उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) के परिणामों में फतेहपुर के शुभम सिंह ने अपनी मेधा का लोहा मनवाया है. शुभम ने प्रदेश भर में 9वीं रैंक हासिल कर जिले का नाम रोशन किया है. आईआईटी धनबाद से मैकेनिकल इंजीनियरिंग करने वाले शुभम का यह सफर असफलताओं से सीखने और खुद को तराशने की एक मिसाल है.
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यूपीएससी की असफलता से नहीं मानी हार
शुभम ने अपनी तैयारी कॉलेज के दिनों में ही शुरू कर दी थी. शुरुआत में उनका लक्ष्य यूपीएससी (UPSC) था, लेकिन वहां सफलता हाथ नहीं लगी. निराश होने के बजाय शुभम ने अपनी ऊर्जा को यूपी पीसीएस की ओर मोड़ा और अपने दूसरे ही प्रयास में टॉप-10 में जगह बनाकर सबको चौंका दिया. उनकी शुरुआती शिक्षा गांव के ही स्कूल से हुई, जिसने उनके आधार को मजबूत किया.
सेल्फ स्टडी और टेस्ट सीरीज का कमाल
कोचिंग के भारी-भरकम बोझ के बजाय शुभम ने 'सेल्फ स्टडी' पर भरोसा जताया. उन्होंने अपनी तैयारी के लिए यूट्यूब वीडियो और ऑनलाइन संसाधनों का बखूबी इस्तेमाल किया. शुभम के अनुसार, प्रीलिम्स के लिए कॉन्सेप्चुअल समझ और मेन्स के लिए 'आंसर राइटिंग' (लेखन कौशल) सबसे महत्वपूर्ण है. उन्होंने विशेष रूप से टेस्ट सीरीज को अपनी सफलता का बड़ा आधार बताया.
इंटरव्यू में बैकग्राउंड और सामाजिक मुद्दों पर जोर
शुभम ने बताया कि उनका इंटरव्यू काफी संतुलित रहा. उनसे ज्यादातर सवाल उनके इंजीनियरिंग बैकग्राउंड, वर्तमान सियासी घटनाक्रम और सामाजिक मुद्दों पर पूछे गए. उन्होंने उम्मीदवारों को सलाह दी कि इंटरव्यू में घबराने की जरूरत नहीं है, बस अपने विचारों में स्पष्टता और ईमानदारी रखना जरूरी है.
युवाओं के लिए संदेश- असफलता सुधार का अवसर है
अपनी सफलता का श्रेय परिवार के सहयोग और मेंटरिंग को देते हुए शुभम ने कहा कि हर छात्र की अपनी ताकत और कमजोरी होती है, इसलिए रणनीति भी अपनी क्षमता के अनुसार बनानी चाहिए. उन्होंने युवाओं से कहा कि असफलताओं से घबराना नहीं चाहिए, बल्कि उन्हें अपनी कमियों को सुधारने का एक अवसर मानकर निरंतर प्रयास जारी रखना चाहिए.
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