उत्तर प्रदेश के त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों को लेकर एक बेहद बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आ रही है. योगी सरकार ने पंचायत चुनाव में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का कोटा तय करने और आरक्षण की राह साफ करने के लिए एक समर्पित राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन करने का आदेश दे दिया है जिसकी बकायदा अधिसूचना भी जारी कर दी गई है. इस फैसले के बाद यह साफ हो गया है कि प्रदेश में पंचायत चुनाव फिलहाल टल गए हैं. इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के निर्देश पर गठित इस आयोग की कमान हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज राम अवतार सिंह को सौंपी गई है. यह आयोग जमीनी स्तर पर ओबीसी आबादी का सर्वे कर आरक्षण का स्वरूप तय करेगा जिसका सीधा असर राज्य के आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव के समीकरणों पर भी पड़ना तय माना जा रहा है.
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क्यों टले यूपी पंचायत चुनाव?
दरअसल ये चुनाव अप्रैल-मई के महीने तक संपन्न हो जाने थे. लेकिन चुनावों में सबसे बड़ा कानूनी पेच ओबीसी आरक्षण को लेकर फंस गया. सुप्रीम कोर्ट के ट्रिपल टेस्ट नियम के मुताबिक, किसी भी स्थानीय निकाय चुनाव में ओबीसी आरक्षण लागू करने से पहले तीन अनिवार्य शर्तों को पूरा करना बेहद जरूरी होता है.
समर्पित ओबीसी आयोग का गठन: पिछड़े वर्ग के लिए एक विशेष आयोग बनाया जाए.
वास्तविक आबादी का रैपिड सर्वे: ग्राम पंचायत, ब्लॉक और जिला स्तर पर पिछड़ा वर्ग की वास्तविक आबादी और उनके राजनीतिक प्रतिनिधित्व की जरूरत का विस्तृत और सटीक आकलन किया जाए.
50% की अधिकतम सीमा: एससी (SC), एसटी (ST) और ओबीसी (OBC) का कुल मिलाकर कुल आरक्षण किसी भी स्थिति में 50% की सीमा से ऊपर नहीं होना चाहिए.
चूंकि पुराना ओबीसी आयोग अपना मूल कार्यकाल और एक्सटेंशन खत्म कर चुका था. इसलिए उसके पास कानूनी तौर पर इस नए सर्वेक्षण को करने का अधिकार नहीं बचा था. इसी कानूनी अड़चन को दूर करने के लिए योगी सरकार ने इस नए समर्पित आयोग का गठन किया है.
जस्टिस राम अवतार सिंह करेंगे अध्यक्षता
इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस राम अवतार सिंह को इस नवगठित राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग का अध्यक्ष बनाया गया है. उनके अलावा इस उच्च स्तरीय टीम में चार अन्य सदस्य भी शामिल किए गए हैं.
बृजेश कुमार (रिटायर्ड अपर जिला जज)
संतोष कुमार विश्वकर्मा (रिटायर्ड अपर जिला जज)
अरविंद कुमार चौरसिया (रिटायर्ड आईएएस)
एसपी सिंह (रिटायर्ड आईएएस)
रिपोर्ट के लिए मिला 3 महीने का वक्त
इस आयोग को अपनी फाइनल रिपोर्ट सौंपने के लिए 3 महीने का समय दिया गया है. आयोग नवंबर 2026 तक अपनी विस्तृत सर्वे रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा जिसके बाद ही यह तय होगा कि 57,000 से अधिक ग्राम पंचायतों में कितनी सीटें ओबीसी के लिए आरक्षित होंगी.
कौन हैं अध्यक्ष जस्टिस राम अवतार सिंह?
आयोग के अध्यक्ष बनाए गए जस्टिस राम अवतार सिंह उत्तर प्रदेश के बिजनौर के रहने वाले हैं और उनका प्रोफाइल बेहद मजबूत रहा है. इससे पहले साल 2022-23 में हुए नगरीय निकाय चुनावों (Urban Local Body Elections) के दौरान भी उन्हें समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का अध्यक्ष बनाया गया था. उस समय उन्होंने पूरे प्रदेश का व्यापक दौरा कर सटीक आंकड़े जुटाए थे, जिसके आधार पर ही निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण का रास्ता साफ हुआ था. अब एक बार फिर वे स्थानीय निकायों में पिछड़े वर्ग की सामाजिक, राजनीतिक और प्रशासनिक भागीदारी का बारीकी से अध्ययन कर अपनी सिफारिशें सरकार को देंगे.
26 मई को खत्म हो रहा है कार्यकाल, अब क्या है सरकार का 'प्लान बी'?
उत्तर प्रदेश में करीब 57,000 से ज्यादा ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सदस्य, बीडीसी (BDC), ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्षों के पदों पर चुनाव होने हैं. साल 2021 में चुने गए इन मौजूदा पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो रहा है. चूंकि आयोग की रिपोर्ट नवंबर 2026 तक आएगी इसलिए चुनाव आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव के आसपास या उसके बाद ही संभव हो पाएंगे. ऐसे में गांवों की सरकार सुचारू रूप से चलती रहे इसके लिए सरकार 'प्लान बी' पर विचार कर रही है. इसके तहत या तो मौजूदा प्रतिनिधियों का कार्यकाल कुछ समय के लिए बढ़ाया जा सकता है या फिर पंचायतों में 'प्रशासक' नियुक्त किए जा सकते हैं. फिलहाल सरकार के इस अगले कदम पर पूरे सूबे की निगाहें टिकी हुई हैं.
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