डॉ. राम मनोहर लोहिया के परिवार पर सियासी बहस तेज, रिसर्चर ने जैविक वंश को लेकर किए बड़े खुलासे

Ram Manohar Lohia Family: भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की लोहिया परिवार से मुलाकात के बाद डॉ. राम मनोहर लोहिया के जैविक परिवार और वंशजों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है. समाजवादी विचारक दीपक मिश्रा ने दावा किया कि लोहिया ने कभी विवाह नहीं किया, उनकी कोई संतान या दत्तक पुत्र नहीं था और वे पूरे देश को अपना परिवार मानते थे.

यूपी तक

• 03:12 PM • 30 Jun 2026

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Ram Manohar Lohia Family: उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों डॉ. राम मनोहर लोहिया के परिवार को लेकर नई बहस छिड़ गई है. इसकी वजह बनी भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष की उस परिवार से मुलाकात, जिसने खुद को लोहिया का परिवार बताया. इसके बाद सवाल उठने लगे कि जब डॉ. लोहिया ने कभी विवाह ही नहीं किया और उनकी कोई संतान नहीं थी, तो फिर यह परिवार कौन है? इसी मुद्दे पर समाजवादी विचारक और लोहिया पर लंबे समय से शोध कर रहे दीपक मिश्रा ने विस्तार से अपनी बात रखी. उन्होंने लोहिया के जीवन, उनके जैविक परिवार, निजी जीवन, विचारधारा और राजनीतिक विरासत को लेकर कई दावे किए.

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BJP प्रदेश अध्यक्ष की मुलाकात के बाद शुरू हुई नई बहस

हाल ही में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष लखनऊ में उस परिवार से मिलने पहुंचे, जो खुद को डॉ. राम मनोहर लोहिया का परिवार बताता है. बताया जाता है कि इस परिवार के सभी सदस्य अपने नाम के आगे "लोहिया" उपनाम लगाते हैं और एक जैसी जीवनशैली अपनाने के लिए भी जाने जाते हैं. इसी मुलाकात के बाद यह सवाल उठने लगा कि आखिर यह परिवार डॉ. लोहिया से किस रिश्ते से जुड़ा है, जबकि इतिहास बताता है कि उन्होंने जीवनभर विवाह नहीं किया था.

'लोहिया' की सबसे प्रामाणिक जीवनी का हवाला

समाजवादी विचारक दीपक मिश्रा ने बताया कि डॉ. राम मनोहर लोहिया पर ओमकार शरद द्वारा लिखी गई पुस्तक "लोहिया" सबसे प्रामाणिक जीवनी मानी जाती है. उनके अनुसार यह पुस्तक लोहिया के जीवनकाल में ही लिखी गई थी और स्वयं डॉ. लोहिया ने इसका अध्ययन भी किया था. यही कारण है कि लोहिया पर होने वाले अधिकांश शोधों में इस पुस्तक को आधार माना जाता है.

डॉ. लोहिया ने कभी विवाह नहीं किया

दीपक मिश्रा के अनुसार डॉ. राम मनोहर लोहिया ने कभी शादी नहीं की. इसलिए उनकी कोई जैविक संतान नहीं थी. उन्होंने यह भी कहा कि लोहिया का एक प्रामाणिक प्रेम संबंध रमा मित्रा से था, जो उस समय उनके सरकारी आवास पर रहती थीं. लोहिया ने कभी इस संबंध को छिपाया नहीं और रमा मित्रा को लिखे उनके पत्रों पर "लोहिया के पत्र रमा के नाम" शीर्षक से पुस्तक भी प्रकाशित हो चुकी है. हालांकि इस संबंध से भी उनकी कोई संतान नहीं हुई.

क्या था डॉ. लोहिया का पारिवारिक इतिहास?

दीपक मिश्रा ने बताया कि डॉ. लोहिया के दादा शिव नारायण के चार पुत्र थे—गणेश नारायण, शंकरलाल, बाबूलाल और हीरालाल. हीरालाल के पुत्र ही डॉ. राम मनोहर लोहिया थे. उनके अनुसार लोहिया के तीनों चाचाओं का निधन कम उम्र में हो गया था.

उन्होंने आगे बताया कि लोहिया के दादा के भाई विष्णु दयाल के पुत्र पुरुषोत्तम की कुल 24 संताने (पुत्र और पुत्रियां) थीं, लेकिन समय के साथ कोई भी जीवित नहीं बचा. इसके बाद परिवार अकबरपुर छोड़कर कोलकाता चला गया, जहां हीरालाल बस गए. जर्मनी से पीएचडी पूरी करने के बाद डॉ. लोहिया भी पहले मद्रास पहुंचे और वहां से सीधे कोलकाता गए.

क्या डॉ. लोहिया ने किसी को गोद लिया था?

दीपक मिश्रा ने साफ दावा किया कि ऐसा कोई ऐतिहासिक या दस्तावेजी प्रमाण उपलब्ध नहीं है, जिससे यह साबित हो कि डॉ. लोहिया ने किसी को दत्तक पुत्र बनाया था. उन्होंने कहा कि लोहिया पूरे देश को अपना परिवार मानते थे और उनके लिए वैचारिक परिवार ही सबसे महत्वपूर्ण था. उनके अनुसार जो व्यक्ति समाजवाद, समानता और अन्याय के खिलाफ संघर्ष की विचारधारा को अपनाता है, वही वास्तविक अर्थों में लोहिया का परिजन माना जा सकता है.

'देश ही मेरा परिवार था'-यही था लोहिया का दर्शन

दीपक मिश्रा ने कहा कि डॉ. लोहिया खुद को केवल भारत का नहीं बल्कि विश्व का नागरिक मानते थे. उन्होंने अमेरिका में भी सत्याग्रह किया था और कहा था कि दुनिया के किसी भी व्यक्ति का दर्द उनका अपना दर्द है. उनका मानना था कि पूरा विश्व ही उनका परिवार है. इसलिए उन्होंने व्यक्तिगत वंश परंपरा की बजाय वैचारिक विरासत को अधिक महत्व दिया.

जमुनालाल बजाज की बेटी से विवाह का प्रस्ताव क्यों ठुकराया?

दीपक मिश्रा ने एक प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि महात्मा गांधी चाहते थे कि डॉ. लोहिया का विवाह उद्योगपति जमुनालाल बजाज की पुत्री से हो. उस दौर में बजाज, टाटा और बिड़ला देश के सबसे प्रभावशाली उद्योगपति परिवारों में गिने जाते थे.

उनके अनुसार जैसे ही डॉ. लोहिया को इस प्रस्ताव की जानकारी मिली, वह वहां से चले गए. दीपक मिश्रा का दावा है कि लोहिया नहीं चाहते थे कि उनका जीवन पारिवारिक जिम्मेदारियों में बंध जाए. उनका पूरा जीवन देश की आजादी, लोकतंत्र और समाजवाद को मजबूत करने के लिए समर्पित था.

'मारवाड़ी परिवार से थे लोहिया'

दीपक मिश्रा ने बताया कि डॉ. लोहिया मूल रूप से मारवाड़ी परिवार से थे. उनकी माता चंदा झुनझुनवाला थीं, जो विवाह के बाद चंदा लोहिया कहलायीं.

उन्होंने यह भी कहा कि आजादी के बाद पंडित जवाहरलाल नेहरू और लोहिया के बीच कई वैचारिक मतभेद उभरे. उनके अनुसार एक बार लोहिया ने नेहरू पर तीखी टिप्पणी की थी, जिसके बाद दोनों नेताओं के रिश्तों में दूरी बढ़ गई. हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान दोनों परिवारों के बीच घनिष्ठ संबंध थे और लोहिया की पहली गिरफ्तारी भी प्रयागराज स्थित नेहरू परिवार के घर से हुई थी.

'BJP प्रतीकों की राजनीति कर रही है'-दीपक मिश्रा का आरोप

दीपक मिश्रा ने बातचीत के दौरान भाजपा पर भी निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ऐतिहासिक और वैचारिक प्रतीकों को अपने राजनीतिक नैरेटिव से जोड़ने की कोशिश करती है. उन्होंने कहा कि जिस परिवार से भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मिले हैं, उसके डॉ. लोहिया के जैविक वंशज होने का कोई प्रमाण उनके पास नहीं है. हालांकि यह उनके व्यक्तिगत दावे हैं.

राजनीतिक बहस के केंद्र में लोहिया की विरासत

डॉ. राम मनोहर लोहिया भारतीय राजनीति के सबसे प्रभावशाली समाजवादी नेताओं में गिने जाते हैं. ऐसे में उनके परिवार और विरासत को लेकर उठी यह बहस राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है. एक ओर भाजपा की मुलाकात को लेकर सवाल उठ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर समाजवादी विचारधारा से जुड़े लोग ऐतिहासिक तथ्यों और दस्तावेजों का हवाला देकर अलग-अलग दावे कर रहे हैं. अब यह विवाद केवल एक परिवार की पहचान तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि लोहिया की वैचारिक विरासत और राजनीतिक प्रतीकों की राजनीति पर भी नई बहस छेड़ चुका है.