पश्चिम बंगाल के हाई-प्रोफाइल चंद्रनाथ रथ मर्डर केस में 'रॉन्ग आइडेंटिटी' के चलते 12 दिनों तक खाकी के खौफ और कस्टडी के नर्क को झेलने के बाद बलिया का निर्दोष युवक राज सिंह आखिरकार बाइज्जत बरी होकर अपने घर लौट आया है. बेगुनाह बेटे को सही-सलामत वापस पाकर मां फफक-फफक कर रो पड़ी और बेटे के सिर पर हाथ फेरते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) का कोटि-कोटि धन्यवाद किया. यूपी Tak से खास बातचीत में जहां राज सिंह ने कस्टडी के दौरान पुलिस द्वारा एनकाउंटर की धमकी दिए जाने के खौफनाक दावों से पर्दा उठाया, वहीं उसकी मां ने उनके दूध और परवरिश पर उंगली उठाने वालों को करारा जवाब दिया है.
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"सीबीआई नहीं आती तो मेरे जैसे निर्दोष का एनकाउंटर हो जाता"— राज सिंह
यूपी Tak के कैमरे पर राज सिंह ने अपनी 12 दिनों की कस्टडी के खौफनाक अनुभवों और मानसिक टॉर्चर को साझा करते हुए बताया 'मुझ पर जुर्म कबूल करने के लिए बहुत भयंकर प्रेशर बनाया गया. मुझे डराया-धमकाया जा रहा था कि 'बोलो-बोलो, झूठ बोलोगे तो सीधे गोली मार देंगे, एनकाउंटर कर देंगे.' मैंने हाथ जोड़कर उनसे कहा कि मेरा फोन ले लीजिए, मेरी सारी कुंडली निकाल लीजिए, मेरा किसी अपराध से कोई वास्ता नहीं है. लेकिन महादेव का आशीर्वाद था कि मैं उनकी धमकियों के आगे झुका नहीं.अगर इस केस में सीबीआई (CBI) नहीं आई होती और निष्पक्ष जांच नहीं करती, तो मेरे जैसे बेगुनाह लड़के का अब तक एनकाउंटर हो चुका होता. इसके बाद जब मुझे ट्रांजिट रिमांड पर बंगाल ले जाया गया तो वहां भाषा की बड़ी समस्या थी। वहां मुझे एक खूंखार अपराधी की नजर से बड़ी ही जलील नजरों से देखा जा रहा था. मुझे हर पल लगता था कि ये लोग मुझे कहीं ले जाकर मार देने की प्लानिंग कर रहे हैं."
परवरिश पर सवाल उठाने वालों को जवाब मिल गया"— रो पड़ीं मां
बेटे को आंचल में छुपाए रोती हुई मां ने समाज और अपने करीबियों के तानों पर पलटवार करते हुए बेहद भावुक शब्दों में कहा 'अगर महादेव, अयोध्या नरेश प्रभु श्रीराम और यह सीबीआई की टीम नहीं होती, तो मैं भी अब तक मर गई होती. भगवान ने ही मेरे बच्चे की जान बचाने के लिए सीबीआई को भेजा था. जो लोग भी आज तक मेरे दूध, मेरी परवरिश और मेरे संस्कारों पर उंगली उठा रहे थे कि 'तुमने ही बच्चे को बिगाड़ा है', आज सच्चाई उनके सामने है. मैंने कभी अपने बच्चों को गलत राह नहीं दिखाई. जिन्हें मैं अपना समझकर अपने बच्चों को जिनके यहां भेजती थी कि वहां अच्छे लोग हैं, वे भी संकट में न हमें समझ पाए और न मेरे बच्चों को पर मुझे किसी से कोई शिकायत नहीं है. अयोध्या धाम से मेरे आंचल के फूल पर जो 'मर्डरर' होने का धब्बा लगाया गया था. आज प्रभु राम की कृपा से वह धुल गया है और सच्चाई की जीत हुई है."
11 मई को अयोध्या से लौटते वक्त ढाबे से हुई थी गिरफ्तारी
यह पूरा घटनाक्रम किसी फिल्मी कहानी जैसा है. राज सिंह अपने परिवार और मां के साथ अयोध्या में रामलला के दर्शन करने गए थे. वहां से वापस बलिया लौटते समय 11 मई को रास्ते में वे एक ढाबे पर खाना खाने रुके। जैसे ही खाना खाकर वे बाहर निकले, यूपी पुलिस की एसओजी (SOG) टीम ने उन्हें दबोच लिया. बंगाल चुनाव के नतीजों के दो दिन बाद 6 मई को सीएम शुभेंदु अधिकारी के पीए चंद्रनाथ रथ की हत्या हुई थी और पुलिस ने सिर्फ नाम के कन्फ्यूजन में राज सिंह को मुख्य आरोपी समझकर कस्टडी में ले लिया था.
₹200 के कुर्ते-पायजामे के बिल और CCTV ने बचाई जान
जब राज सिंह को बंगाल पुलिस और जांच एजेंसियां खूंखार कातिल मान चुकी थीं तब उनकी बेगुनाही का सबसे बड़ा और पुख्ता सबूत उनके घर वालों ने खोज निकाला. जिस दिन बंगाल में मर्डर हुआ था, उस दिन राज सिंह बलिया के एक मॉल में शॉपिंग कर रहे थे जहां से उन्होंने ₹200 का एक कुर्ता-पायजामा खरीदा था. राज के परिवार ने उस मॉल का सीसीटीवी (CCTV) फुटेज और खरीदारी का पक्का बिल सीबीआई टीम को सौंप दिया. तकनीकी और वैज्ञानिक जांच में यह पूरी तरह साबित हो गया कि हत्या के समय राज सिंह बंगाल में नहीं बल्कि बलिया में मौजूद थे, जिसके बाद उन्हें बाइज्जत बरी किया गया.
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