रामनवमी के अवसर पर राजपूत समाज द्वारा आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंचे बृजभूषण शरण सिंह ने मंच से जातियों और धर्मों की राजनीति पर बड़ा प्रहार किया. उनके संबोधन ने न केवल उपस्थित भीड़ को चौंका दिया, बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी नई बहस छेड़ दी है.
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दो 'खलनायक' और राजनीतिक समीकरण
बृजभूषण शरण सिंह ने अपने भाषण में सीधे तौर पर कहा कि आज के दौर में देश के अंदर दो ही सबसे बड़े 'खलनायक' हैं—पहला मुसलमान और दूसरा सवर्ण समाज. उन्होंने तर्क दिया कि मुसलमानों के साथ खड़े होने के लिए भाजपा को छोड़कर देश की लगभग तमाम राजनीतिक पार्टियां तैयार रहती हैं, लेकिन सवर्णों के हक की बात करने वाला कोई नहीं है.
सवर्णों की स्थिति पर उठाए सवाल
पूर्व सांसद ने भीड़ से संवाद करते हुए पूछा, "क्या कोई ऐसी पार्टी है जो खुलकर सवर्णों के अधिकारों के लिए खड़ी होती है?" जब भीड़ से 'कोई नहीं' का जवाब आया, तो उन्होंने सवर्ण समाज की राजनीतिक उपेक्षा पर तंज कसा. उन्होंने समाज को एकजुट होने और अपनी शक्ति पहचानने का आह्वान किया.
शायराना अंदाज और राम का मार्ग
भाषण के दौरान बृजभूषण भावुक भी नजर आए. उन्होंने एक शेर पढ़ते हुए कहा, "इतने गहरे घाव कहां से आए होंगे, लगता है तुमने भी दोस्त बनाए होंगे." उन्होंने वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों को कठिन बताते हुए समाधान भी सुझाया. उन्होंने कहा कि सवर्णों को अपनी समस्याओं का हल और जीवन का सही मार्ग भगवान राम के आदर्शों में ही ढूंढना होगा.
सियासी गलियारों में हलचल
बृजभूषण शरण सिंह का यह बयान ऐसे समय में आया है जब जातिगत जनगणना और आरक्षण के मुद्दों पर देश में बहस छिड़ी हुई है. उनके इस 'खलनायक' वाले बयान को सवर्ण मतदाताओं को लामबंद करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.
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