जब मुलायम सिंह को हटाकर अखिलेश यादव बने थे सपा अध्यक्ष, तब प्रतीक यादव ने दिया था बड़ा बयान

समाजवादी पार्टी के प्रतीक यादव के निधन के बाद यादव परिवार में गहरा शोक है, लेकिन इस दुख की घड़ी में पूरा परिवार एकजुट नजर आया. अखिलेश यादव, डिंपल यादव और अन्य परिजन एक-दूसरे का सहारा बनते दिखे.

यूपी तक

• 03:34 PM • 16 May 2026

follow google news

UP News: समाजवादी पार्टी (SP) के परिवार में प्रतीक यादव के निधन के बाद गहरा शोक और भावनात्मक माहौल देखने को मिल रहा है. इस दुख की घड़ी में परिवार के सदस्य एक-दूसरे का सहारा बनकर साथ खड़े नजर आ रहे हैं. विशेष रूप से उनकी पत्नी अपर्णा यादव और बेटियां इस कठिन समय में परिवार के साथ मजबूती से जुड़ी हुई हैं. यह घटना एक बार फिर यादव परिवार की उस जटिल राजनीतिक और पारिवारिक यात्रा को भी सामने लाती है, जिसमें उतार-चढ़ाव के कई दौर रहे हैं.

यह भी पढ़ें...

2016 का राजनीतिक संकट और परिवार में तनाव

समाजवादी पार्टी के इतिहास में 2016 का समय बेहद महत्वपूर्ण और तनावपूर्ण माना जाता है. उस दौरान पार्टी के भीतर सत्ता और नेतृत्व को लेकर बड़ा विवाद सामने आया था. यह विवाद खासकर मुलायम सिंह यादव, अखिलेश यादव और शिवपाल यादव के बीच गहराया था, जिससे परिवार और पार्टी दोनों में खींचतान बढ़ गई थी.

उसी दौर में टिकट बंटवारे और संगठनात्मक पदों को लेकर मतभेद सामने आए. अखिलेश यादव और शिवपाल यादव के बीच मतभेद इतना बढ़ा कि राजनीतिक स्थिति और भी जटिल हो गई. इसी बीच मुलायम सिंह यादव ने अखिलेश यादव को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाकर शिवपाल यादव को यह जिम्मेदारी सौंप दी थी, जिससे पार्टी में तनाव और बढ़ गया.

निष्कासन और फिर बड़े राजनीतिक बदलाव

पार्टी में यह संकट दिसंबर तक और गहरा गया, जब अखिलेश यादव ने अपनी अलग उम्मीदवार सूची जारी कर दी. इसके बाद स्थिति और भी बिगड़ गई और मुलायम सिंह यादव ने अखिलेश और उनके समर्थकों को पार्टी से निष्कासित भी कर दिया, हालांकि बाद में यह निर्णय वापस ले लिया गया.

इसके बाद जनवरी 2017 में हुए एक महत्वपूर्ण अधिवेशन में बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिला, जब अखिलेश यादव ने स्वयं को राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित करते हुए नेतृत्व संभाल लिया. यह पूरा घटनाक्रम समाजवादी पार्टी के इतिहास का एक निर्णायक मोड़ माना जाता है.

प्रतीक यादव की 2017 की बातचीत 

प्रतीक यादव ने 2017 में एक संवाददाता से बातचीत के दौरान उस कठिन समय की झलक साझा की थी. उन्होंने बताया था कि उस दौर में मुलायम सिंह यादव तनाव में नहीं थे, बल्कि राजनीतिक उतार-चढ़ाव को सामान्य प्रक्रिया मानते थे.

प्रतीक ने यह भी बताया कि मुलायम सिंह यादव ने उन्हें समझाया था कि राजनीति में उतार-चढ़ाव सामान्य हैं और धैर्य के साथ परिस्थितियाँ सुधरती हैं. उन्होंने एक साधारण माहौल में, मक्के की रोटी और दाल खाते हुए यह संदेश दिया था कि निराश होने की जरूरत नहीं है और पार्टी फिर से मजबूत होकर सत्ता में वापसी करेगी.

परिवारिक रिश्तों और राजनीति के बीच संतुलन

प्रतीक यादव ने यह भी साझा किया था कि अखिलेश यादव से उनकी मुलाकात बैडमिंटन कोर्ट पर हुई थी, जहां बातचीत के दौरान उन्होंने अखिलेश की जिम्मेदारी और पार्टी के प्रति उनके दृष्टिकोण को सराहा था. उन्होंने कहा था कि परिवार में राजनीतिक मतभेद जरूर रहे, लेकिन सभी ने अपने-अपने कर्तव्यों को निभाया.

निधन के बाद परिवार में भावुक एकता

प्रतीक यादव के निधन के बाद पूरा समाजवादी परिवार एक साथ नजर आया. अखिलेश यादव अपने भांजे-भतीजों को संभालते दिखे, जबकि डिंपल यादव भावुक नजर आईं. चाचा शिवपाल यादव सहित अन्य परिजन भी इस दुख की घड़ी में परिवार के साथ खड़े रहे.

सूचना के अनुसार, प्रतीक यादव का अंतिम संस्कार लखनऊ और हरिद्वार में संपन्न हुआ. उनकी मृत्यु का कारण पल्मोनरी एम्बोलिज्म और कार्डियो रेस्पिरेटरी कोलैप्स बताया गया है.