गैड सिलेंडर के बाद एकाएक बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम तो भड़कर अखिलेश यादव ने कह दी ये बात

Akhilesh Yadav on Petrol Diesel Price Hike: पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तीन रुपए से अधिक की वृद्धि हुई है. इससे महंगाई बढ़ेगी और आम लोगों पर असर पड़ेगा। सरकार ने वैश्विक हालात को कारण बताया है जबकि विपक्षी दल आलोचना कर रहे हैं. तेल कंपनियां लगातार नुकसान झेल रही हैं. यह बढ़ोतरी दैनिक जीवन की कीमतों को प्रभावित कर सकती है.

यूपी तक

15 May 2026 (अपडेटेड: 15 May 2026, 01:30 PM)

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Akhilesh Yadav Petrol Diesel Rate Hike:शुक्रवार की सुबह देश के आम आदमी के लिए एक बुरी खबर लेकर आई है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी का असर अब भारतीय रसोई और जेब पर पड़ना शुरू हो गया है. पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ₹3 प्रति लीटर से ज्यादा की भारी बढ़ोतरी कर दी गई है. इस फैसले के बाद जहां एक तरफ जनता का बजट बिगड़ना तय है. वहीं दूसरी तरफ देश में महंगाई और राजनीति दोनों का पारा चढ़ गया है. समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों ने इस बढ़ोतरी को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है.

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लखनऊ में क्या हैं नए दाम?

ईंधन की कीमतों में हुई इस वृद्धि के बाद राजधानी लखनऊ में पेट्रोल की कीमत ₹79.51 प्रति लीटर (बेस प्राइस में वृद्धि के बाद) के स्तर को प्रभावित कर रही है जबकि डीजल ₹90.79 प्रति लीटर तक पहुंच गया है. पेट्रोल में ₹3.14 और डीजल में ₹3.11 प्रति लीटर का इजाफा किया गया है.जानकारों का मानना है कि ईंधन महंगा होने से ट्रांसपोर्टेशन लागत बढ़ेगी, जिसका सीधा असर दूध, सब्जी और राशन जैसी रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर पड़ेगा.

अखिलेश यादव का तंज- "साइकिल ही विकल्प है"

इस बढ़ोतरी पर सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर एक कार्टून साझा करते हुए भाजपा सरकार पर जोरदार तंज कसा। उन्होंने लिखा कि "आगे बढ़ना है तो साइकिल ही विकल्प है." अखिलेश ने संकेत दिया कि भाजपा के राज में महंगाई से छुटकारा पाने का रास्ता अब बदलाव ही है. वहीं, कांग्रेस ने प्रधानमंत्री पर हमला बोलते हुए उन्हें 'महंगाई मैन' तक करार दे दिया है.

क्यों बढ़े दाम? सरकार और कंपनियों का तर्क

सरकार की ओर से इस बढ़ोतरी के पीछे वैश्विक परिस्थितियों और जियोपॉलिटिक्स को जिम्मेदार ठहराया गया है. मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष और 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' में सप्लाई चेन बाधित होने की आशंका से ग्लोबल मार्केट में कच्चा तेल महंगा हुआ है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय कीमतें बढ़ने के बावजूद पुरानी दरों पर तेल बेचने के कारण सरकारी पेट्रोलियम कंपनियों (IOC, BPCL, HPCL) को रोजाना ₹1600 से ₹1700 करोड़ का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था.

जनता की राय: मजबूरी या नाराजगी?

पेट्रोल पंपों पर मौजूद आम जनता की मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है. कुछ लोग इसे मजबूरी मानकर मैनेज करने की बात कह रहे हैं, तो कुछ का कहना है कि वेतन में बढ़ोतरी नहीं हो रही लेकिन खर्च लगातार बढ़ रहे हैं. एक नागरिक ने पीएम मोदी की अपील का जिक्र करते हुए कहा, "सरकार अगर दाम बढ़ा रही है तो इसके पीछे वैश्विक संकट एक बड़ा कारण है, हमें सार्वजनिक परिवहन और कारपूलिंग को बढ़ावा देना चाहिए."