लखनऊ यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. परमजीत सिंह पर लगे गंभीर आरोप, अब एक-एक कर सामने आ रहीं ये चौंकाने वाली बातें

Lucknow University professor case: लखनऊ विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. परमजीत सिंह पर छात्रा के कथित यौन शोषण, अनुचित बातचीत और पेपर लीक के गंभीर आरोप लगे हैं. वायरल ऑडियो सामने आने के बाद विश्वविद्यालय ने उन्हें निलंबित कर दिया, जबकि पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया.

यूपी तक

20 May 2026 (अपडेटेड: 20 May 2026, 05:14 PM)

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Lucknow University professor case: लखनऊ विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. परमजीत सिंह से जुड़ा मामला इन दिनों काफी चर्चा में है. उन पर एक छात्रा के कथित यौन शोषण, अनुचित बातचीत और परीक्षा का पेपर लीक करने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं. मामला सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया, जबकि पुलिस ने भी शिकायत और शुरुआती जांच के आधार पर उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक कथित ऑडियो क्लिप के बाद छात्रों में भारी नाराजगी देखने को मिली और विश्वविद्यालय परिसर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया. इस घटना ने न सिर्फ विश्वविद्यालय बल्कि पूरे शिक्षा जगत में हलचल मचा दी है.

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आरोप है कि डॉ. परमजीत सिंह ने छात्रा से फोन पर निजी और अनुचित बातचीत की और साथ ही परीक्षा में मदद और कथित रूप से प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का लालच देकर उसे प्रभावित करने की कोशिश की. वायरल ऑडियो के सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की. अनुशासन समिति की अंतरिम रिपोर्ट में प्रथम दृष्टया आरोपों को गंभीर मानते हुए शिक्षक आचार संहिता के उल्लंघन, छात्रा के कथित मानसिक और यौन उत्पीड़न तथा विश्वविद्यालय की छवि को नुकसान पहुंचाने की बात कही गई. इसके आधार पर विश्वविद्यालय ने उन्हें निलंबित करने के साथ चार्जशीट भी जारी की है. वहीं पुलिस ने बुधवार को कार्रवाई करते हुए आरोपी प्रोफेसर को गिरफ्तार कर कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी.

डॉ. परमजीत सिंह की नियुक्ति वर्ष 2022 में लखनऊ विश्वविद्यालय में हुई थी और वे महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र बताए जाते हैं. वे इससे पहले रिसर्च एसोसिएट के रूप में भी काम कर चुके हैं. हालांकि, इस विवाद ने शिक्षा संस्थानों में छात्राओं की सुरक्षा, शिक्षक-छात्र संबंधों की मर्यादा और अनुशासनहीनता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. छात्रों का कहना है कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जरूरी है ताकि परिसर में सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल बना रहे. वहीं विश्वविद्यालय और पुलिस दोनों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

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