Akhilesh Yadav Prateek Yadav News:14 मई की सुबह उत्तर प्रदेश की राजनीति और यादव कुनबे के लिए आम दिनों जैसी नहीं थी. समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे और अखिलेश यादव के छोटे भाई प्रतीक यादव गुरुवार को पंचतत्व में विलीन हो गए. इस दुखद घड़ी में सपा प्रमुख अखिलेश यादव का एक ऐसा रूप नजर आया जिसने सबका दिल जीत लिया. यहां वह न तो पूर्व मुख्यमंत्री थे और न ही विपक्ष के नेता, वह बस एक 'बड़े भाई' थे जिन्होंने अपना छोटा भाई खोया था और एक 'ताऊ' थे जो अपनी दो मासूम भतीजियों के लिए पहाड़ जैसा सहारा बनकर खड़े थे.
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चट्टान की तरह परिवार के साथ खड़े रहे अखिलेश
प्रतीक यादव के निधन के दिन से लेकर उनकी अंतिम यात्रा तक अखिलेश यादव एक मजबूत चट्टान की तरह अपने भाई के परिवार के साथ डटे रहे. शव यात्रा के दौरान जब 'प्रतीक भैया अमर रहे' के नारे लग रहे थे, तब अखिलेश की नजरें अपनी उन दो भतीजियों पर टिकी थीं जिनके सिर से पिता का साया उठ गया था. मुखाग्नि के समय जब मंत्रोच्चार शुरू हुआ तो अखिलेश के चेहरे पर अपने भाई को खोने का दर्द साफ झलक रहा था. लेकिन उन्होंने खुद को संभालकर पूरे परिवार को संबल दिया.
सोशल मीडिया पर छलका भाई का दर्द
अंतिम संस्कार के बाद अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर प्रतीक की अंतिम यात्रा और अपनी भतीजी के साथ की तस्वीरें साझा कीं. उन्होंने एक संक्षिप्त लेकिन बेहद भावुक पोस्ट में लिखा 'स्वर्गीय प्रतीक यादव जी पंचतत्व में विलीन हुए. ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे. भावपूर्ण श्रद्धांजलि।" यह पोस्ट महज एक औपचारिकता नहीं बल्कि एक बड़े भाई की अपने छोटे भाई के प्रति अंतिम संवेदना थी.
राजनीति से ऊपर दिखा शोक का माहौल
प्रतीक यादव के निधन ने राजनीति की दीवारों को भी ढहा दिया. बैकुंठ धाम में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं से लेकर भारतीय जनता पार्टी के बड़े चेहरे भी अपर्णा यादव और परिवार को ढांढस बंधाने पहुंचे थे. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत तमाम दिग्गज नेताओं ने इस क्षति पर गहरा शोक व्यक्त किया.
कैसे हुआ था निधन?
बता दें कि बुधवार की सुबह अचानक तबीयत बिगड़ने पर प्रतीक यादव को सिविल अस्पताल ले जाया गया था जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। 38 साल की उम्र में प्रतीक का इस दुनिया से चले जाना यादव परिवार के लिए एक ऐसा शून्य पैदा कर गया है, जिसकी भरपाई शायद कभी मुमकिन नहीं होगी. आज बैकुंठ धाम में हर आंख नम थी और हर दिल इस हंसते-खेलते चेहरे की याद में भारी था.
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