आईएएस (IAS) रिंकू सिंह राही की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है. भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ते हुए अपनी एक आंख और जबड़ा गंवाने वाले इस जांबाज अधिकारी ने अब आईएएस पद से इस्तीफा देकर पूरे प्रशासनिक अमले को हिला दिया है.
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IAS रिंकू सिंह राही के इस्तीफे ने सिस्टम को कटघरे में खड़ा किया!
उत्तर प्रदेश कैडर के 2022 बैच के आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही ने शासन को अपना तकनीकी इस्तीफा सौंप दिया है. यह इस्तीफा सिर्फ एक पद का त्याग नहीं, बल्कि सिस्टम की उस कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार है जो एक ईमानदार अधिकारी को बिना काम के बैठाए रखती है.
भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग और जानलेवा हमला
रिंकू राही के संघर्ष की शुरुआत 2004 में हुई जब उन्होंने यूपीपीसीएस (UPPCS) क्लियर किया और मुजफ्फरनगर में समाज कल्याण अधिकारी बने. वहां उन्होंने ₹100 करोड़ के छात्रवृत्ति घोटाले का पर्दाफाश किया. इसकी कीमत उन्हें 2009 में चुकानी पड़ी, जब बैडमिंटन खेलते समय उन पर हमलावरों ने 7 गोलियां बरसा दीं. मौत को मात देकर वे वापस तो आए, लेकिन एक आंख की रोशनी हमेशा के लिए चली गई और चेहरा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया.
मौत को मात, फिर UPSC में सफलता
इतने बड़े शारीरिक और मानसिक आघात के बावजूद रिंकू राही नहीं टूटे. उन्होंने अस्पताल के बिस्तर से उठकर यूपीएससी की तैयारी शुरू की और साल 2021 में परीक्षा पास कर आईएएस अधिकारी बने. यह उनकी हिम्मत ही थी कि 16 प्रयासों और जानलेवा हमलों के बावजूद वे देश की सबसे प्रतिष्ठित सेवा में पहुंचे.
शाहजहांपुर विवाद और 8 महीने का वनवास
आईएएस बनने के बाद उनकी तैनाती शाहजहांपुर में हुई. वहां पोस्टिंग के पहले ही दिन एक कर्मचारी को खुले में शौच करते देख उन्होंने उसे सजा दी, जिससे वकील नाराज हो गए. इसके बाद एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें रिंकू राही कान पकड़कर उठक-बैठक लगाते नजर आए. इस घटना के बाद उन्हें पद से हटाकर लखनऊ राजस्व परिषद में अटैच कर दिया गया.
मुझे वापस PCS बना दो: एक अनोखी मांग
रिंकू सिंह राही ने अपने इस्तीफे में केंद्र सरकार, योगी सरकार और राष्ट्रपति से एक अनूठी मांग की है. उन्होंने कहा है कि उन्हें आईएएस पद से मुक्त कर वापस उनके पुराने कैडर यानी पीसीएस (PCS) में नियुक्त कर दिया जाए. उनका मानना है कि पीसीएस अधिकारी के तौर पर वे जमीन पर उतरकर लोगों की सेवा कर पा रहे थे, जो अब संभव नहीं हो पा रहा है.
पिता का भावुक बयान- 'मेरा मकान देख लीजिए, बैंक बैलेंस नहीं ईमान ही है'
रिंकू के पिता, जो एक आटा चक्की चलाते थे, अपने बेटे के फैसले के साथ मजबूती से खड़े हैं. उन्होंने कहा, "मुझे अपने बेटे पर गर्व है. वह कभी ईमानदारी से समझौता नहीं करेगा. 2009 में उसने घोटाला निकाला था, उसकी आंख चली गई, लेकिन हिम्मत नहीं हारी. हमारे पास कोई बैंक बैलेंस नहीं है, मेरा घर देख लीजिए, ये चक्की की मेहनत का ही है. जो भी निर्णय उसने लिया है, वह देशहित में है."
अब आगे क्या?
रिंकू राही का यह 'टेक्निकल रेजिग्नेशन' अब केंद्र सरकार और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के पास जाएगा. सवाल बना हुआ है कि क्या शासन उनका इस्तीफा स्वीकार करेगा या उन्हें फील्ड पोस्टिंग देकर जनसेवा का मौका देगा? भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने वाले एक अधिकारी का इस तरह इस्तीफा देना देश की नौकरशाही के लिए एक बड़ा सबक और सवाल है.
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