रामलला के दर्शन से पहले अजय राय हाउस अरेस्ट, अयोध्या में कांग्रेस नेताओं को पुलिस ने क्यों रोका?

UP News: राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद के बीच अयोध्या में रामलला के दर्शन के लिए पहुंचे कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय समेत पार्टी के कई नेताओं और सांसदों को पुलिस ने हाउस अरेस्ट कर लिया. कांग्रेस ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं.

यूपी तक

• 09:57 AM • 30 Jun 2026

follow google news

UP News: अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले को लेकर सियासी माहौल पहले से ही गरमाया हुआ है. इसी बीच मंगलवार (30 जून) को रामलला के दर्शन के लिए पहुंचे कांग्रेस नेताओं और सांसदों को पुलिस ने उनके होटल से बाहर निकलने से पहले ही हाउस अरेस्ट कर लिया. इस कार्रवाई के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है. कांग्रेस ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जबकि पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं.

यह भी पढ़ें...

होटल पद्मश्री पैलेस में देर रात पहुंची पुलिस

कांग्रेस ने पहले ही घोषणा की थी कि पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल 30 जून को अयोध्या पहुंचकर रामलला के दर्शन करेगा. इस घोषणा के बाद देर रात पुलिस प्रशासन अलर्ट हो गया और अयोध्या स्थित होटल पद्मश्री पैलेस पहुंच गया, जहां उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय समेत कई वरिष्ठ नेता ठहरे हुए थे.

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, होटल के बाहर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया. इतना ही नहीं, होटल के अंदर और कांग्रेस नेताओं के कमरों के बाहर भी पुलिस अधिकारी मौजूद रहे. इसके बाद सभी नेताओं को होटल परिसर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी गई और उन्हें वहीं हाउस अरेस्ट कर लिया गया.

अजय राय का बयान: 'जेल भेज दो, लेकिन लखनऊ नहीं जाएंगे'

हाउस अरेस्ट के दौरान का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय पुलिस अधिकारियों से बातचीत करते दिखाई दे रहे हैं. वीडियो में अजय राय कहते हैं कि वे अयोध्या रामलला के दर्शन करने आए हैं, लखनऊ लौटने के लिए नहीं.

उन्होंने पुलिस से कहा कि अगर प्रशासन चाहे तो उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दे, लेकिन वे अपनी इच्छा से वापस नहीं जाएंगे. उनका यह बयान सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है.

कांग्रेस ने उठाए सरकार पर सवाल

कांग्रेस ने पुलिस कार्रवाई को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है. पार्टी का आरोप है कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में उठ रहे सवालों से ध्यान भटकाने और विपक्ष की आवाज दबाने के लिए यह कदम उठाया गया है.

कांग्रेस नेताओं ने सवाल किया कि क्या अब रामलला के दर्शन करना भी अपराध माना जाएगा? पार्टी का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी जनप्रतिनिधि या श्रद्धालु को मंदिर जाने से रोकना उचित नहीं है.

प्रतिनिधिमंडल में शामिल थे कई सांसद

कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल में कई सांसद और वरिष्ठ नेता शामिल थे. इनमें अमेठी से सांसद किशोरी लाल शर्मा, सीतापुर से सांसद राकेश राठौर, प्रयागराज से सांसद उज्ज्वल रमन सिंह और बाराबंकी से सांसद तनुज पुनिया का नाम प्रमुख रूप से शामिल है. बताया जा रहा है कि सभी नेता अलग-अलग होटलों में ठहरे हुए थे और पुलिस ने उन्हें उनके ठहरने के स्थान पर ही हाउस अरेस्ट कर दिया.

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में जांच जारी

इस बीच राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच भी लगातार आगे बढ़ रही है. इस मामले में शुक्रवार को आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था. शुरुआती न्यायिक हिरासत के बाद सोमवार को सभी आरोपियों को फिर अदालत में पेश किया गया, जहां से अदालत ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया. एसआईटी और पुलिस की जांच लगातार जारी है और अलग-अलग स्थानों पर कार्रवाई की जा रही है.

70 से 80 लाख रुपये की बरामदगी

जांच एजेंसियों के अनुसार, अब तक अलग-अलग आरोपियों और विभिन्न ठिकानों से करीब 70 से 80 लाख रुपये बरामद किए जा चुके हैं. वहीं श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव पद से चंपत राय पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं. ट्रस्ट से जुड़े अनिल मिश्रा ने भी अपना पद छोड़ दिया है.

ताजा जानकारी के अनुसार, जांच एजेंसियों ने चंपत राय से भी इस कथित चोरी के मामले में पूछताछ की है. हालांकि जांच अभी जारी है और आधिकारिक तौर पर किसी नई भूमिका की पुष्टि नहीं की गई है.

विपक्ष का आरोप- 'बड़ी मछलियों को बचाया जा रहा है'

विपक्ष लगातार आरोप लगा रहा है कि इस पूरे मामले में केवल छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई की जा रही है, जबकि बड़े और प्रभावशाली लोगों को बचाने की कोशिश हो रही है. विपक्ष ने चंपत राय, गोपाल राव और अनिल मिश्रा के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की है.

राजनीतिक विवाद और गहराया

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले के बीच कांग्रेस नेताओं को रामलला के दर्शन से पहले हाउस अरेस्ट किए जाने से उत्तर प्रदेश की राजनीति और गर्मा गई है. एक ओर पुलिस जांच और एसआईटी की कार्रवाई जारी है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताते हुए सरकार को घेरने में जुट गया है. ऐसे में यह मामला आने वाले दिनों में और अधिक राजनीतिक तूल पकड़ सकता है.