Ram Mandir Donation Case: राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले की जांच में बड़ा मोड़ सामने आया है. इस केस में आठ आरोपियों से हुई पूछताछ के बाद कई महत्वपूर्ण खुलासे हुए हैं. सबसे लंबी पूछताछ अविनाश शुक्ला से की गई, जिसमें कथित चोरी के तरीकों और उसमें शामिल लोगों की भूमिका पर विस्तार से जानकारी मिली. आरोपियों ने बताया कि पूरी प्रक्रिया को इस तरह अंजाम दिया जाता था कि मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की नजर से बचा जा सके.
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कैमरों से बचने की रणनीति और मिलीभगत का आरोप
पूछताछ में यह भी सामने आया कि चोरी की घटनाओं में टिन्नू यादव की कथित मिलीभगत से यह काम आसान हो जाता था. आरोपियों के अनुसार, कैमरों से बचने के लिए सुनियोजित तरीके अपनाए जाते थे और पूरी योजना बेहद संगठित तरीके से चलती थी. जांच में यह भी दावा किया गया है कि ट्रस्ट के प्रभावशाली सदस्य अनिल मिश्रा की देखरेख में चढ़ावे की गणना और उससे जुड़ी प्रक्रियाएं संचालित होती थीं, जिससे उनकी भूमिका पर भी सवाल खड़े हो गए हैं.
ट्रस्ट, नियुक्तियों और अगली कार्रवाई पर नजर
आरोप है कि मंदिर प्रबंधन में कई कर्मचारियों की नियुक्ति अनिल मिश्रा के परिचितों के माध्यम से होती थी, जिससे उनके प्रभाव का दायरा और भी बढ़ जाता था. बैंक कर्मचारियों की भूमिका पर भी संदेह जताया गया है. वहीं ट्रस्ट के अन्य पदाधिकारियों द्वारा कुछ निर्णयों का विरोध किए जाने की बात भी सामने आई है. जांच में अनिल मिश्रा की संपत्ति में असामान्य वृद्धि के संकेत मिलने की भी चर्चा है. फिलहाल एसआईटी जांच जारी है और ट्रस्ट की आगामी बैठक 6 जुलाई को प्रस्तावित है, जिसमें अनिल मिश्रा और चंपत राय के इस्तीफे पर भी निर्णय लिया जा सकता है. जांच पूरी होने के बाद पूरे मामले की सच्चाई सामने आने और दोषियों पर कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है.
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