अखिलेश यादव ने जयंत चौधरी पर फिर कसा तंज! चवन्नी से शुरू हुआ विवाद अब 120 सीटों पर पहुंच गया

यूपी तक

• 02:45 PM • 23 Aug 2026

Akhilesh Vs Jayant: अखिलेश यादव और जयंत चौधरी के बीच 'चवन्नी' वाले बयान से शुरू हुई सियासी जंग अब 120 सीटों और जाट समाज के सम्मान तक पहुंच गई है. दोनों नेताओं के लगातार पलटवार से पश्चिमी यूपी की सियासत गरमा गई है.

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Akhilesh Vs Jayant: उत्तर प्रदेश की सियासत में ओम प्रकाश राजभर के बाद अब जयंत चौधरी और अखिलेश यादव के बीच जुबानी जंग बहुत तेज हो गई है. अखिलेश यादव के एक तंज के बाद शुरू हुआ यह सियासी बवंडर अब काफी आगे निकल चुका है. कभी हाथ पकड़कर चलने वाले इन दोनों नेताओं की लड़ाई 'चवन्नी' से शुरू होकर अब 120 सीटों और जाट समाज के सम्मान तक पहुंच गई है. दोनों तरफ से लगातार तीखे वार और पलटवार किए जा रहे हैं.

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अखिलेश के चवन्नी बयान पर बवाल

कुछ दिन पहले अखिलेश यादव ने अपने पुराने गठबंधन साथियों पर तीखा तंज कसा था. उन्होंने कहा था कि 'हमने चवन्नी का रुपया बना दिया, फिर भी वो हमें छोड़कर चले गए.' हालांकि अखिलेश ने अपने इस बयान में सीधे तौर पर जयंत चौधरी का नाम नहीं लिया था, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे जयंत से ही जोड़कर देखा गया.

जयंत का पलटवार, मायावती आईं साथ

इस बयान के करीब 4 दिन बाद जयंत चौधरी ने करारा जवाब दिया. जयंत ने कहा कि सियासत में अगर सस्ते शब्द ही बोलने थे, तो मेरा नाम लेकर बोलते, लेकिन जाट समाज को निशाना बनाना ठीक नहीं है. इस विवाद में मायावती भी जयंत के समर्थन में उतर आईं. मायावती ने अखिलेश से माफी मांगने की बात कही और इसे चौधरी चरण सिंह व जाट समाज के सम्मान से जोड़ दिया.

जयंत को 120 सीटें दे बीजेपी

शनिवार को लखनऊ में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश यादव ने फिर से बड़ा हमला बोला है. उन्होंने बीजेपी और उसके सहयोगियों पर तंज कसते हुए कहा कि अगर 30 सीटों की बात है, तो जयंत को चार गुना यानी 120 सीटें मिलनी चाहिए. अखिलेश ने कहा कि अगर उन्हें 120 सीटें नहीं मिलती हैं, तो यह उनके समाज के साथ-साथ चौधरी चरण सिंह और चौधरी अजीत सिंह का बहुत बड़ा अपमान होगा. उन्होंने यह भी कहा कि सीटें न मिलने पर हम निंदा प्रस्ताव लाएंगे.

अखिलेश को किसानों की चिंता नहीं

अखिलेश यादव के 120 सीटों वाले बयान पर जयंत चौधरी ने भी पलटवार करने में देरी नहीं की. अखिलेश का एक वीडियो शेयर करते हुए जयंत ने कहा कि इन्हें आरएलडी की सीटों की फिक्र है, लेकिन अपनी नहीं. जयंत ने तंज कसते हुए कहा कि अखिलेश यादव को रसगुल्ले की कीमत और गाड़ी के माइलेज की तो चिंता है, लेकिन पश्चिमी यूपी के गन्ना किसानों की कोई परवाह नहीं है. जयंत ने इस पूरे मामले को पश्चिमी यूपी के सबसे बड़े मुद्दे यानी गन्ना किसानों से जोड़ दिया.

अब अलग-अलग हैं दोनों की राहें

यह पूरी लड़ाई पश्चिमी यूपी के जाट और मुस्लिम-यादव वोट बैंक के इर्द-गिर्द घूम रही है. साल 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी और आरएलडी ने एक साथ चुनाव लड़ा था, जिससे बीजेपी की मुश्किलें काफी बढ़ गई थीं. लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले जयंत चौधरी ने सपा का साथ छोड़ दिया और एनडीए में शामिल हो गए. अब वही जयंत चौधरी अखिलेश यादव के सबसे बड़े राजनीतिक आलोचक बन गए हैं.