Baghpat Murder Case: उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के चर्चित व्यापारी हत्याकांड में एक बेहद हैरान कर देने वाला खुलासा सामने आया है. दिनदहाड़े व्यापारी बाप-बेटे की हत्या करने वाला कुख्यात हिस्ट्रीशीटर वरुण लोहारी, असल में अपराध का रास्ता छोड़कर सफेदपोश बनने की तैयारी में था. वह अपने खूनी अतीत को पीछे छोड़कर गांव का प्रधान बनने का ख्वाब देख रहा था. हालांकि, चुनावी मैदान में उतरने और अपनी छवि बदलने से पहले ही सालों पुरानी रंजिश ने ऐसा खूनी मोड़ लिया कि उसका राजनीतिक सफर शुरू होने से पहले ही हमेशा के लिए खत्म हो गया.
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फेसबुक पर खुद को 'प्रधान' घोषित कर मांग रहा था आशीर्वाद
गांव की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए वरुण लोहारी ने सोशल मीडिया को अपना हथियार बनाया था. उसने फेसबुक पर 'चौधरी वरुण प्रधान लोहारी' के नाम से एक पेज बना रखा था, जिस पर वह लगातार राजनीतिक पोस्ट साझा कर रहा था. अपनी एक पोस्ट में उसने सार्वजनिक ऐलान करते हुए लिखा था, "मेरा परिवार और मित्र कौन-कौन मेरे साथ हैं? अबकी बार आपकी सेवाओं में प्रधान पद का चुनाव लड़ रहा हूं, अपनी-अपनी राय देना. हमेशा पूरे गांव की सेवा में रहूंगा." इसके बाद एक अन्य पोस्ट में उसने खुद को छोटा भाई बताते हुए ग्रामीणों से चुनावी आशीर्वाद भी मांगा था. इन पोस्टों से साफ था कि वह अपनी आपराधिक छवि को धोकर जनता के बीच एक नई पहचान स्थापित करने की पूरी कोशिश में जुटा हुआ था.
एलएलबी छात्र से कुख्यात अपराधी बनने का 16 साल पुराना इतिहास
अगर वरुण लोहारी के बैकग्राउंड पर नजर डाली जाए, तो उसका आपराधिक इतिहास करीब 16 साल पुराना था. उसने जब अपराध की दुनिया में कदम रखा था, तब वह एलएलबी (LLB) का छात्र था. उसके खिलाफ पहला मुकदमा गांव के ही एक व्यक्ति को गाली-गलौज करने और जान से मारने की धमकी देने का दर्ज हुआ था. लेकिन इसके बाद वह सुधरने के बजाय जुर्म के दलदल में धंसता चला गया और उसके खिलाफ हत्या, जानलेवा हमला, और गैंगस्टर एक्ट जैसे गंभीर अपराधों के कुल 19 मुकदमे दर्ज हो गए. साल 2010 में उस पर जानलेवा हमले के दो केस दर्ज हुए, 2011 में गैंगस्टर एक्ट लगा और 2015 उसके इतिहास का सबसे सक्रिय साल रहा जब उसने हरियाणा के सोनीपत में चोरी और जमानत पर बाहर आकर एक हत्या की वारदात को अंजाम दिया.
मुठभेड़ से लेकर भीड़ के हत्थे चढ़ने तक का खूनी अंत
क्षेत्र में खौफ का पर्याय बन चुके वरुण लोहारी का नाम साल 2019 में बड़ौत इलाके में पुलिस टीम पर फायरिंग करने और मुठभेड़ के मामले में भी सामने आया था, जिसके बाद वह बागपत और आसपास के इलाकों का कुख्यात हिस्ट्रीशीटर घोषित हो गया. वह लगातार अपनी छवि बदलने और ग्राम प्रधान का चुनाव लड़ने की महत्वाकांक्षा पाले हुए था, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. व्यापारी बाप-बेटे की दिनदहाड़े हत्या करने के बाद उपजे भारी आक्रोश के बीच वह खुद को बचा नहीं सका. भीड़ के हाथों हुई मौत के साथ ही उसका ग्राम प्रधान बनने का सपना और राजनीति में कदम रखने की तमाम योजनाएं हमेशा-कश्मीश के लिए जमींदोज हो गईं.
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