उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े राजनीतिक कुनबे यानी 'यादव परिवार' के लिए 13 मई की सुबह एक ऐसा जख्म दे गई जिसकी भरपाई नामुमकिन है. समाजवादी पार्टी के संस्थापक स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के भाई प्रतीक यादव का 38 वर्ष की अल्पायु में निधन हो गया. उनके जाने से न केवल सैफई से लेकर लखनऊ तक शोक की लहर है, बल्कि परिवार में एक ऐसा शून्य पैदा हो गया है जिसे भरा नहीं जा सकता.
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भावुक कर देने वाली अंतिम विदाई: 'भाभी' डिंपल की आंखें हुईं नम
प्रतीक यादव के निधन के बाद परिवार की एकजुटता ने हर किसी को भावुक कर दिया.
- डिंपल यादव का दर्द: साल 2011 में प्रतीक और अपर्णा की शादी में सबसे ज्यादा खुश नजर आने वाली उनकी भाभी, सांसद डिंपल यादव, अपने देवर को अंतिम विदाई देते समय बेहद गमगीन दिखीं.
- पारिवारिक बॉन्ड: प्रतीक भले ही राजनीति में सक्रिय नहीं थे, लेकिन परिवार के हर छोटे-बड़े आयोजन में उनकी मौजूदगी अनिवार्य होती थी. अखिलेश यादव समेत पूरे परिवार के लिए प्रतीक एक लाडले भाई की तरह थे.
निजी जीवन और उतार-चढ़ाव
प्रतीक की पत्नी अपर्णा यादव भाजपा की कद्दावर नेता हैं. हाल के वर्षों में दोनों के बीच वैचारिक और व्यक्तिगत मतभेदों की खबरें भी सुर्खियों में रहीं, लेकिन इस दुखद घड़ी में पूरा परिवार अपर्णा और प्रतीक की दोनों बेटियों के साथ चट्टान की तरह खड़ा नजर आया. प्रतीक को उनकी महंगी गाड़ियों के शौक और अपने पालतू जानवरों के प्रति अगाध प्रेम के लिए हमेशा याद किया जाएगा.
एक सफल व्यवसायी और मानवीय चेहरा
प्रतीक यादव की कहानी सिर्फ एक 'VVIP' बेटे की कहानी नहीं है, बल्कि एक सफल उद्यमी की है जिसने अपनी व्यावसायिक सफलता को मानवीय कार्यों से जोड़ा. लखनऊ के सिविल अस्पताल में उनके निधन की खबर ने उन तमाम युवाओं को तोड़ दिया जो उन्हें अपना फिटनेस आइकन मानते थे.
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