनके पिता समाजवादी आंदोलन के प्रमुख नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव तथा माता मालती देवी थीं. शुरुआती शिक्षा सैफई और इटावा में पूरी करने के बाद उन्होंने राजस्थान के धौलपुर सैनिक स्कूल से पढ़ाई की. इसके बाद कर्नाटक की मैसूर यूनिवर्सिटी से सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की.
वर्ष 2000 में कन्नौज लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर उन्होंने सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया. 2012 के विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने पूरे प्रदेश में साइकिल यात्रा निकाली, जिसका बड़ा राजनीतिक लाभ समाजवादी पार्टी को मिला. पार्टी पूर्ण बहुमत से सत्ता में आई और मात्र 38 वर्ष की आयु में अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के सबसे युवा मुख्यमंत्री बने. उन्होंने 2012 से 2017 तक प्रदेश की कमान संभाली.
2027 की तैयारियों के बीच बढ़ी राजनीतिक सक्रियता
मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद समाजवादी पार्टी की पूरी जिम्मेदारी अखिलेश यादव के कंधों पर है. परिवार में आए राजनीतिक मतभेदों के बावजूद अब पार्टी और परिवार काफी हद तक एकजुट नजर आ रहे हैं. यही वजह है कि सपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों को 2027 के विधानसभा चुनाव से काफी उम्मीदें हैं.
फिलहाल अखिलेश यादव का जन्मदिन केवल उत्सव का अवसर नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक संदेशों, शुभकामनाओं और कटाक्षों के कारण प्रदेश की राजनीति में चर्चा का बड़ा विषय भी बन गया. खासकर ओम प्रकाश राजभर द्वारा दी गई "नसीहत" ने इस जन्मदिन को सियासी रंग दे दिया.
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