मेरा एनकाउंटर हो जाता...CM शुभेंदू अधिकारी के PA की हत्या के मामले में गलती से गिरफ्तार हुए राज सिंह ने ये बता दिया

इस कहानी में पुलिस ने बिना जांच दबाव बनाया जबकि सीबीआई ने निष्पक्ष जांच कर निर्दोष को बचाया. परिवार और सबूतों ने न्याय दिलाया.

यूपी तक

• 04:39 PM • 21 May 2026

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पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के पीए से जुड़े एक बेहद हाई-प्रोफाइल मामले में गलत पहचान के कारण गिरफ्तार किए गए राज सिंह ने रिहा होने के बाद पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. राज सिंह का आरोप है कि यूपी पुलिस की एसओजी टीम ने बिना किसी जांच के उसे जबरन उठाया और गुनाह कबूल करने के लिए उस पर एनकाउंटर करने की धमकी देकर भारी मानसिक व शारीरिक दबाव बनाया. युवक ने भावुक होते हुए साफ कहा कि अगर इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की एंट्री नहीं हुई होती और उनके पास सीसीटीवी फुटेज और मॉल की बिल जैसे पुख्ता सबूत नहीं होते तो पुलिस अब तक उनका एनकाउंटर कर चुकी होती. जेल से बेगुनाह साबित होकर बाहर आए इस युवक ने देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई को हाथ जोड़कर धन्यवाद दिया है.

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अयोध्या में रामलला के दर्शन कर लौटते वक्त ढाबे से हुई गिरफ्तारी

पीड़ित युवक ने अपनी गिरफ्तारी की पूरी कहानी बताते हुए कहा कि वह अपने परिवार और मां के साथ अयोध्या में भगवान श्री राम के दर्शन करने गया था. दर्शन करने के बाद जब वे लोग बलिया लौट रहे थे, तो रास्ते में खाना खाने के लिए एक ढाबे पर रुके। खाना खाने के बाद जैसे ही वे घर जाने के लिए निकलेतभी यूपी पुलिस की एसओजी (SOG) टीम ने उन्हें अचानक दबोच लिया. युवक का कहना है कि प्रशासन ने बिना किसी जांच-पड़ताल के सिर्फ नाम के कन्फ्यूजन या गलत पहचान के चलते उन्हें एक मामूली और बेगुनाह इंसान होने के बावजूद इस दलदल में झोंक दिया.

'झूठ बोलोगे तो गोली मार देंगे'

रिहा हुए युवक ने पुलिस कस्टडी के दौरान मिले टॉर्चर और खौफनाक अनुभवों को साझा करते हुए बताया 'मैं इस पूरे मामले में सबसे बड़ी लापरवाही और गलती पुलिस की एसओजी टीम की मानता हूं. उन्होंने कोई जांच नहीं की. मुझ पर जानबूझकर प्रेशर बनाया जा रहा था कि 'हां, तुम बोलो कि यह काम तुमने किया है'. मुझे बुरी तरह डराया-धमकाया जा रहा था. मुझसे कहा गया कि अगर झूठ बोलोगे तो सीधे गोली मार देंगे, तुम्हारा एनकाउंटर कर देंगे. जब मुझे यहां से बंगाल ले जाया गया, तो वहां भाषा की बड़ी समस्या थी. वहां मुझे एक अपराधी और बड़ी ही जलील नजरों से देखा जा रहा था. मुझे हर पल डर लग रहा था कि ये लोग कहीं ले जाकर मेरा एनकाउंटर करने की प्लानिंग कर रहे हैं."

CBI की निष्पक्ष जांच और मॉल की ₹2800 की पर्ची ने बचाई जान

युवक ने बताया कि इस पूरे मामले में दो चीजों ने उनकी जान बचाई. पहला उनके परिजनों द्वारा मुहैया कराया गया सीसीटीवी (CCTV) फुटेज और दूसरा मॉल का एक बिल. युवक के मुताबिक, घटना के वक्त वह वहां मौजूद नहीं था और इसके सबूत के तौर पर उसके पास ड्रेसलैंड मॉल से खरीदा गया ₹2,800 का एक कुर्ता-पायजामा का बिल मौजूद था जिसने साबित किया कि वह बेगुनाह है.

युवक ने विपक्ष द्वारा अक्सर निशाना बनाई जाने वाली केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) की तारीफ करते हुए कहा 'अगर सीबीआई नहीं आई होती तो मेरे जैसे निर्दोष लड़के का आज एनकाउंटर हो गया होता, मैं आज आप लोगों के बीच जिंदा नहीं होता. मैं हाथ जोड़कर सीबीआई के तमाम अधिकारियों को धन्यवाद देता हूं जिन्होंने बिना किसी राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव के निष्पक्ष होकर काम किया जो लोग सीबीआई पर सवाल उठाते हैं मैं उनसे कहना चाहता हूं कि अगर आप निर्दोष हैं तो सीधे सीबीआई जांच की मांग करिए वे आपको बेगुनाह साबित करके ही रहेंगे."

बुरे वक्त में क्षत्रिय महासभा ने फेरा मुंह

पीड़ित युवक जो क्षत्रिय महासभा के प्रदेश महासचिव पद पर तैनात हैं उन्होंने संगठन के रवैये पर भी गहरी नाराजगी जाहिर की. उन्होंने कहा कि जब वह इस संकट में फंसे थे, तो उनके घर के ऊपर लगा संगठन का बोर्ड सिर्फ एक लाइमलाइट बनकर रह गया था. बुरे वक्त में उनके अपने परिजनों और कुछ खास लोगों के अलावा संगठन का कोई भी व्यक्ति उनके परिवार की मदद के लिए आगे नहीं आया. उन्होंने संकेत दिए कि वह जल्द ही इस पद से इस्तीफा देने पर विचार कर सकते हैं क्योंकि ऐसे संगठनों का कोई मतलब नहीं रह जाता जो मुसीबत में साथ न दें.

मां के आंसुओं और प्रभु राम के न्याय पर था भरोसा

भावुक होते हुए युवक ने कहा कि उन्हें अपनी मां के आंसुओं और भगवान श्री राम पर पूरा भरोसा था कि वे अपने भक्त के साथ कभी अन्याय नहीं होने देंगे. उन्होंने देश-विदेश तक अपनी बेगुनाही की आवाज पहुंचाने के लिए पत्रकार बंधुओं और मीडिया का भी आभार व्यक्त किया जिसकी वजह से आज वे पूरी तरह बाइज्जत बरी होकर अपने घर लौट पाए हैं.