राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में टिन्नू यादव की भूमिका पर गहराया शक... चंपत राय से पूछताछ में ये सब आया सामने!

Ram Mandir Chadhava Theft Case: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में टिन्नू यादव पर सबसे ज्यादा शक जताया जा रहा है, जबकि पुलिस पूछताछ में चंपत राय ने कई अहम बातें कही हैं. जांच में अब तक करीब ₹80 लाख की बरामदगी हो चुकी है और ट्रस्ट से जुड़े कई लोगों से पूछताछ जारी है.

यूपी तक

• 12:34 PM • 30 Jun 2026

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Ram Mandir Chadhava Theft Case: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सबसे ज्यादा चर्चा राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव की हो रही है, जो पहले ट्रस्ट से जुड़े चंपत राय के ड्राइवर रह चुके हैं. पुलिस जांच में सामने आया है कि चढ़ावे की गिनती और कैश ट्रांसपोर्टेशन जैसे महत्वपूर्ण कामों में उनकी भूमिका रही थी. बताया जा रहा है कि उन्हें मंदिर परिसर में काफी स्वतंत्रता से आने-जाने की सुविधा मिली हुई थी और उनकी बुलेट तक परिसर के अंदर खड़ी होती थी. पुलिस सूत्रों के अनुसार उनके पास से बड़ी मात्रा में नकदी बरामद हुई है, जबकि उनके रिश्तेदार मनीष यादव से मिली रकम को जोड़कर करीब ₹23 लाख की बरामदगी सामने आई है. पूरे मामले में अब तक लगभग ₹80 लाख कैश बरामद होने की बात भी सामने आ चुकी है.

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चंपत राय से पुलिस की पूछताछ

मामले की जांच के दौरान पुलिस ने 29 जून को श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय से लंबी पूछताछ की. सूत्रों के मुताबिक पूछताछ में चंपत राय कई सवालों के स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए. हालांकि उन्होंने यह जरूर कहा कि जब उन्हें चढ़ावा चोरी मामले की जानकारी मिली, तो उन्होंने सक्रिय होकर संदिग्धों की पहचान कराई और एफआईआर दर्ज कराने में सहयोग किया. पुलिस ने उनसे कई प्रक्रियागत सवाल भी पूछे, जिनका जवाब पूरी तरह स्पष्ट नहीं मिल सका.

चंपत राय से पुलिस की पूछताछ

मामले की जांच के दौरान पुलिस ने 29 जून को श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय से लंबी पूछताछ की. सूत्रों के मुताबिक पूछताछ में चंपत राय कई सवालों के स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए. हालांकि उन्होंने यह जरूर कहा कि जब उन्हें चढ़ावा चोरी मामले की जानकारी मिली, तो उन्होंने सक्रिय होकर संदिग्धों की पहचान कराई और एफआईआर दर्ज कराने में सहयोग किया. पुलिस ने उनसे कई प्रक्रियागत सवाल भी पूछे, जिनका जवाब पूरी तरह स्पष्ट नहीं मिल सका.

ट्रस्ट में भर्ती और अन्य सदस्यों का जिक्र

पूछताछ के दौरान जब यह सवाल उठा कि मंदिर परिसर में परिचित या करीबी लोगों को काम पर कैसे रखा गया, तो चंपत राय ने कहा कि जरूरतमंद लोगों को रोजगार दिया गया था. उन्होंने यह भी बताया कि इस प्रक्रिया में केवल उनकी ही नहीं बल्कि ट्रस्ट के अन्य सदस्यों अनिल मिश्रा और गोपाल राव की भी भूमिका रही है. इस बयान के बाद ट्रस्ट की भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं.

जांच और आगे की कार्रवाई

पुलिस जांच अब तेजी से आगे बढ़ रही है. ट्रस्ट के कई पूर्व और वर्तमान अधिकारियों, कर्मचारियों सहित लगभग 70 लोगों को पूछताछ के लिए नोटिस भेजा गया है, जबकि करीब 140 गवाहों के बयान दर्ज करने की तैयारी है. इस मामले में अब तक सभी आठ आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है. पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद और बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं.