UP teacher recruitment dispute: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 69,000 शिक्षक भर्ती से जुड़े आरक्षण विवाद को लेकर अभ्यर्थियों का विरोध प्रदर्शन एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है. लंबे समय से सुप्रीम कोर्ट में लंबित इस मामले में सरकार की ओर से प्रभावी पैरवी न होने के आरोप लगाते हुए बड़ी संख्या में अभ्यर्थी बेसिक शिक्षा मंत्री के आवास तक पहुंच गए और अपनी नाराजगी व्यक्त की. प्रदर्शन के दौरान कई अभ्यर्थियों ने प्रतीकात्मक रूप से सड़क पर लेटकर विरोध जताया, जिससे माहौल भावुक और तनावपूर्ण हो गया.
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सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले पर नाराजगी
प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों का कहना है कि 69,000 शिक्षक भर्ती में आरक्षण को लेकर विवाद पिछले कई वर्षों से न्यायालय में लंबित है, लेकिन अब तक इसका समाधान नहीं हो पाया है. अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से समय पर प्रभावी पैरवी न होने के कारण मामला लगातार टलता जा रहा है, जिससे उनका भविष्य प्रभावित हो रहा है. उनका कहना है कि यदि सरकार सही तरीके से पक्ष रखे तो सुप्रीम कोर्ट में इस मामले का जल्द निस्तारण संभव है.
मंत्री आवास पर प्रदर्शन और प्रतीकात्मक विरोध
अभ्यर्थियों ने भारी गर्मी के बीच बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के आवास के बाहर पहुंचकर प्रदर्शन किया. इस दौरान कई अभ्यर्थियों ने सड़क पर लेटकर और दंडवत होकर विरोध जताया. कुछ प्रदर्शनकारियों ने भावुक होकर कहा कि वे पिछले कई वर्षों से संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक न्याय नहीं मिल पाया है. कई अभ्यर्थियों की तबीयत बिगड़ने की भी जानकारी सामने आई.
अभ्यर्थियों के आरोप और मांगें
प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि वे पिछले करीब छह वर्षों से इस भर्ती प्रक्रिया में न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं. उनका आरोप है कि बार-बार तारीखें लगने और सरकारी पक्ष से स्पष्ट रुख न आने के कारण मामला लंबा खिंचता जा रहा है. अभ्यर्थियों ने मांग की है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट में मजबूत पैरवी करे और जल्द से जल्द इस मामले का समाधान कराया जाए ताकि उनका करियर आगे बढ़ सके.
पिछला इतिहास और बढ़ता आंदोलन
यह पहली बार नहीं है जब 69,000 शिक्षक भर्ती को लेकर अभ्यर्थियों ने प्रदर्शन किया हो. इससे पहले भी कई बार लखनऊ में विरोध प्रदर्शन किए जा चुके हैं. पिछले प्रदर्शनों में भी अभ्यर्थियों ने विधानसभा तक मार्च किया था और अलग-अलग तरीकों से अपनी नाराजगी जताई थी. लगातार चल रहे इन आंदोलनों के कारण यह मामला अब एक बड़े प्रशासनिक और राजनीतिक मुद्दे के रूप में देखा जा रहा है.
सुप्रीम कोर्ट में केस और विवाद की पृष्ठभूमि
जानकारी के अनुसार, यह भर्ती प्रक्रिया लगभग छह वर्ष पहले शुरू हुई थी. बाद में आरक्षण व्यवस्था को लेकर विवाद खड़ा हुआ, जिसमें एससी, एसटी और ओबीसी आरक्षण के कथित गलत अनुपालन के आरोप लगाए गए. मामला पहले हाईकोर्ट में गया और फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा. फिलहाल यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है और अभ्यर्थियों का कहना है कि जब तक सरकार की ओर से स्पष्ट और मजबूत पक्ष नहीं रखा जाएगा, तब तक न्याय प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ेगी.
अभ्यर्थियों का दर्द और भविष्य की चिंता
प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थियों ने भावुक होकर कहा कि वे लंबे समय से आर्थिक और मानसिक दबाव में जी रहे हैं. उनका कहना है कि लगातार देरी के कारण उनका करियर प्रभावित हो रहा है और वे खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं. प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा. इस पूरे मामले ने एक बार फिर 69,000 शिक्षक भर्ती विवाद को चर्चा के केंद्र में ला दिया है और अभ्यर्थियों की न्याय की मांग को और मजबूत कर दिया है.
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